पिप्पली के फायदे

पिप्पली औषधि के फायदे और सावधानियाँ – Pippli Benefits In Hindi

जड़ी बूटी

पिप्पली एक ऐसी औषधि या दवा है जिसे पिपली और लेडी पीपर के नाम से जाना जाता है | इसका वैज्ञानिक नाम पाइपर लांगम लीं होता है | इस आयुर्वेदिक औषधि को मुख्यता हमारे घरो में खाने के मसाले के रूप में उपयोग  किया जाता है इस दवा मे मसाले से जुड़े सभी गुण पाए जाते है | इसको खाने पर इसका स्वाद हल्का तीखा और तासीर गर्म होती है | पिप्पली पौधे के सभी हिस्सों महत्वपूर्ण होते है जैसे कि जड़, तना, पत्तियाँ, फूल और फलों को विभिन्न परेशानियों के इलाज मे प्रयोग किया जाता है | पिप्पली का कच्चा  उपयोग  होता है |


पिप्पली के पौधे को कैसे पहचाने –

  • बरसात के मौसम में लगने बाला पिप्पली एक झाडी जैसा पेड़ होता है |
  • जो बेल के रूप में बढता जाता है इस पौधे की शाखाएं नर्म होती है जिससे वो निचे की ओर लटकी रहती है |
  • पिप्पली के पौधे में लगने बाले फल बड़े होते है जिनकी लम्बाई 2.5 सेंटी मीटर से 7.5 सेंटी मीटर तक होती है |
  • पिप्पली के पौधे की पत्तियां दिल जैसी अंडाकार सरंचना में होती है
  • जिनका रंग गहरा हरा और इनकी लम्बाई 2 इंच से 3 इंच तक रहती है |
  • पिप्पली के पौधे पर फूल बरसात के मौसम में लगते है और पिप्पली पर लगने बाले फल बेलन के आकार के पीले और नारंगी रंग के होते है जो सर्दियों की शुरुआत में लगते है |

जानिए इसके पौधे के प्रकार

पिप्पली आमतौर पर दो प्रकार के होते है और बाजार में भी पिप्पली की दो प्रजातियाँ मिलती  जाती है | पिप्पली की दोनों प्रजातियों को छोटी पिप्पली और बड़ी पिप्पली के नाम से बोला जाता है | वैसे तो पिप्पली की दोनों प्रजातियों को ही औषधियों के रूप में प्रयोग किया जाता है | मगर गुणों की बात की जाए तो छोटी पिप्पली को ज्यादा लाभकारी माना जाता है |

 पोषक तत्व का विवरण –

पिप्पली को इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व और मिनरल्स के कारण ही औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है | पिप्पली में दर्द और पीड़ा को दूर करने बाले गुण एल्क्लाइड, बीता साइटोंस्टेरोल और एनाल्जेसिक बहुत ही अच्छी मात्रा में पाए जाते है | इसमें यूजीनॉल, ग्लाइकोसाइड, पाइपरिन, रेजिन, चीनी, संतृप्‍त वसा, आवश्‍यक तेल, पाइप्‍लाट्रिन, मिरसीन, टेपेनोइड्स, क्वार्सेटिन, और सिल्‍वाटाइन बहुत ही ज्यादा मात्रा में पाए जाते है जिससे पिप्पली पूरे शरीर को स्वस्थ बनाने में बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है |

इसके फायदे-

वैसे तो पिप्पली को औषधीय गुणों  के कारण प्रयोग करने से शरीर को स्वस्थ से जुड़े बहुत से फायदे होते है | तो आइये जानते है पिप्पली से जुड़े कुच्छ स्वास्थवर्धक फायदे –

दिल की बिमारियों मे  उपयोग

पिप्पली में पाए जाने बाले पोषक तत्व और मिनरल्स के कारण पिप्पली दिल की समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद होता है | इसके लिए पिप्पली के  चूर्ण को शहद में मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करने से यह कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रित करता है |

