लाल बुखार की समस्या और समाधान

लाल बुखार

लाल बुखार आजकल मौसम बहुत तेजी से परिवर्तित हो रहा है। और मौसम की बदलने की गति इतनी तेज होती है कि उसकी गति के आगे इंसानों की बीमारियों से बचाव करने की गति पिछड़ जाती है। पहले तो तेज़ गर्म, फिर झमाझम बारिश और इसी वजह से संक्रामक रोगों का ख़तरा काफी बढ़ गया है। दरअसल जब वातावरण की इम्युनिटी काफी कम होती है तो कई तरह की बिमारियों की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है और इसकी चपेट में सबसे पहले बच्चे आते हैं। बदलते मौसम की बीमारियों में से लाल बुखार एक बीमारी है।

लाल बुखार क्या है

लाल बुखार एक संक्रमण है। इसे ‘स्कारलातिना’और अंग्रेजी में इसे ‘स्कारलेट’ भी कहा जाता है। ये ज्यादातर उन लोगों में अपनी जगह बनाता है जिनके गले के पास खराबी होती है। लाल बुखार ग्रुप ए के स्ट्रेप्कोकोकस बैक्टेरिया के रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट के ऊपरी हिस्से में इंफेक्शन होने की वजह से होता है। और ये जो इंफेक्शन होता है ये टॉक्सिन बन जाने के कारण होता है। असल में शुरुआत में इसमें गले में इंफेक्शन होता है और गले के बाद ये त्वचा पर भी असर दिखाने लगता है।

ये एक छुआछूत बीमारी होती है। तो ये बीमारी भीड़भाड़ या ज्यादा लोगों से मिलने पर होती है। क्योंकि भीड़ में और ज्यादा लोगों से मिलने से आप लाल बुखार के रोगी के सम्बंध में आ सकते हैं। और फिर आप लाल बुखार के रोगी बन सकते हैं। जैसा कि शुरुआत में हमने बताया था कि इसकी चपेट में बच्चे बहुत जल्दी आते हैं तो अब हम आपको बता दें कि 2 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चो को ये बीमारी नहीं होती है और वहीं 15 से अधिक उम्र के बच्चों को भी इस बीमारी का डर नहीं होता है। क्योंकि उनमें इस रोग के खिलाफ एन्टी बॉडीज बन जाती है जो उनका बचाव करती है।

लाल बुखार के क्या है लक्षण

हमने आपको ये तो बता दिया कि लाल बुखार आखिर होता क्या है। चलिए अब हम आपको लाल बुखार के लक्षणों के बारे में बता देते हैं।

  • चेहरा – लाल बुखार अगर होता है तो बच्चे का चेहरा एक पीली अंगूठी के साथ प्लावित दिखाई पड़ती है।
  • लाल रेखाएं – घुटने, कोहनी, बगल और गर्दन के चारों ओर तव्चा गहरी लाल हो जाती है।
  • स्ट्रॉबेरी जैसी जीभ – वैसे तो जीभ लाल और उबड़ दिखती है। पर जब बच्चे इस बीमारी का शिकार होते हैं तो जीभ पे एक सफेद रंग की परत जम जाती है। जो देखने में स्ट्रॉबेरी के जैसी लगती है।

उपरोक्त सभी के अलावा और भी बहुत से लक्षण हैं जो लाल बुखार के बारे में बताते हैं तो चलिए हम उनके बारे में बताते हैं।

  • कोई चीज निगलने में कठिनाई आना।
  • अक्सर ठंड के साथ अचानक 101 बुखार का हो जाना।
  • उल्टी अथवा मिथली।
  • सरदर्द।
  • बहुत तेज़ दर्द और लाल गला।

इसके होने के क्या कारण हैं

जो जीवाणु स्ट्रेप गले के लिए कारक होते हैं वही जीवाणु लाल बुखार को भी जन्म देते हैं। जो लाल रंग का बुखार होता है उसमें जीवाणु लाल रंग के विष को बना देता है जिसकी वजह से शरीर पर लाल चक्कते से पड़ जाते हैं। और जीभ भी लाल पड़ जाती है। जैसा को हम बता चुके हैं कि लाल बुखारी एक संक्रमण हैं। इसीलिए ये बुखार संक्रमित व्यक्ति के द्वारा खाँसने या उनके द्वारा छीकने से उनके मुंह से निकली हुई बूँदों के द्वारा फैल जाता है। ऊष्मायन अवधि, अनावरण और बीमारी के बीच का समय आमतौर पर दो से चार दिन होता है|

कब लेनी चाहिए डॉक्टर से सलाह

अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई लक्षण नजर आते हैं तो आपको चिकित्सक के पास जाकर उनसे सलाह लेनी चाहिए। और अगर 102 या उससे अधिक बुखार होता है तो भी एक बार डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। अगर गले में दर्द और सूजन होती है या फिर शरीर पर लाल चक्कते पड़ जाते हैं तो ऐसे में भी डॉक्टर ही से सलाह लेनी चाहिए न कि खुद डॉक्टर बन जाना चाहिए।

