पेशाब में खून आना और इसके कारण – blood in urine in hindi

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पेशाब में खून आना एक बहुत ही भयानक स्थिति होती क्योंकि पेशाब करते समय खून आने से व्यक्ति को बहुत ही असहनीय पीड़ा का अनुभव होता है | कई मामलों में मूत्र से खून आने की स्थिति को किसी गंभीर बीमारी के शुरूआती लक्षणों के रूप में माना जाता है मगर कई बार यूरिन से खून आना सामान्य होता है | पेशाब से खून आने पर इसे सामान्य समझकर टाले नहीं बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास जाकर पेशाब की जाँच कराए |

मूत्र मार्ग से पेशाब के द्वारा हमारे शरीर में मौजूद सारी गंदगी बाहर निकाल दी जाती है | पेशाब मार्ग के साथ दो गुर्दे और मूत्राशय भी इस क्रिया में शामिल होते है | इसी वजह से जब यूरिन के साथ खून आना शुरू होता है तो इसका मुख्य कारण खून का गुर्दे, मूत्राशय या मूत्र नाली के द्वारा पेशाब में आके मिल जाना होता है |

सबसे पहले हम लोग जान लेते हैं कि मूत्र पथ क्या होता है?

हम लोग के शरीर में जो भी गन्दगी अथवा अतिरिक्त तरल पदार्थ होते है वो मूत्र पथ के द्वारा शरीर से बाहर कर दिए जाते हैं। और उस मूत्र पथ में भी कुछ चीज़ें शामिल हैं जो हैं-दो गुर्दे, मूत्राशय और मूत्रमार्ग। हम आपको ये भी बता दें कि पेशाब में जो खून आता है वो तब आता है जब पेशाब मूत्रपथ के भीतर के गुर्दे, मूत्राशय और मूत्रपथ से होकर गुजरता है।

पेशाब में खून आना क्या हो सकता है?

मूत्र में खून आने की वजह से पेशाब का रंग बदल जाता है और उसे ग्रॉस हेमाट्यूरिया कहा जाता है। जब डॉक्टर पेशाब की जांच करते हैं  और पेशाब में मौजूद खून को माइक्रोस्कोप की सहायता से देखते हैं तो उसे माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया कहा जाता है। पेशाब में खून बहुत बार बिना किसी गम्भीर कारण के आता है पर कई बार ये किसी अन्य कारण से भी जुड़ा  हुआ हो सकता है।

जब पेशाब में खून आता है तब पेशाब भूरे रंग का आता है और कभी-कभी इसका अंदाजा देख कर नहीं लगाया जा सकता है। इसीलिए इसका पता मूत्र की जांच करवा कर किया जाता है।

दोस्तों, पेशाब में खून आने के जो प्रकार हैं :

  1. ग्रॉस हेमाट्यूरिया- इसमें होता ये है की जो खून की मात्रा यूरिन में होती है वो काफी अधिक होती है जिससे पेशाब का रंग बदल जाता है और इसे हम आंखों से देख सकते हैं।
  2. माइक्रोस्कोपिक हेमाट्यूरिया- इसमें जो खून की मात्रा होती है वो एकदम कम होती है और उसे आँखों से देख के नहीं समझा सकता है। इसीलिए इसको माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जाता है।

पेशाब में खून आना का कारण मूत्र मार्ग में खून का थक्का –

अगर आपकी पेशाब में खून आ रहा है और इसका समय पर इलाज न करबाया गया तो ये मूत्र मार्ग में खून का थक्का बना देता है | जिससे मूत्र मार्ग पूरी तरह से ब्लोक हो जाता है और पेशाब करने अपर असहनीय दर्द, जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है | आमतौर पर मूत्र मार्ग में खून का थक्का मूत्र मार्ग में किसी भी तरह की चोट या घाव के कारण बनता है |

पेशाब में खून आना और लक्षण :