पेट दर्द को दूर करता है

पिप्पली में दर्द और पीड़ा को हरने बाले पोषक तत्व पाए जाते है जिसकी वजह से पिप्पली और छोटी हरड को सामान मात्रा में लेकर पीस ले और एक चमच्च चूर्ण को एक गिलास गुनगुने पानी के साथ सुबह शाम मिलाकर पीने से पेट दर्द, मरोड़ और अतिसार की समस्या से जल्द राहत मिलती है |

साँसों की समस्या को दूर करता है –

अगर आप सांस की समस्या से परेशान है तो पिप्पली का प्रयोग करके आसानी से फायदा पाया जा सकता है | इसके लिए 2 ग्राम पिप्पली को सुखाकर चूर्ण बना ले और 4 कप पानी में डालकर उबाल ले जब यह पानी लगभग 1.5 से 2 कप रह जाए तब इसे छानकर सुबह शाम पीते रहे जिससे सांस से जुडी सारी समस्याए दूर हो जाएगी |

सर दर्द से राहत देती है

पिप्पली के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सर पर पतला पतला लेप लगाने से और पिप्पली व् वाच चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर इसकी ३ ग्राम मात्रा को एक गिलास पानी या गर्म दूध के साथ सुबह शाम मिलाकर सेवन करने से सर दर्द की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है |

मोटापा दूर करती है

पिप्पली में पाए जाने वाले तत्व मोटापा को दूर करने के लिए रामबाण की तरह काम करते है | मोटापा को दूर करने के लिए पिप्पली के चूर्ण की लगभग आधा ग्राम मात्रा को सुबह शाम शहद के साथ 1 महीने तक रोजाना सेवन करे | एक गिलास दूध में आधा ग्राम खड़ी पिप्पली ( पिप्पली के दाने ) को डालकर उबाल ले और फिर पिप्पली को निकाल कर खा ले फिर ऊपर से बो दूध पी ले जल्द ही मोटापा ख़तम हो जायेगा |

दांतों को मजबूत बनाता है

पिप्पली में पीड़ा हरने बाले तत्व पाए जाते है जिससे यह दांत और मसुडो के दर्द को ख़त्म करता है | दांत दर्द की समस्या होने पर 2 ग्राम चूर्ण में सेंधा नमक, हल्दी और सरसों के तेल में मिलाकर दांतों पर लगाने से दर्द में जल्द ही आराम मिल जाता है |

छुआ छुत बाले रोगों से बचाता है

पिप्पली में पाए जाने बाले तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर टी.बी. जैसे संक्रामक छुआ छुत से होने बाली बीमारियों से बचाता है | छुआ छूत से जुडी कोई भी समस्या होने पर एक चमच्च पिप्पली के चूर्ण को दूध में डालकर सुबह खाली पेट पीने से बहुत जल्दी आराम मिलता है |

पिप्पली जुकाम से बचाती है

पिप्पली में सामान मात्रा मे मूल काली मिर्च और सौठ को मिलाकर अच्छे से पीस ले | इस चूर्ण को एक ग्राम मात्रा मे एक चमच्च शहद के साथ मिलाकर सुबह शाम चाटने से जुकाम को आसानी से दूर किया जा सकता है |

इसके प्रयोग मे रखे कुछ सावधानियाँ

  • 3 वर्ष से छोटे बच्चो को पिप्पली का सेवन नहीं करना चाहिए |
  • बच्चो को पिप्पली का सेवन घी और दूध के साथ ही करना चाहिए | वो भी चिकित्सक से परामर्श करके करना चाहिए |
  • स्तनपान कराने बाली महिलाओं को पिप्पली का सेवन करने से बचना चाहिए अगर जरूरत पड़ती है तो चिकित्सक से परामर्श कर ले |
  • गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक से परामर्श करके पिप्पली का सेवन करना चाहिए |
  • अगर आप लम्बे समय से पिप्पली का सेवन कर रहे है तो बार बार चिकित्सक से परामर्श जरुर करते रहे |
  • ज्यादा मात्र में पिप्पली का प्रयोग न करे इसकी तासीर गर्म होती है जिससे पित्त रोग की समस्या हो सकती है |

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