गले में इंफेक्शन या संक्रमण का इलाज – Throat Infections in Hindi

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गले के इंफेक्शन

गले मे इंफेक्शन या संक्रमण काफी आम बात है। सर्दियों के मौसम में गले मे इंफेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है। गले में इंफेक्शन का मुख्य कारण बैक्टिरिया होता है। यह बच्चों या बडो दोनों को कभी भी हो सकता हैं । लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों में ये इंफेक्शन बहुत आम पाया जाता है। इंफेक्शन के लक्षण आमतौर 1से 3 दिनों में दिखाई देने लग जाते है और हर व्यक्ति के लक्षण अलग अलग होते है। इन लक्षणो को  हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह बहुत गंभीर हो सकते है।

इंफेक्शन के समय गले मे सूजन दिखाई देती है और खाना खाने में काफी कठिनाई महसूस होती है। गले मे किसी प्रकार का दर्द,ख़राश, कांटे जैसे लगना यह सब गले के इंफेक्शन के लक्षण है। यदि किसी व्यक्ति को बुखार हो तो भी गले मे खराबी आ जाती है यह इंफेक्शन रोगी के छीकने से खाँसने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल जाती है। बहुत से रोगियों का गला दर्द के कारण लाल पड़ जाता है और पानी तक निगलने में परेशानी होती है।

इंफेक्शन से टॉन्सिल बढ़ जाते है और सर्दी लग के बुखार भी आ सकता है और यह इंफेक्शन गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकता है।

इन्फेक्शन होने पर जीभ पर अक्सर छोटी छोटी लाल रंग की बिन्दुओं के साथ कांटेदार होती है। और ये दिखने में एकदम स्ट्रॉबेरी की तरह लगती है। गले में इन्फेक्शन  से कई लोगों में पेटेचिए पनप जाते है जो दिखने में लाल रंग के दिखाई देते है। अगर आपको टोंसिस्ल है तो उन्हें भी चेक करे। गले का सुज जाना और गले में तीवर दर्द होना ये इन्फेक्शन के कारण हो सकते है अपने गले में सामने की तरफ देखने पर आपको दिखाई देगा लाल रंग के और सफ़ेद धब्बों की एक परत सी दिखाई देगी।

जाने गला खराब होने के कारण

  1. मौसम में बदलाव आना
  2. धूल मिट्टी से एलर्जी होना
  3. बैक्टिरिया से इंफेक्शन होना
  4. तला व मसालेदार खाना खाना
  5. धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन करना ।

मौसम में बदलाव के कारण गले मे इंफेक्शन होना आम बात है। गर्मी के मौसम में बर्फ के पानी पीने के कारण भी गले मे इंफेक्शन हो जाता है और आवाज भी बहुत अलग आने लगती है। मौसम में परिवर्तन होना संभाविक है और हमे मौसम के अनुरूप चलना पड़ता है। तापमन में बदलाव के कारण अधिकतर लोगों को टॉन्सिल्स की प्रोब्लम हो जाती है। मौसम में परिवर्तन होने पर या किसी भी कारणवश तेज धूप और गर्मी में रहने के बाद एकदम ठंडा पानी पी लेने गले मे इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। धूल मिट्टी से एलर्जी,घर के अंदर की धूल में पाए जाने वाले सूक्ष्म किटाणु से होने वाली एलर्जी को धूल से एलर्जी कहते है। इसमें छींके आना,नाक बहना और गले मे खराश होना है।

बैक्टिरिया से इंफेक्शन,मानव शरीर मे कोशिकाओं के तुलना में अधिक बैक्टिरिया होते है। वे त्वचा और आंत्र में रहते है।कई प्रकार के बैक्टिरिया अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते है लेकिन कभी कभी वे संक्रमण का कारण भी बन जाते है। बैक्टिरिया इंफेक्शन गला,फेफड़े, त्वचा, आंत्र और शरीर के  अन्य भागों को प्रभावित करते है। बाहरी खाना खाने से इंफेक्शन होना भी आम बात हैं। बाहरी खाने में तेल ,बहुत अधिक मसलो का प्रयोग किया जाता है। जिससे इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। बाहरी खाने में स्वच्छता नही होती इसलिए इनमें बैक्टिरिया बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते है। धूम्रपान व तम्बाकू का सेवन करना बहुत ही हानिकारक होता है। धूम्रपान करने से गले मे जलन और टॉन्सिल और भी बहुत गंभीर बीमार होने का खतरा रहता है। धूम्रपान करने वाले इंसान का शरीर उसका आदि हो जाता है और एक बड़ी बीमारी का शिकार हो जाता है।

गले के इंफेक्शन को दूर करने के घरेलु उपाय

  1. इमली के पानी से कुल्ला और ग़रारे करने से काफी आराम मिलता है।
  2. अगर आप तुरन्त गले के दर्द से राहत पाना चाहते है तो पालक उबाल कर इसके पानी को छान लें और अब इस पानी से गले के ग़रारे करे।
  3. एक कप पानी हल्का गुनगुना करके चौथाई चम्मच हल्दी और आदा चम्मच नमक डाल कर ग़रारे करे,ग़रारे करने के आदा घंटा किसी भी अन्य वस्तु का सेवन ना करे।इससे काफी आराम मिलेगा।
  4. गले की सूजन कम करने के लिए नमक के पानी का प्रयोग करने से सूजन कम हो जाती है और नमक के पानी से दिन में 2 से 3 बार ग़रारे करने से यह समस्या दूर हो जाती है।

जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होते तब तक अन्य सदस्यों के संपर्क में कम से कम आने की कोशिश करे क्योंकि कई वायरस लक्षण शुरू होने से पहले ही अधिक फ़ैलते है।

5.बार बार हाथ धोना गले मे इंफेक्शन समेत अन्य कई इंफेक्शन से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। खाँसने, छीकने या नाक साफ करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए।

6.खांसी करते समय या छींकते समय अपने मुंह को रुमाल से या किसी कपड़े से ढक लेना चाहिए।  अपने आहार में बदलाव करके भी गले के इंफेक्शन से बचा जा सकता है। पानी खूब मात्रा में पीना चाहिए। पानी पीने से आपका गला भी नम रहेगा। और इससे इंफेक्शन का खतरा काफी कम हो जाएगा।

गले के इन्फेक्शन का होम्योपैथिक उपचार

गले में इन्फेक्शन किसी को भी प्रभावित कर सकता है। पारंपरिक उपचार केवल लक्षणों को रोकती है इसके दुष्परिणाम भी है।

  1. 1.बेलडाडो गले में इन्फेक्शन के लिए सबसे अच्छा होमियोपैथी उपाय है। अगर गले से कुछ भी निगलने में कठिनाई हो तो बेल्डाडो सबसे अच्छा होता है ।
  2. 2.यदि आपके गले में दर्द होने के साथ साथ आपको खांसी भी है तो हेपर सल्फ लक्षणों के उपचार में बहुत मदद मिलती है।
  3. जब आपके गले में किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ निगलने में कठिनाई होती है तो सबसे अच्छा इलाज लेब्सिस के द्वारा इलाज कर सकते है।
  4. गले में गराश के साथ और सुखी खांसी का होना इसमें  डोसरा सबसे अच्छा इलाज माना जाता है।
  5. कभी कभी तेज बोलने या चिल्लाने से भी हमारे गले में काफी दर्द महसूस होता है।अगर इस तरह का दर्द है तो कास्टिकिक बहुत लाभकारी हो सकता है।  ( अगर आपको तरल पदार्थ निगलने में परेशानी हो,अपनी लार भी न निगल पाए या गले मे तीवर दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाये। )

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