किडनी प्रत्यारोपण - Kidney Transplant In Hindi  

किडनी प्रत्यारोपण या गुर्दा बदलना की जानकारी  – Kidney Transplant In Hindi  

रोग व इलाज

आज के इस आधुनिक युग में हम बड़ी से बड़ी बिमारियों से निपटने में सक्षम है । विज्ञान ने कई प्रकार की जटिल बिमारियों के सरल व सक्षम उपचार खोज निकाले है । किडनी प्रत्यारोपण भी इस प्रगति की एक निशानी है। किडनी प्रत्यारोपण के अलावा भी किडनी के इलाज के अन्य बहुत से उपचार है, परन्तु इसे अन्य सभी उपचारों की तुलना में अधिक आदर्श माना जाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज की अंतिम अवस्था या व्यक्ति की किडनी फेल हो जाने पर इस विधि का प्रयोग किया जाता है।


किडनी प्रत्यारोपण

क्रोनिक किडनी में मरीज की दोनों किडनी खराब हो जाती है। इस समस्या की शुरूआत में आपको पता नहीं चलता है,लेकिन जैसे-जैसे यह बढती जाती है, किडनी खराब होने लगती है। साथ ही पीड़ीत व्यक्ति को परेशानी आना शुरू हो जाती है। क्रोनिक किडनी के पहले चरण में आपको किसी भी प्रकार का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। क्रोनिक किडनी के अलावा भी किडनी में किडनी स्टोन, पेशाब मार्ग में रूकावट आदि अन्य समस्यायें भी हो सकती है। किडनी के समस्या से निपटने के लिए निम्न उपचार है।

उपचार

हेमोडायलिसिस

यह आपको पूरी तरह राहत नहीं देती है, बल्कि आपको अस्थायी रूप से राहत प्रदान करता है । इस प्रकिया में डाॅक्टर आपके रक्त को मशीन के द्वारा शुद्ध करके वापस शरीर में प्रवेश करा देता है । यह हमारे शरीर में कैल्शियम व फास्फोरस की मात्रा को भी निंयत्रित करता है । इससे हमारे  ब्लड प्रेशर की भी जाॅंच होती है।

पेरिटोनिय डायलिसिस –

इस प्रकिया के द्वोरान डाॅक्टर आपके पेट में एक ट्यूब को डाल देता है। इसमें भी पहली प्रकिया की तरह रक्त को साफ किया जाता है। इसमें पेट से जहरीले अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थो को फिल्टर किया जाता है।

किडनी बदलना की जरूरत कब पड़ती है –

क्रोनिक किडनी डिजीज या जब किसी व्यक्ति की किडनी फेेेल हो जाती है,तब किसी अन्य जीवीत या मृत व्यक्ति की स्वस्थ किडनी को आपॅरेशन द्वारा खराब किडनी के स्थान पर लगाने को किडनी प्रत्यारोपण कहा जाता है । जिस व्यक्ति की किडनी खराब हुई हो तो यह जरूरी नहीं की उसे किसी भी अन्य व्यक्ति की किडनी के द्वारा बदला जा सकता है । किडनी प्रत्यारोपण में जिस व्यक्ति को किडनी खराब है, व जिसके द्वारा किडनी दी जा रही है, दोनों के कई प्रकार के टेस्ट किए जाते जिससे यह पता चल पाए कि किडनीदाता की किडनी प्रत्यारोपण के लिए सही है या नहीं ।

सर्वप्रथम दोनों व्यक्तियों के ब्लड की जाॅंच कर यह देखा जाता कि दोनों के ब्लड गुप्र एक समान है। यदि किडनी देने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई सक्रंमण है, तो उससे किडनी नहीं ली जाती है।दोनों के रक्त में उपस्थित एच.एल.ए की मात्रा का भी ध्यान रखा जाता है। किडनी का दान कोई भी जिसकी उम्र 18 से 55 साल के बीच है,और उसे किसी प्रकार की संक्रमण बिमारी नहीं है कर सकता है।

यह आवश्यक नहीं कि पुरूष सिर्फ पुरूष को और स्त्री केवल स्त्री को किडनी दे,बल्कि पुरूष चाहे तो स्त्री को और स्त्री पुरूष को किडनी दे सकती है। यदि आपका कोई जुड़वा भाई या बहन है, तो उसे किडनीदाता के रूप में आदर्श माना जाता है । किडनी प्रत्यारोपण के आपॅरेशन से पहले प्रत्यारोपित गुर्दे को एक ऐसे स्थान पर रखा जाता है, जो मौजूदा लोगों के स्थान से दूर हों। इस क्रिया को हेेटरोटोपिक प्रत्यारोपण कहा जाता है। किडनी प्रत्यारोपण के आपॅरेशन में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगता है। जिन लोगों को हेपेटाइटिस या हड्डी का संक्रमण है, तो उन्हें किडनी प्रत्यारोपण का उपचार नहीं चुनना चाहिये ।

