वेंटीलेटर का उपयोग कब करते है – Ventilator Uses In Hindi

वेंटीलेटर का उपयोग से पहले यह जाने कि वेंटिलेटर एक कृत्रिम मशीन है जिसका उपयोग सर्जरी, फेफड़ों से जुड़े रोग, साँस लेने में दिक्कत व किसी बीमारी की गंभीर परिस्थिति में किया जाता है | यह मशीन मरीज के फेफड़ों में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड को शरीर से बहार निकालकर फेफड़ों को आक्सीज़न प्रदान कराती है | कई डॉक्टर्स सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया देने के उपरांत भी इस मशीन का उपयोग करते है |

वेंटिलेटर के प्रकार उसका उपयोग

वेंटिलेटर मुख्यतः दो प्रकार के होते है

1. नेगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर

इस मशीन के उपयोग का समय –  हेमोक्रोमैटोसिस यानि फेफड़ों में आयरन जमा हो जाने के उपरांत नेगेटिव प्रेशर वेंटिलेटर का उपयोग करके फेफड़ों में मौजूद आयरन को निकालने का काम किया जाता है |

2. इंट्रा-पल्मोनरी वेंटिलेटर

उपयोग करने का समय – इस मशीन का उपयोग अधिक उम्र में आये कार्डियोजेनिक सदमे के कारण फेफड़े का श्वसन दबाव जांचने व आईएबीपी के दवाव को बढ़ाने में  प्रयोग किया जाता है |

वेंटीलेटर का उपयोग कैसे होता है –

इस मशीन का उपयोग करने से पहले डॉक्टर्स पीड़ित व्यक्ति के गले के हिस्से का चुनाव भी कर सकते है, क्योंकि कभी कभी डॉक्टर्स रोगी के गले में सर्जरी के मध्यम से चीरा लगाकर भी इस मशीन का उपयोग करते है, इस सर्जरी को ट्रेकियोस्टोमी के नाम से जाना जाता है | अब डॉक्टर्स इस मशीन में मौजूद ईटी ट्यूब को पीड़ित के मुहं नाक व गले के माध्यम से विंडपाइप या श्वास नली तक पहुंचाया जाता है |

अब इस ट्यूब को धीरे धीरे खिसकाकर श्वसन तंत्र तक पहुंचाकर इस मशीन के द्वारा पीड़ित के फेफड़ों में आक्सीज़न प्रदान कराई जाती है | ईटी ट्यूब को मरीज के श्वसन तंत्र तक पहुंचाने के लिए कई बार डॉक्टर्स मरीज को एनेस्थीसिया का सहारा भी लेते है | वेंटिलेटर दिए गए मरीज को खाना भी नली के माध्यम से ही दिया जाता है |

वेंटीलेटर का उपयोग की जरुरत किन मरीजों पड़ती है –

किसी गंभीर सर्जरी के दौरान – सर्जरी के दौरान इस मशीन का उपयोग मरीज को लगातार साँस देने के लिया किया जाता है, यह मशीन अक्सर ह्रदय से जुडी सर्जरी व  फेफड़ों से जुडी सर्जरी के दौरान ही उपयोग में लायी जाती है, लेकिन सर्जरी के उपरांत मरीज को इस बात का अनुभव नही होता है कि वह वेंटिलेटर मशीन से जुड़ा था |

फेफड़े रोग से ग्रस्त मरीज को दी जाती है यह मशीन – फेफड़े से जुड़े रोग के कारण मरीज को साँस लेने में कठनाई का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से मरीज को आक्सीज़न प्रदान करने मे इस मशीन का उपयोग किया जाता है | फेफड़े से जुड़े रोग में हो सकता है, मरीज को कई दिनों तक इस मशीन के द्वारा आक्सीज़न प्रदान कराई जाये |

अन्य परिस्थितियों में भी किया जाता है इस मशीन का उपयोग :

इस मशीन के द्वारा होने वाले नुकसान –

वैसे तो इस मशीन के द्वारा मरीज को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी महसूस नही होती है, लेकिन यदि इस मशीन के द्वारा आक्सीज़न के दवाव को अधिक रखा जाये तो मरीज के फेफड़ों पर इसका बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है | कई बार बिना सावधानी के ईटी ट्यूब डालने व निकलने में मरीज के वोकल कॉर्ड में भी दिक्कत आ सकती है |