नॉन एलर्जीक रेनाटिस का इलाज – Non Allergic Rhinitis Treatment in Hindi

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Non Allergic Rhinitis

नाक में होने वाली एलर्जी को एलर्जिक राइनाइटिस कहा जाता हैं। नाक हमारे शरीर का वो भाग है जो श्वसन की प्रक्रिया के समय शरीर में प्रवेश करने वाले मिट्टी व धूल कणों और हानिकारक पदार्थों को रोकती हमारे शरीर में प्रवेश करने  से रोकते है। लेकिन जब यह पदार्थ किसी तरह शरीर में प्रवेश करने में सफलता प्राप्त कर लेते हैं तो हमारे शरीर की इम्‍यूनिटी इनके प्रति प्रतिक्रिया वयक्त करती है, जो एलर्जी के रूप में सामने आती है। इसी तरह की एलर्जी को एलर्जिक राइनाइटिस कहते हैं। वैसे तो यह बीमारी जानलेवा नहीं होती, लेकिन आपकी सामान्य दिनचर्या को प्रभावित करने लगती है। और इसका सही समय पर ठीक से उपचार न होने पर, अन्य बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है।

नॉन ऐलर्जीक रेनाटिस के कारण

नॉन ऐलर्जीक रेनाटिस के कारण निम्नलिखित हैं 

  1. ऐसे परिवार से जुड़े सदस्य जिनके परिवार के किसी सदस्य को एलर्जीक रेनाटिस भी हुआ हो, इसका मतलब है कि इस प्रकार की एलर्जी का कोई आनुवंशिकी कारण भी हो सकता है।
    2. कुछ मनोवैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं।

3.जवानी के शरुआती दौर में, गर्भकाल के समय या रजोनिवृत्ति के समय इस प्रकार के रोग होने की अधिक संभावना रहती है।

4.कभी कभी खाने में अंडा, बैंगन, अनन्नास, दूध से बने पदार्थ भी इस प्रकार की एलर्जी का कारण हो सकते हैं।

5.जीवाणुओं के द्वारा भी ऐलर्जी होने का एक कारण हो सकता है।

6.एस्प्रिन, एंटीबायोटिक, आयोडीन इत्यादि का अधिक से अधिक सेवन करने से भी इस प्रकार की एलर्जी से कोई भी मनुष्य ग्रसित हो सकता है

 कुछ प्रमुख कारण

मौसम में हुए अचानक परिवर्तन के कारण, तापमान में अचानक परिवर्तन, धूल-मिट्टी, नमी, प्रदूषण, जानवरों के रेशे एवं बाल का शरीर में प्रवेश के  कारण भी यह हो सकता है , साथ ही पेड़ और परागकणों के शरीर में प्रवेश करने या त्वचा पर लगने से होने वाली प्रतिक्रिया, एलर्जिक राइनाइटिस के प्रमुख लक्षण हैं।
नॉन ऐलर्जीक रेनाटिस के लक्षण

लक्षण निम्नलिखित हैं

छींकें आना – शुरुआत के समय में इससे ग्रसित रोगी को बार बार छींकों दो – चार होना पड़ता इसके पश्च्यात  रोगी की नाक से सफेद तरल पदार्थ पानी जैसा अत्यधिक मात्रा में नाक से बिन बुलाए मेहमान की तरह बाहर आने लगता है।

नाक का बन्द होना – इस प्रकार की एलर्जी से ग्रसित व्यक्ति की कभी एक तरफ की नाक बंद हो जाती है तो कभी दूसरे तरफ की नाक बंद हो जाती है।

खुजली – इस ऐलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को नाक में खुजली की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

बैचेनी – इस रोग से घिरा व्यक्ति अपने आप को बैचेन महसूस करता है।

सूंघने की क्षमता में कमी – इस रोग से पीड़ित व्यक्ति की सूंघने की क्षमता में कमी आ जाती है अर्थात उसके सूंघने की शक्ति क्षीण हो जाए है ।