मूत्र में खून दो प्रकार से आता है पहला स्पष्ट रूप से और दूसरा अस्पष्ट रूप से | जब पेशाब में खून स्पष्ट रूप से दिखाई देता है तो इस परिस्थिति को मेडिकल भाषा में ग्रोस हेमाटयूरिया कहा जाता है | जब खून स्पष्ट रूप से दिखाई न दे केवल माइक्रोस्कोप की मदद से ही देखा जा सके तो इस परिस्थिति को मेडिकल की भाषा में माइक्रोस्कोप हेमाटयूरिया कहा जाता है | पेशाब में खून आने का कारण कोई भी हो मगर इसकी जांच करवाना बहुत जरुरी होता है क्योंकि पेशाब में खून अपने आप और किसी गंभीर बीमारी के कारण दोनों ही स्थिति में आ सकता है |

पेशाब में जब खून अस्पष्ट रूप से आता है तो इसे साधारण आँखों से देख पाना बहुत ही मुश्किल होता है | इसका पता हमें जब चलता है जब हम किसी दूसरी बीमारी या हेल्थ चेकअप के समय यूरिन की जांच करबाते है | पेशाब में खून की मात्रा बिलकुल नहीं होती है पेशाब में खून आना शुरू तब होता है जब खून गुर्दे, मूत्राशय या मूत्र नाली के द्वारा पेशाब में आके मिल जाता है |

  • पेट के नीचे के हिस्से में दर्द का होना।
  • पीठ अथवा मूत्राशय में दर्द का होना।
  • अचानक से पेशाब का आ जाना।
  • पेशाब करने में कठिनाई होना।
  • पेशाब का लाल, गुलाबी अथवा पीले रंग का आना।
  • पेशाब के दौरान खून के थक्के आना।
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना |
  • पेशाब का रंग लाल, पीला या हल्का नारंगी आना |
  • अचानक से पीठ या कमर के एक तरफ असहनीय दर्द शुरू हो जाना जो साधारण दर्द की दवा लेने पर भी ठीक न हो तो ये पेशाब में खून आने का लक्षण होता है |
  • ज्यादा देर बैठे रहने वाले कामो को करने से पेट के निचले में तेज दर्द होने लगना |
  • अचानक से रुक रुक कर पेशाब आना शुरू हो जाना |
  • पेशाब करने में जलन या दर्द जैसी परेशानी होना

खून आने के प्रमुख कारण :

  • मूत्राशय में संक्रमण के कारण – मूत्राशय में संक्रमण होने पर पेशाब करते समय व्यक्ति को बहुत ही तेज असहनीय जलन और दर्द का अनुभव होता है |
  • पेशाब को बहार निकालने बाली ट्यूब में संक्रमण – पेशाब को बहार निकालने बाली ट्यूब में सक्रमण की बजह से सुजन हो जाने के कारण भी पेशाब में खून आने लगता है |
  • मूत्राशय में कैंसर होने से – मूत्राशय में कैंसर की समस्या को अधिकतर पचास साल से अधिक उम्र के लोगो में देखा जाता है उन्हें एक ही समय पर कई बार पेशाब करने की जरुरत महसूस होती है जिससे उन्हें पेशाब करते समय बहुत टेज दर्द महसूस होता है |
  • गुर्दे में संक्रमण या कैंसर होना – गुर्दे में संक्रमण की स्थिति में पेट के एक तरफ तेज दर्द होने लगता है और गुर्दे में कैंसर की समस्या अधिकतर पचास साल से अधिक के लोगों में देखने को मिलती है इसकी वजह से व्यक्ति के पेट के नीचे के हिस्से में पसलियों में तेज दर्द होने लगता है और पेशाब करते समय बहुत ही तेज जलन महसूस होने लगती है |
  • गुर्दे में पथरी होने पर – गुर्दे में पथरी वैसे तो दर्द उत्पन्न नहीं करती है मगर कई बार यह पथरी मूत्र को बाहर निकलने वाले ट्यूब को ब्लोक कर देती है जिसकी वजह से पेशाब करते समय तेज जलन और दर्द का अनुभव होता है |
  • बड़ी हुई पौरुष ग्रंथि या उसमें कैंसर का होना – पौरुष ग्रंथि के बढ़ जाने की समस्या को आमतौर पर बुजुर्ग लोगो में जिनकी उम्र साठ साल से अधिक होती है उनमे देखने को मिलती है | पौरुष ग्रंथि के बढ़ जाने की समस्या वैसे तो एक सामान्य से समस्या होती है इसका पौरुष ग्रंथि में होने वाले कैंसर से कोई मतलब नहीं होता है मगर दोनों ही परस्थितियो में व्यक्ति को पेशाब करने में समस्या होने लगती है | मूत्राशय को खाली करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है जीकी वजह से उन्हें बार बार पेशाब जाने की जरूरत पड़ती है |
  • खून पतला करने बाली दवाए – कई बार कई दवाए भी मूत्र में पेशाब आने का कारण बन जाती है जब हम एस्प्रिन और कुछ दवाओं का सेवन करते है तो ये खून को पतला कर देती है जिसके कारण भी कई बार पेशाब में खून आना शुरू हो जाता है |
  • व्यायाम – अधिक और कठिन व्यायाम जैसे लम्बी दौड़ आदि करने से भी पेशाब से खून आना शुरू हो जाता है |
  • संक्रमण – कई बार कुछ बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से या फिर परिवार में पहले से किसी को गुर्दे से जुडी समस्या होने उसका संक्रमण आपको लग जाने पर भी पेशाब से खून आना शुरू हो जाता है
  • जोरदार व्यायाम या तेज़ दौड़ना।
  • यौन सम्बंधित गतिविधि।
  • चोट लगना।
  • मासिक धर्म।
  • मूत्राशय, गुर्दा या फिर प्रोस्टेट में संक्रमण।
  • वायरल बीमारी की वजह से, जैसे कि हेपेटाइटिस।
  • यूरिनरी स्टोन का होना।
  • बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण का होना।
  • परिवार में पहले किसी को गुर्दे से सम्बंधित रोग होना।

