पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर – Post Traumatic Stress Disorder In Hindi

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Post Traumatic Stress Disorder

आज कल मानसिक रोग बहुत बढ़ रहे हैं । गिरते मनोबल की वजह से तरह तरह के मानसिक विकार व तनाव उत्पन्न होते हैं । किसी बात से परेशान,  दुखी होकर, व्यक्ति का मन से  उदास होना ही तनाव है। तनाव मन से संबंधित है। तनाव  एक तरह का द्वंद है जो संतुलन न बैठा पाने के कारण से होता है। जो व्यक्ति तनाव से ग्रसित होता है उसका मन बहुत परेशान व अशांत हो जाता है, भावनाएं स्थिर नहीं रह पातीं। सही और गलत का फैसला करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्थितियां दिन-प्रतिदिन खराब होती जाती हैं।

आज हम बात करते हैं – पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी कि आघात- पश्चात तनाव विकार जो बहुत ही सामान्य विकार है ।

जाने पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर परिचय व कारण के बारे में

पीटीएसडी एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो एक भयानक घटना से ट्रिगर होती है – या तो उस घटना का अनुभव हुआ हो या उसे देखा गया हो। पीटीएसडी आपको खतरा खत्म हो के बाद भी तनावपूरण और डरा हुआ महसूस कराता है । यह  प्रतिक्रिया विलम्ब से होने वाली है। कुछ लोग 5-6 महीने की अवधि में ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ लोगों के लक्षण लम्बे समय तक बने रहते हैं। कुछ लोगों में, यह स्थिति काफी समय तक चलती रहती है।

ऐसे लोग जो किसी ख़ौफ़नाक या डरा देने वाले किसी अनुभव से गुज़रे हैं या उसके चश्मदीद बने हैं, उन्हें वे यादें सताती रहती हैं ।उन लोगों में उन घटनाओं की यादें और ज़ेहन में उनकी पुनरावृत्ति यानि फ़्लैशबैक बहुत तेज़ हो जाता है । ऐसे लोगों को सदमे से जुड़ी घटना के अनियंत्रित ख़्याल आते रहते हैं, जिससे उन्हें भय और चिंता  पैदा हो जाता है । वे रोज़ाना के काम करने में असक्षम हो जाते हैं । ऐसे लोग पोस्ट ट्रॉमाटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, पीटीएसडी से पीड़ित होते हैं ।

उद्धारण के लिए, अगर किसी के साथ बहुत भयानक दुर्घटना हुई है तो उसे बार बार उसी हादसे के ख़्याल आते रहेंगे । ये फ्लैशबैक बहुत सच्चे प्रतीत होती हैं और व्यक्ति को लगता है कि वह दुर्घटना की चपेट में आ गया है । इन फ्लैशबैक से चिंता और भय बढ़ जाते हैं ।

आमतौर पर ये कई सारी मिलीजुली  वजहों से होता है ।इस विकार की गहराई इस बात पर निर्भर करती है कि दिमाग तनाव को किस रूप में झेल पा रहा है। पीटीएसडी का कोई एक अकेला कारण नहीं हैं ।

पी.टी.एस.डी से पीड़ित व्यक्तियोंको दूसरे मानसिक विकार भी हो सकते हैं जैसे अवसाद, तीवर घबराहट, नशे की लत, और कुछ मामलों में आत्मघाती सोच भी

जाने पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के लक्षण के बारे में

निम्नलिखित लक्षणों से पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव विकार का संकेत मिलता है:

  • गम्भीर चिंता
  • डिप्रेशन
  • दर्दनाक घटना फिर से बनाना
  • पीड़ित व्यक्ति संवाद या बातचीत से परहेज़ करने लगता है ।
  • व्यक्ति हमेशा जागरूक रहने लगता है और सुरक्षित माहौल में भी हमेशा ख़तरा महसूस करता रहता है ।
  •  ऐसे रोगी चिड़चिड़ापन के शिकार होते हैं ।
  • फ्लैशबैक
  •  ऐसे रोगियों को बुरे सपने आते हैं
  •  उस व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है ।
  •  व्यक्ति हमेशा अतिसतर्क रहता है ।
  • आसानी से भौंचक्का हो जाने वाला
  • उसे तक़लीफ़ पहुँचाने वाली यादों से डर लगता है कि कहीं वे उसे फिर से परेशान न करने लगे ।
  • बच्चों में  पाए जाने वाले लक्षण:
  • बात कर पाने में सक्षम न होना या बोलना भूल जाना।
  • बिस्तर में पेशाब करना।
  • खेल के दौरान डराने वाली घटना को यदि करके डर जाना ।
  • एक ही इंसान के साथ असामान्य रूप से निकटता बनाये रखना ।
  • सामान्य से अधिक मात्रा में शराब पीना या ड्रग लेना

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की जांच व परीक्षा

पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव विकार का निर्धारण संकेतों और लक्षणों तथा विस्तृत मनोवैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर होता है। चिकित्सीय समस्याओं की जाँच हेतु शारीरिक परीक्षण व मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर का इलाज

अगर घटना के बाद लक्षण बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं तो आपको किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेनी चाहिए । डॉक्टर आपकी शारीरिक परीक्षा: चिकित्सा समस्याओं का पता लगाने के लिए और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन: पोस्ट-ट्रोमैटिक तनाव विकार का निदान करने के लिए करता है ।

पीटीएसडी के इलाज में बुनियादी रूप से मेडिटेशन थेरेपी पर होता है ख़ासकर संज्ञानात्मक वयवहारजन्य थेरेपी (सीबीटी) पर और एक्सपोज़र थेरेपी पर । इसमें व्यक्ति को सदमे से जुड़ी घटना का ख़्याल जानबूझकर कराया जाता है । असल में ऐसा व्यक्ति इन ख्यालों से पीछा छुड़ाने की कोशिश करता है क्योंकि उनसे उसे कष्ट होता है । लगातार एक्सपोज़र से ये विचार उसे होने वाले दर्द को कम कर सकते हैं । मैडिटेशन ध्यान को बढ़ाता है व मनोबल बहुत अधिक बढ़ जाता है जिससे दर्द का सामना करने की क्षमता होती है ।

PTSD के लिए बहुत सी दवाइयां उपलब्ध है जैसे –

Anxit plus , Alarm 40,

Alzex plus ,Alzex 40 , आदि

लेकिन ध्यान रहे के बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई न ले । बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को नुकसान हो सकता है ।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर होने पर मरीज़ व परिवार वाले क्या करे ?

पीटीएसडी से पीड़ित व्यक्ति को बहुत समर्थन, सहायता और धैर्य की ज़रूरत होती है । उसे मदद कीजिए. सलाह दीजिए ।यदि आत्महत्या करने के विचार भी आते हों तो तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करें।

व्यक्ति को चाहिए कि जीवन सादा और सरल रखे जितना संभव हो उतना । सदमे वाली घटना के बारे में किसी विश्वासपात्र और करीबी व्यक्ति से चर्चा करें अपने सामान्य नियमित कार्य वयवहार पर लौटें,और  वयायामों और योगा को अपनाएँ। कार्य पर वापस लौटें। भोजन और वयायाम नियमित करें।

जिस स्थान पर आघात वाली घटना घटी है, वहां वापस जाएँ। मित्रों और परिवार के साथ रहने का समय निकालें। वाहन चलाते समय सावधान रहें । आपका ध्यान कमजोर हो सकता है। डॉक्टर से परामर्श लें और बेहतर होने की आशा करें। हमेशा पॉजिटिव रहें व आशावादी माहौल ही अपनाएं ।

हर मानसिक विकार का प्रमुख कारण गिरता मनोबल ही है । क्योंकि आज कल के युग में अपनी वयवसित दिनचर्या में से समय निकालना मुश्किल है । इसलिए हर किसी को अपनी दिनचर्या में से योग व मेडिटेशन को शामिल करना चाहिए । जिससे आत्मबल मज़बूत रहे ।

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