गुर्दा प्रत्यारोपण के फायदे निम्न है-ः

  • इस प्रक्रिया से आप अपना जीवन आराम से व्यतीत कर सकते है।
  • किडनी प्रत्यारोपण के बाद आप दैनिक कार्यो को आराम से बिना किसी समस्या के कर सकतें है।
  • इस विधि से आपका हीमोडायलिसिस के उपचार में होने वाला खर्च, समय और उसके द्वोरान आने वाली जटिलताओं से छुटकारा मिल जाता है।
  • इस विधि में आपको अन्य विधियों के अपेक्षा कम परहेज करना पड़ता है।
  • पुरूष व स्त्री को इस इलाज के बाद शारीरिक संबंध बनाने में किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।
  • डायालिसिस की अपेक्षा किडनी प्रत्यारोपण में व्यक्ति के लंबी आयु होने की संभावना ओसतन बढ़ जाती है।

गुर्दा बदलने  के बाद आपको कुछ बातें जानना जरूरी है।

संभावित खतरे

आज के युग में किडनी प्रत्यारोपण एक आम बात है,परन्तु हर चीज के दो पहलु होते है | इसी प्रकार इससे हमें कभी-कभी कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार किडनी प्रत्यारोपण के बाद हमारे शरीर द्वारा नई किडनी को स्वीकार नहीं किया जाता है। किडनी को स्वीकार न करना हमारे शरीर के श्वेतकणों के कारण होता है।

इन कणों का काम हमारे शरीर में बाहर से आने वाली नई या हानिकारक चीज से लडने का होता है। जब नई किडनी को हमारे शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है, तो श्वेतकण के लिए यह एक नई चीज के रूप में होती है। वह इस चीज से सुरक्षा के लिए उसको नुकसान पहुॅंचाना शुरू कर देती है। इसके कारण शरीर किडनी को स्वीकार नहीं कर पाता है,इसे ही किडनी रिजेक्शन कहा जाता है। डाॅक्टर के द्वारा प्रतिरोधक क्षमता को कम करने के लिए दवा दी जाती है, परन्तु कई बार इन दवाओं का सेवन हमें आजीवन करना पड़ता है।

नई किडनी की देखभाल

  • आपॅरेशन के बाद डाॅक्टर के द्वारा दी गई दवाओं को नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
  • कभी भी किडनी प्रत्यारोपण के बाद दर्द निवारक दवाओं का सेवन बिना डाॅक्टर की अनुमति के प्रयोेग नहीं करना चाहिए।
  • आपॅरेशन के बाद पीड़ीत व्यक्ति को नियमित रूप से ब्लडप्रेशर,पेशाब की मात्रा व वजन का चेकअप करते रहना चाहिए।
  • खून की जाॅंच भी कुछ समय तक नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए,और कुछ परिवर्तन होने पर डाॅक्टर से सलाह लेना चाहिए।
  • बुखार आना,शरीर में थकान रहना ( और पढ़े – बुखार का उपचार )
  • वजन का बढ़ना या घटना आदि कोई समस्या हो तो डाॅक्टर से परामर्श ले लेना चाहिये। ( और पढ़े – वजन बढाने के उपाय , वजन कम करने के उपाय )
  • नियमित रूप से नेफ्रोलाॅजिस्ट से चेकअप करवाते रहना चाहिए।

संक्रमण से बचने के उपाय-

  • फाइबर,कैलोरी और प्रोटिन से युक्त भोजन का सेवन करें। नमक,शक्कर व वसा के अधिक सेवन से दूर रहें।
  • प्रतिदिन योगा करें और अपने वजन पर निंयत्रण रखने के लिए कसरत करें, परन्तु वही कसरत करें जिसकी सलाह डाॅक्टर के द्वारा दी गई हों।
  • धूम्रपान व शराब के सेवन से दुर रहें। ( और पढ़े – धूम्रपान छोड़ने के उपाय )
  • हमेशा साफ और उबले हुए पानी का सेवन करें।
  • बाहर के खाने से बचें और घर के बने खाने का सेवन करें।
  • चिकित्सक की सलाह के बिना यौन संबंध न करें।

 

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MANVENDRA
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