यूरिन में खून आने की जांच –

पेशाब में खून आने की जांच करने से पहले डॉक्टर मरीज से कई सारे सवालों का जबाब पूछता है जैसे की पेशाब करते समय कठिनाई का होना, जलन होना, दर्द होना अदि | सवालों के जबाब ले लेने के बाद डॉक्टर द्वारा मरीज के मूत्र का परिक्षण किया जाता है जिसके परिणाम में अगर डॉक्टर को संक्रमण का अंदेशा लगता है तो और जांच करवाई जाती है | दूसरी जांचो में मरीज का शारीरिक परिक्षण विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है | इन शारीरक परिक्षण में महिलाओं में योनी का और पुरुषों में गुदा का परिक्षण किया जाता है |

पेशाब में खून आने का कारण जानने को और उसका सफल इलाज करने के लिए निम्न जांचो को किया जाता है :

  • गुर्दे की जांच – गुर्दे की सही जांच करने के लिए खून की जांच की जाती है और कुछ गुर्दे की बीमारियाँ जो पेशाब में खून के आने का कारण हो सकती है उनकी जांच के लिए बायोप्सी का प्रयोग किया जाता है | बायोप्सी में गुर्दे कुछ सेम्पल लेकर उसकी जांच की जाती है | इसके अलाबा कुछ इमेजिंग टेस्ट सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व इंट्रानर्वस पाइलोग्राम की मदद से भी पेशाब में खून आने के कारणों का पता लगाया जाता है |
  • सिस्टोस्कोपी – सिस्टोस्कोपी एक ऐसी जांच की प्रक्रिया होती है जिसमे एक पतली नाली की मदद से मूत्राशय के अंदर जांच की जाती है | इस प्रक्रिया में उतकों का सेम्पल लेकर के कैंसर बाली कोशिकाओं का पता लगाया जाता है |
  • श्रोणी परिक्षण – श्रोणी परीक्षण का प्रयोग महिलाओं की जांच के लिए किया जाता है इस परीक्षण से महिलाओं के श्रोणी अंगो के दृश्यों की जांच की जाती है | इस परीक्षण में डॉक्टर महिला की योनी में एक चिकनाई ऊँगली को प्रवेश करता है और श्रोणी अंगो की जांच करता है जिससे पेशाब में खून आने का सही कर्ण पता लगाया जा सके |
  • डिजिटल रेक्टल परीक्षण – इस परीक्षण में प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच की जाती है | इसकी जांच के लिए डॉक्टर मरीज को एक टेबल पर झुकता है और फिर उसके मलाशय में एक चिकनाई को ऊँगली पर लगाकर उसके मलाशय में ऊँगली से उसके प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करता है |
  • माइक्रोस्कोपिक जांच – माइक्रोस्कोपिक जांच में मरीज के पेशाब का माइक्रोस्कोप से परीक्षण किया जाता है जिससे मूत्र में खून के साथ साथ संक्रमण और गुर्दे की बिमारियों का भी पता लगया जाता है |