इस रोग में जोखिम भरे काम

लाल बुखार वैसे तो 5 से 15 वर्ष के उम्र के बच्चों को होता है पर कभी-कभी इसका असर और लोगों को भी हो जाता है। तो अगर कोई भी व्यक्ति लाल बुखार वाले के सम्बंध में आएगा तो ये जोखिम भरा काम होगा। परिवार में या फिर सहपाठी के अंदर लाल बुखार वाले लक्षण दिखाया देते हैं तो उनसे ज्यादा मिलना-जुलना भी एक जोखिम भरा काम ही है। इसीलिए उनसे उनके ठीक होने तक दूर ही रहना बेहतर होगा।

इस बुखार में जटिलताएं

लाल बुखार को बहुत से लोग अनदेखा कर देते हैं पर ये सही नहीं है। अगर लाल बुखार का इलाज नहीं किया जाता है तो उसका जीवाणु फैल जाता है और शरीर में बहुत सारी परेशानी कर देता है। और शरीर में फैल जाता है। जैसे:-

  • रक्त
  • गुर्दे
  • टॉन्सिल
  • कान के मध्य
  • त्वचा
  • फेफड़ा

लाल रंग का बुखार संधि बुखार का कारण बन सकता है, एक गंभीर स्थिति जो प्रभावित कर सकती है, जैसे:-

  • तंत्रिका तंत्र
  • दिल
  • जोड़
  • निवारण
  • त्वचा

लाल बुखार को कैसे रोकें

सबसे पहले हम आपको बता दें कि लाल बुखार को बच्चों में होने से रोकने के लिए कोई टीका वगैरह नहीं लगाया जाता है। अगर इस बीमारी को व्यक्ति को होने से रोकना है तो व्यक्ति को खुद ही थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना होगा और सावधानी बरतनी होगी। तो चलिए हम बताते हैं कि क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

साथ में खाना न खाएं या बर्तनों को साझा न करें

दरअसल बच्चे क्या करते हैं कि वो अपने सहपाठियों के साथ या परिवार के सदस्यों के साथ मिल बांटकर खाना पीना खाते हैं। और इसी कारण बहुत बार बच्चे लाल बुखार की चपेट में आ जाते हैं। इससे बच्चे के लिए बच्चों को अलग ही खाना खाना चाहिए और भोजन और बर्तन को साझा नहीं करना चाहिए।

बच्चे के मुंह और नाक को ढकना चाहिए

बच्चे अक्सर छोटी छोटी लापरवाही कर देते हैं और फिर उसका खामियाजा सबको भुगतना पड़ जाता है। इसीलिए बच्चे जब बाहर जाएं तो उनके मुंह और नाक को अच्छे से ढँक कर ही बाहर जाने दें। जिससे अगर कोई बाहरी व्यक्ति छींकता या खांसता है तो उसके मुंह से निकलकर वाले कीटाणु बच्चे के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे।

बच्चे के हाथ धोएं

बच्चा जब बाहर से आए या फिर खाना खाए तो उसके हाथ पैरों को अच्छे से धुलवाएं ताकि जो भी गन्दगी हाथों पैरों में हो वो निकल जाए।

और यदि आपको आपके बच्चे में लाल बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी चीजों को हमेशा साफ और सुरक्षित रखने का ही प्रयास करें। जैसे उसके खिलाने, बिस्तर कपड़े आदि।

बीमारी का आसन सा निदान

शारीरिक परिक्षण के दौरान, चिकित्सक सुझाव दे सकता है। जैसे लिम्फ नोड्स बढ़ने पर यह निर्धारित करने के लिए अपने बच्चे की गर्दन महसूस करें,बच्चे की दाने एवं उपस्थिति का आकलन करें। बच्चे के गले को टॉन्सिल को और जीभ को भी देखें।

लाल बुखार का इलाज

इस बुखार होने पर उसका इलाज एंटीबायोटिक्स के साथ ही किया जाता है। एंटीबायोटिक्स का इसीलिए उपयोग किया जाता है क्योंकि एंटीबायोटिक्स कीटाणुओं को मारने में मदद करता है। और बच्चे को निर्धारित दवा के पूरे पाठ्यक्रम को करना ही होगा।इससे सब कुछ लेना संक्रमण को रोकने से रोकने में मदद करेगा|

बुखार को नियंत्रित करने के लिए व्यक्ति बच्चे को एस्पिरिन (बेयर) या इबुप्रोफेन (एडविल, मोटरीन) जैसे ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं भी दे सकते हैं| अन्य उपचारों में बर्फ के पॉप, आइसक्रीम, या गर्म सूप खाने शामिल हैं| नमक के पानी के साथ घूमना और ठंडा हवा नमी का उपयोग कर गंभीरता और गले के दर्द को कम करता है।बच्चे को अधिक से अधिक मात्रा में पानी का सेवन करने को बोलें जिससे पानी की मात्रा शरीर में कम न होने पाए।