डिस्लेक्सिया के प्रकार व लक्षण-symptoms of dyslexia in Hindi

0
117
डिस्लेक्सिया के प्रकार व लक्षण

डिस्लेक्सिया बच्चो से जुडी बीमारी होती है| इस बीमारी में बच्चे को पड़ने में दिक्कत आती है| इस बीमारी के बच्चे में होने से वो किताब के शब्दों को ठीक से पढ़ नही पाता है | जिसकी वजह से बच्चे को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है|जैसे की जिस किसी भी बच्चे को ये बीमारी होती है वो सही तरह से पढाई के साथ साथ अपने दिमाग का भी विकाश नही कर पाता है | इस वजह से बच्चा समाज में हसी का पात्र भी बनकर रह जाता है|इसी लिये आपको इस बीमारी के बारे में जानना बहुत जरुरी है|तो आज हम डिस्लेक्सिया जैसी बीमारी के बारे में बात करने जा रहे है|की डिस्लेक्सिया किस प्रकार की बीमारी होती है|इसके क्या लक्षण होते है|और इस बीमारी का क्या उपचार होता है|

डिस्लेक्सिया के प्रकार

प्राइमरी डिस्लेक्सिया :-

डिस्लेक्सिया का ये एक शुरूआती रूप होता है|जिसमे बच्चे को छोटी छोटी परेशानी का सामना करना पड़ता है|जैसे की बच्चा किसी भी किताब के शब्दों को जैसे की पढ़ना,शब्दों की पहचान करना,अंकगणित को हल करना,निर्देश को ठीक से ना समझ पाना, ही इसके शुरुआती लक्षण होते है|जिनके बारे में पता चलते ही आपको अपने बच्चे का तुरंत उपचार करवाना चाहिये|जिससे की आपका बच्चा हसी का और आगे चलकर और किसी बड़ी समस्या का शिकार ना हो पाये|

  • सेकेंड्री डिस्लेक्सिया :-

इस डिस्लेक्सिया को डेवलपमेंटल डिस्लेक्सिया भी कहते हैं| यह हमारे मस्तिष्क के भ्रूण का विकास ना हो पाने की वजह से होता है|इसके हो जाने पर बच्चे को शब्दों की पहचान और शब्दों को बोलने में परशानी आने लगती है|सेकेंड्री डिस्लेक्सिया की बीमारी और इसका असर आमतौर पर उम्र के साथ सुधर जाता है|लेकिन बच्चा इस बीमारी का अनुभव बचपन में ही कर सकता है |अगर आपके बच्चे को भी इस प्रकार की परेशानी हो रही है|तो अपने बच्चे को जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास ले जाये और इसका उपचार करवाये|

  • ट्रॉमा डिस्लेक्सिया :-

ट्रामा डिस्लेक्सिया की समस्या भी हमको कई बच्चो में देखने को मिलती है|इस बीमारी के भी कई कारण होते है |जैसे की अगर आपके मस्तिष्क में जोर से चोट लग जाने के कारण भी ये बीमारी हो जाती है|और बच्चो में ये बीमारी कुछ इस तरह से होती है|अगर आपके बच्चे को लगातार फ्लू, सर्दी जुखाम या कान के संक्रमण से बच्चे को सुनने की क्षमता में कमी आती हो,तो सतर्क हो जाये आपके बच्चे को भी ट्रॉमा डिस्लेक्सिया हो सकता है|क्योंकि अगर आपका बच्चा सही से सुन नही पाता है|तो इसकी वजह से आपका बच्चा ना सही शब्द बोल पायेगा और ना ही सही तरह से पढ़ पायेगा|और युवाओ में ये समस्या की शुरुआत उनके मस्तिष्क में किसी चोट के कारण आने लगती है|

डिस्लेक्सिया के लक्षण

  • पढने में दिक्कत :-

डिस्‍लेक्सिया बीमारी के हो जाने पर बच्चे में हमको ये लक्षण खुद व खुद दिखाई देने लगते है|ऐसा नही है की इन लक्षणों का पाता सिर्फ बच्चे के स्कूल जाने के बाद ही पता चले|इसका पता हम बच्चे में पहले ही लगा सकते है|जैसे की अगर आपका बच्चा सही से बोल नही पा रहा है|और उसको बोलने में दिक्कत आ रही है |तो इसी वजह से आपका बच्चा सही से पढ़ भी नही पायेगा|इसी लिये अगर आपको अपने बच्चे में ये लक्षण दिखाई दे तो तुरंत अपने बच्चे का इलाज करवाये |

  • स्कूल जाने की उम्र में डिस्‍लेक्सिया :-

अगर आपका बच्चा स्कूल में ठीक से पढ़ नही पा रहा है|और वो अध्यापक की बातों को ठीक तरह समझ भी पा रहा है तो समझ जाये की आपका बच्चा भी डिस्‍लेक्सिया जैसी बीमारी का शिकार हो गया है|तो उस बच्चे को डाटे फटकारे नही बल्कि उसके साथ प्यार से बात करे|क्योंकि अगर हम अपने बच्चे के साथ प्यार से पेश आयेंगे|तो भी हम इस बीमारी को ठीक कर सकते है|

  • युवाओ में डिस्‍लेक्सिया के लक्षण :-

युवाओ और अधिक उम्र के व्यक्तिओ में ये समस्या जल्दी होने लगती है|अगर कोई युवा अपने बचपन में ठीक हो और युवा होते ही उसको ये परेशानी आने लगे तो इसके केवल दो ही कारण हो सकते है|इसका पहला कारण अगर किसी व्यक्ति के सर पर गंभीर चोट आ जाये तो भी उस व्यक्ति को डिस्‍लेक्सिया की परेशानी आने लगती है|या फिर व्यक्ति को युवा अवस्था में सुनने में अप्रेशानी होने लगे तो भी डिस्‍लेक्सिया जैसी बीमारी होने का खतरा बना रहता है|

  • सुनने में दिक्कत :-

अगर किसी बच्चे को सुनने में परेशानी हो रही है|तो आपके बच्चे में डिस्‍लेक्सिया जैसी बीमारी की शुरुआत हो रही है|अक्सर हम छोटे बच्चो में लक्षण को अनदेखा कर देते है|जिसका नुकसान बाद में हमारे बच्चे को उठाना पड़ता है|अगर आप इन लक्षणों को अपने बच्चे में देखे तो तुरंत ही इदका इलाज डॉक्टर से करवाए|इस बीमारी के और भी कई लक्षण होते है |

1 – आपके बच्चे का देर से बोलना
2 – नये शब्दों को देर से पढ़ना
3 – अधिक उम्र होने पर भी बच्चे का ना पढ़ पाना
4 – किसी भी चीज को याद ना रख पाना
5 – लिखे हुये शब्द को ना पढ़कर कोई नया शब्द बोलना
6 – किसी भी सावल को हल ना कर पाना या फिर उस सवाल को समझ ही ना पाना

अगर आपको अपने बच्चे में ये लक्षण दिखाई दे तो तुरंत ही अपने बच्चे का डॉक्टर सी इलाज करवाए साथ साथ अपने बच्चे के साथ प्यार से पेश आये जिससे द्वारा आपके बच्चे की ये बीमारी जल्दी ठीक हो जाएगी|

 

और पढ़े- सूरजमुखी की बीमारी क्या होती है – Albinism Disease In Hindi

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.