रेनॉड रोग का सम्पूर्ण इलाज – Raynaud’s Phenomenon Treatment In Hindi

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रेनॉड रोग

रेनॉड रोग या इस्केमिआ  सिंड्रोम एक ऐसी बिमारी है जिसमे उँगलियों , पैर की उँगलियों , एवं  अन्य  शरीर के हिस्सों   में खून की कमी से नीला या पीलापन छा  जाता है | इस स्थिति में लम्बे उभार के साथ नाख़ून नाजुक हो जाते हैं | इस रोग के ऊपर जितने अध्ययन हुए हैं उनके मुताबित ये रोग  पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज़्यादा होता | ये बिमारी एक पूरी जनसँख्या में से 21 % औरतों  और केवल 6 %  आदमियों को होती है |  ऐसा पाया गया है कि  20 में से 1 इंसान को ये बिमारी है  | इन में से 10 में से 9 मरीज़ों को प्राथमिक रेनॉड होता है | ऐसा पाया गया है की भारत में 5 % लोग इस बिमारी से ग्रसित हैं |

रेनॉड रोग के मुख्य लक्षण

इस रोग से ग्रसित रोगी के हाथों में दर्द , पीलापन और सुन्नपात जैसे बदलाव आते हैं|

ये बदलाव एक ही साथ नहीं आ जाते , तीन चरणों में इन बदलावों को महसूस किया गया है :

  1. पहला चरण :शरीर के ग्रसित भागों का रंग बदल कर सफ़ेद हो जाता है , क्योंकि उन हिस्सों में रक्त का संचार पूरी तरह नहीं हो पाता | यह भी कह सकतें हैं कि रक्त की कोशिकायें सिकुड़ने से रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है |
  2. दूसरा चरण : ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर के वो हिस्से नीले पड़ने लगते हैं| शरीर ठंडा और सुन्न भी प्रतीत होने लगता है |
  3. तीसरा चरण : प्रभावित क्षेत्र में सूजन आने लगती है और लाल भी दिखने लगते हैं |

रेनॉड रोग या रेनॉड सिंड्रोम के कारण

इस रोग के कारणों का पता नहीं लग पाया है , फिर भी चिकित्सकों का अनुमान है कि ठण्ड और भावनात्मक तनाव इसके कुछ कारणों में से हो सकते हैं | यह रोग गरम व सामान्य जलवायु वाले क्षेत्रों में बहुत ही दुर्लभ होता है | वे लोग जो ठन्डे प्रांतों में रहते हैं वे  लोग इस बीमारी से ज़्यादा प्रभावित होते हैं | इस रोग में  रक्त वाहिकाएं  बहुत सिकुड़ जाती हैं जिस कारण खून सारे अंगों तक नहीं पहुंच पाता है |इसी कारणवश उस रोगी की  हाथों और पैरों की उंगुलियों  में सूजन आ जाती है और उनका रंग भी बदल जाता है | यह विकार एक प्रोटीन की वजह से होता है |चिकित्सकों की राय से  माध्यमिक रेनॉड रोग के कारण अन्य स्वास्थ स्थितियों से जुड़े होते हैं |

आपको बता दें कि रेनॉड रोग दो प्रकार के होते हैं

1 . प्राथमिक रेनॉड -यह रेनॉड का सबसे सामान्य प्रकार है जो किसी और बिमारी से जुड़ा हुआ नहीं होता |

2 . माध्यमिक रेनॉड-कुछ मामले ऐसे होते हैं जिनमें अन्य बिमारियों की वजह से रेनॉड रोग में कोशिकाओं की प्रतिक्रिया कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाती है | इसे माध्यमिक रेनॉड रोग कहते हैं | एक बार रोगी की स्थिति पता लग जाए तो  माध्यमिक रोग के भी कारणों का पता लगाना पड़ता  है |  इन कारणों का पता लगाने के लिए रोगी की विस्तार से जांच करनी पड़ती है | जैसे :-