खून को आने से रोकने का बचाव :

ऊपर दिए गए कारणों या लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आने पर पेशाब में खून को रोकने के लिए कुछ बचाव होते है जिन्हें प्रयोग करके इसे बहुत हद तक कम किया जा सकता है |

  • अगर आपको गुर्दे की पथरी की समस्या है तो खूब मात्रा में तरल भोज्य पदार्थो और ओक्सिलेट व पशु प्रोटीन जैसे पदार्थो का सेवन करना शुरू कर दे जिससे पथरी पेशाब के मार्ग में रुकावट उत्पन्न करना कम कर देती है | ( और पढ़े – पथरी के मरीज का खानपान )
  • नमक के सेवन पर ध्यान देना शुरू कर दें ना ज्यादा मात्रा और न ही कम बल्कि एक संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करें |
  • गुर्दे और मूत्राशय के कैंसर से बचने के लिए धुम्रपान करना त्याग दे | अगर आप धूमपान करते है तो जान ले की धुम्रपान करने बालों को धुम्रपान न करने वालो की अपेक्षा मूत्राशय में कैंसर होने की समस्या कई गुना अधिक होती है |

यूरिन में खून आने की शारिरिक परीक्षा

इस परीक्षा के दौरान डॉक्टर अक्सर मरीज़ के पेट अथवा पीठ पर ठोंकता है जिसकी वजह से वो मूत्राशय अथवा गुर्दे क्षेत्र की कोमलता की जांच करता है। डॉक्टर मूत्र में रक्त आने के लिये दो परीक्षाओं का उपयोग करते हैं

  1. डिजिटल रेक्टल परीक्षा- इस परीक्षा में डॉक्टर मरीज़ को एक मेज़ की ओर झुकाता है फिर डॉक्टर रोगी के मलाशय में एक चिकनाई अँगुली स्लाइड करता है और यह मलाशय के सामने स्थित प्रोस्टेट के हिस्से को महसूस करता है।
  2. श्रोडी परीक्षा- ये महिलाओं की श्रोडी अंगों के दृश्य के लिए एक शारीरिक परीक्षा होती है। इसमें डॉक्टर महिलाओं के श्रोडी अंगों को देखता है और फिर योनि में चिकनाई अँगुली स्लाइड करता है जिससे पेशाब में खून आने की समस्या का पता लगाया जाता है।

इस बीमारी का उपचार :

मूत्र में खून आने की समस्याओ में मुख्यतः खून को पतला करने बाली कुछ दवाए, छोटी छोटी चोट या घाव और गुर्दे की पथरी कारण बनती है | इन साड़ी समस्याओ का काई लम्बे समय तक कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है और बाद में ये धीरे धीरे समस्या उत्पन्न करना शुरू कर देती है | कुछ लोगो को मूत्राशय में संक्रमण की शिकायत होने पर भी खून आना शुरू हो जाता है अगर इसका समय रहते पता लगा लिया जाए तो आसानी से ठीक किया जा सकता है |

निम्न प्रकार के उपचारों से पेशाब में खून आने की समस्या को दूर किया जाता है –

  • एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से पेशाब के मार्ग में उत्पन्न संक्रमण को दूर किया जाता है |
  • बड़ी हुई पौरुष ग्रंथि को डॉक्टर के दवाओं से ठीक किया जाता है |
  • गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी को तोड़ने के लिए शॉक वेव थेरेपी का प्रयोग किया जाता है |
  • कुछ प्रकार के केसों में उपचार करबाना जरुरी नहीं होता है बस जब तक पेशाब में खून आने की समस्या खत्म न हो जाये तब तक डॉक्टर के द्वारा बताये गए निर्देशों का पालन करें और डॉक्टर से परामर्श करते रहे |