साइनोसाइटिस –   यदि नाक की एलर्जी के साथ साथ साइनोसाइटिस भी हो तो सिर में भारीपन व दर्द की भी शिकायत आ सकती है।

आंखों में जलन – एलर्जीक रेनाटिस में आँखों में जलन ओ उनके लाल होने की समस्या भी उतपन्न हो सकती हैं।

सांस लेने में परेशानी – सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रैनोस्कोपी – रैनोस्कोपी करने पर आगे की नासिका श्लेष्मा पीली – मटमैले रंग की व सूजी हुए मिल सकती है।

नॉन ऐलर्जीक रेनाटिस के उपाय

नॉन ऐलर्जीक रेनाटिस के उपाय निम्नलिखित हैं

1.हल्के ऐलर्जी के लिए  नाक को नमक मील पानी से अच्छी तरह से धोएं 240 मिलीलीटर गर्म पानी में , आधा चम्मच नमक, बेकिंग सोडा ( चुटकी भर डालें)  और इस पानी नाक साफ करें

2.अगर आप धूल के कणों से परेशान ह तो कार्पेट हटा दें।

3.शहद और प्रोबियोटिक विटामिन का प्रयोग भ कर सकते हैं।

4.ऐलर्जी के मौसम के दौरान अपने घर के खिड़कियों ओर दरवाजों को बंद रखें।

5.ऐलर्जी के कारण की पहचान करना और उसके साथ संपर्क में आने से बचने का प्रयास करब

6.घर में कालीन नहीं लगाना भी उपयोग हो सकता है

7.जब पराग संख्या में अधिक हो तो घर से बाहर निकलने से बचें।

8.धूल में जाने से पहले मुँह और नाक को कवर करके ही बाहर जायँ।

9.धूम्रपान या अन्य प्रकार के धुएं के सम्पर्क में आने से बचने की हर सम्भव कोशिश करें।

10.धूल के कणों से एलर्जी की स्थिति में चादरों ओर कम्बल को 54.4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धो लें।

11.यदि घर में पालतू पशु जैसे कुत्ता, बिल्ली है री कम से कम दो बार आरती सप्ताह नहलायें।

12.यदि सम्भव हो तो घर में ऐलर्जी के लिए डिज़ाइन किया गया एक फिल्टर लगा कर देल्हें।

13.वैक्यूम में एक HEPA  फिल्टर लगाकर डस्ट साफ करें।

  1. साप्ताहिक रूप से वैक्यूम करने पर भी ऐलर्जी को दूर करने में सहायता प्राप्त हो सकती है।
  2. सुबह सुबह के मौसम में बाहर वयायाम करने से बचें।
  3. बाहर से आने के तुरंत बाद एक शॉवर ले।
  4. एक कटोरे में गर्म पानी डालकर उसमें तेल की कुछ बूंदें डालकर उसकी भाप लें ।
  5. आप आने आहार में प्याज को समिमलित कर सकते हैं इससे भी इस प्रकार की एलर्जी लाभ होगा और आपके शरीर के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। प्याज आपकी प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है।
  6. शहद के साथ एक गिलास गर्म पानी में एक स्पून सेब का सिरका डालकर पियें। एक दिन में इस गर्म पानी के दो गिलास पी सकते हैं। सेब के सिरके में शक्तिशाली एन्टीहिस्टामिन गुण होते हैं। यह बहती नाक और नाक की रुकावट को कम करने में मददगार होती है। यह सिर दर्द को दूर करने में सहायक होने के साथ ही बार – बार आने वाली छिकों को भी कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
  7. आयल पुल्लिंग एक पुरानी तकनीक है जो आपके शरीर को डिटॉक्सिफिड करने में सहायक होती है यह ऐलर्जी की वजह से बुखार को भी ठीक करने में मददगार होती है। अपने मुंह में एक चम्मच नारियल का तेल लेकर उसे मुँह में गोल गोल घुमाए। इससे मुँह के सारे बैक्टिरिया मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। इसके बाद इसको थूक दें। यह ऐलर्जी को दूर करने में सहायता प्रदान करता है।

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