  1. डिजिटल धमनियां दबाव : जब हाथ सामान्य होता है तब उँगलियों की धमनियों  (यानि आर्टरीज़ ) का दबाव नापा जाता है | फिर उँगलियाँ ठंडी हो जाने के बाद फिर से नापते हैं | इस जाँच प्रक्रिया में दबाव कम से कम 15 एम एम एच जी कम हो जाता है |

2 . डॉप्पलर अल्ट्रासाउंड : रक्त प्रवाह को निर्धारित करने के लिए ये अल्ट्रा सोनो ग्राफी की जाती है |

3 . पूर्ण रक्त गणना : इस रक्त परिक्षण (टैस्ट ) से एनीमिया , क्रोनिक रोग या गुर्दे की बीमारी के लक्षण साफ़ होते हैं |

  1. एंटी न्यूक्लिअर  एंटी बाडी परिक्षण : इस जाँच का परिणाम अगर सकारात्मक आता है , तो इसका मतलब है कि संयोजी उत्तक ( यानि कनेक्टिवटिस्सुस) बीमार हैं और ये  एंटीबाडी शरीर में अपने ही उत्तकों पर हमला कर रही है |

5 . एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटशन रेट : यह रक्त परिक्षण मापता है कि  कितनी तेज़ी से लाल रक्त कोशिकाएं टेस्ट ट्यूब में नीचे की ओर इकट्ठी हो जाती हैं | यदि ये सामान्य दर से  तेज़ी से इकट्ठा होती हैं, मतलब कोई स्व- प्रतिरक्षित  अवश्य ही है |

रेनॉड रोग  के दौरे  को रोकने के उपाय

1 . अपने आप को गर्म रखें |

2 . ठण्ड से गर्मी और गर्मी से ठण्ड के बदलाव वाली जगह पर जाने से बचें |

3 . वातानुकूलित जगहों (एयर कंडीशनिंग ) से दूर रहें |

4 . धूम्रपान ना करें |

5 . तनावमुक्त रहें |

6 . कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव से भी ये लक्षण आ सकते हैं इसलिए किसी और रोग की  दवाई से अगर शरीर में ऐसा कोई दुष्प्रभाव  होने लगे , तो दवाई लेना तुरंत  बंद कर दें |

  1. नियमित रूप से वययाम करें |

रेनॉड  रोग का निदान या उपचार

इस बिमारी के लिए हड्डियों के डॉक्टर ( यानि रहेमाटोलॉजिस्ट ) के पास चिकित्सा के लिए जाना चाहिए | पहले तो चिकित्सक , रोग का इतिहास जानकार ये बताएगा कि रोग प्राथमिक है या माध्यमिक , और एक अन्य प्रकार का भी हो सकता है – जेनेटिक  यानि  अनुवांशिक |यह बिमारी अनुवांशिक भी हो सकती है लेकिन इस बात की  5 % ही सम्भावना है |  फिर दवाइयां और परहेज़ भी उसके मुताबित ही होंगे |

इस बिमारी को कम करने के लिए कई दवाइयां बाजार में उपलब्ध हैं |

कुछ दवाइयों के नाम इस प्रकार हैं :-

1 . टोपिकल नाइट्रोग्लिसिरिन (1 % – 2 %) क्रीम

2 . प्रोस्टाग्लैंडीन एनालॉग

3 . स स र ई (सेरोटोनिन  अपटेक इन्हिबिटर्स )

4 . फोस्फो-डी -इस्टरसे -5 एंजाइम इन्हिबिटर्स

रेनॉड  रोग में क्या करना चाहिए जिससे तकलीफ काम हो

1 . घर के अंदर ही रहें

2 . अपने हाथों को अपनी बगल में रखें ताकि वे गर्म रहें

3 . अपने पैरों और हाथों पे कुनकुना पानी डालें

4 . हाथों और पैरों की मसाज करें

5 . हाथों को गोलाकार में घुमाएं जिससे रक्त का संचार सुचारु रूप से हो

६. हाथों में दास्तानें पहनने से बहुत राहत मिलती है

इन युक्तियों को अपनाकर के रेनाद रोग की तकलीफ को कम किया जा सकता हैं

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