निमोनिया के कारण लक्षण व आयुर्वेदिक इलाज – Pneumonia Treatment In Hindi

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Pneumonia Treatment In Hindi

बच्चो में होने वाली बीमारियों में निमोनिया एक जानलेवा बीमारी मानी जाती है. एक वक्त तक इस बीमारी का इलाज न होने के कारण पूरे विश्व मे इस बीमारी की होने वाली मौते बहुत ज्यादा थी. लेकिन इलाज आने के बाद से कुछ हद तक इस बीमारी से होने वाली मृत्यु में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन आज भी यदि यह बीमारी ज्यादा गंभीर रूप ले ले तो मुश्किल समस्या खड़ी हो सकती है.

यदि आंकड़ों की बात करें तो हर वर्ष लगभग लगभग 450 मिलियन लोग इस बीमारी की चपेट में आते है, और इनमे से 4 मिलियन लोगो की इस बीमारी की वजह से मृत्यु हो जाती है. यदि भारत की स्थिति देखी जाए तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत मे हर घंटे करीब 45 बच्चे निमोनिया के भेंट चढ़ जाते है. इस प्रकार इस बीमारी की गंभीरता समझ आती है. यह बीमारी मुख्यतः बच्चो को होती  है,लेकिन बड़े भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते है.

निमोनिया क्या है?

यदि आसान भाषा मे समझे तो निमोनिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमे फेफड़े में सूजन हो जाती है. फेफड़े सूजकर काफी कठोर और शख्त हो जाते है. इसको फुफ्फुस प्रदाह के नाम से भी जाना जाता है. यदि दोनों फेफड़ो में सूजन हो जाये, तो उससे डबल निमोनिया कहते है. जबकि एक फेफड़े में सूजन को तो उसे निमोनिया कहते है.

निमोनिया होने पर दिखाई देने वाले लक्षण

खासी आना.
निमोनिया से ग्रसित व्यक्ति को खासी जरूर आती है. यह निमोनिया की सबसे प्रमुख पहचान है. निमोनिया के दौरान फेफड़ो में संक्रमण फैल जाता है. जिस वजह से खासी के साथ कभी कभी खून भी आ जाता है. इसके अलावा थूक भी हरे या पीले रंग का होता है.

बुखार आना.
निमोनिया के दौरान बहुत तेज बुखार आने की संभावना भी रहती है. यह बुखार ठंड देकर के आती है. कभी कभी इस बुखार की तीवरता 100 डिग्री फारेनहाइट तक भी पहुँच जाती है.

सांसों का तेज चलना
इस बीमारी का एक प्रमुख लक्षण सांस संबंधी समस्याओं का होना है. इस बीमारी के दौरान रोग के कीटाणु फेफड़ो के स्वसन छिद्रों पर हमला कर देते है. जिस वजह से स्वास संबंधी दिक्कते देखने को मिलती है. इसलिए जिन लोगो को निमोनिया होता है, वो थोड़ा सा ही काम कर दे यदि तो उनकी सांस फूलने लगती है.

सीने में दर्द महसूस होना.
निमोनिया से प्रभावित होने पर व्यक्ति हो लगातार खासी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है, इसके अलावा सांस लेने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है, जिस वजह से छाती में दर्द होने लगता है.

भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना
निमोनिया के वजह से स्वास संबंधी दिक्कते देखने को मिलती है. जिस वजह से शरीर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति सही नही जो पाती है, और मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नही मिल पाती है. जिस वजह से मतिभ्रम की स्थिति उत्पन्न जो जाती है.

होठो और नाखून का रंग बदल जाना.
शरीर मे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है. जिस कारण कभी कभी होंठो और नाखूनों का रंग भी बदला हुआ दिखाई देता है. सामान्यतः नाखून गुलाबी रंग के होते है, पर इस स्थिति में यह सफेद रंग के दिखाई देते है. जबकि होठो का रंग पीला पड़ जाता है.

शरीर मे कमजोरी महसूस होना.
शरीर मे कमजोरी महसूस होना भी निमोनिया का एक लक्षण हो सकता है. शरीर मे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है. जिस वजह से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नही मिल पाती है. इसके अलावा शरीर से समस्त अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल आने के कारण उनके क्रियाकलाप भी प्रभावित होते है.

आयुर्वेदिक घरेलू उपचार.

लहसून के द्वारा उपचार.
लहसून के अंदर बैक्टिरिया से लड़ने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है.यह कुदरती एन्टी वाइरल होता है. इसके सेवम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

लहसून के सेवन की कई विधियां है.

  • लहसून को पीस पर करीब आधा चम्मच पेस्ट बना ले, अब इस पेस्ट को एक कप दूध में तब तक उवाले ं जब तक कि दूध आधा न रह जाये. इसके बाद इस दूध का सेवन दिन में तीन बार करे.
  • छाती में दर्द रहने की स्थिति पर लहसून का पेस्ट छाती पर लगा सकते है.
  • लहसून को पीस कर पेस्ट बना ले. अब इस पेस्ट पेस्ट में नींबू का रस और शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार इसका सेवन करें.

मेथी के दानों से इलाज.

मेथी के दानों का सेवन निमोनिया के दौरान इस प्रकार किया जा सकता है.

  • दो कप पानी ले और उसमे मेथी के दाने मिलाकर उसकी चाय बनाकर के पिये.  इस चाय का सेवन दिन में कम से कम 3-4 बार करें.
  • एक कप पानी ले, और उसमें अदरक का बना हुआ पेस्ट, एक कली लहसून का पेस्ट, काली मिर्च डालकर, पानी को में उबाल लें, फिर इस मिश्रण को छान कर उसमें नीबू का रस मिलाकर पिएं.

तिल के बीज का सेवन.
एक कप पानी लें, और एक चम्मच तिल ले और उसमें मिलाकर उवाले ं. इसके साथ मे एक चम्मच अलसी के बीज भी मिला दें. इसके बाद यह मिश्रण छान लें, और उसमें शहद और कुछ नमक मिला लें. 

सब्जियों का जूस का सेवन करें.
इस बीमारी के दौरान सब्जियों का रस पीना बहुत लाभदायक होता है. इस दौरान गाजर का रस, चुकंदर, पालक, खीरे आदि का रस का सेवन करना फायदेमंद होता है. इनके सेवन से शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. साथ ही शरीर में विषैले पदार्थों को भी कम करता है.

तुलसी का सेवन करें.
तुलसी का सेवन भी निमोनिया में बहुत लाभप्रद होता है. इसके लिए तुलसी का रस निकाल कर उसमें काली मिर्च मिलाकर 6 घंटे के लिए रख दे. इसके बाद इसका सेवन करें.

क्या परहेज रखें?

  • इस बीमारी के दौरान तेज बुखार आने की संभावना होती है. इसलिए उसे अधिक से अधिक आराम करना चाहिए. ज्यादा भारी और थकाने वाले काम नही करना चाहिए.
  • इस दौरान रोगी तो ठोस आहार देना ज्यादा बेहतर नही होता है. कोशिश करे कि आहार तरल हो.
  • दूध का सेवन इस रोग के दौरान उपयुक्त माना जाता है. इसलिए रोगी दूध, या दूध से बनी कॉफी पिला सकते है.
  • चिकनाई वाले भोज्य पदार्थ जैसे तेल और घी आदि का सेवन नही करना चाहिए.
  • इसके साथ ही मांसाहारी भोजन से दूरी ही बना कर के रखना बेहतर साबित होगा. इसके अलावा मैदे की मिठाई, तरबूज और खटाई आदि का सेवन भी उचित नही माना जाता है.

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