आँतों में कीड़े – Intestinal Worms In Hindi

रोग व इलाज

आँतों में कीड़े होने की समस्या एक आम बात है। यह ज्यातादर बच्चों में होती है,परन्तु आज के समय में यह समस्या किसी को भी हो सकती है । पेट में कीड़े दो तरह के होते है पहले जो दिखाई देते व दूसरे जो इतने सूक्ष्म होते कि उन्हें सिर्फ सूक्ष्मदर्शी द्वारा ही देखा जा सकता है । आपके पेट या आंतो में होने बाले कीड़े एक परजीवी ( परजीवी जो जिन्दा रहने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं  ) जीव होते है यह कीड़े आंतो में रहकर आंतो को खाते है और खून को चूसते हैं | आंतो में रहने बाले यह कीड़े आँतों को खाकर जिन्दा तो रह लेते है मगर प्रजनन नहीं कर पाते है | गलत खान – पान,दूषित भोजन आदि से यह हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है । इन कीड़ो से हमें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है ।


पेट की आँतों में कीड़े

आपकी आँतों में पाए जाने बाले ये कीड़े गंभीर और हानिकारक संक्रमण को उत्पन्न कर सकते है | इसलिए इनको समय रहते लक्षणों को पहचान कर दूर किया जा सकता है | कई बार आंतो के कीड़े साधारण से घरेलु उपायों द्वारा खत्म हो जाते है मगर समस्या बने रहने पर डॉक्टर से इलाज की आवश्यकता पड़ती है और कई मामलों में ओपरेशन की जरुरत भी पड़ती है | तो आइये जानते है पेट में होने बाले कीड़ो के कारण, लक्षण और उपचार….

इसका  कारण

आँतों में कीड़े होने के लिए निम्न कारण जिम्मेदार होते हैं…

  • यदि हम खाने-पीने के पदार्थो में साफ-सफाई का ध्यान न रखे तो यह समस्या हो सकती है।
  • इसका सबसे बड़ा कारण हमारे शरीर की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली है।
  • हमारे आस-पास अगर गन्दगी और कचरा है,तो इसमें कई प्रकार के जीव उत्पन्न होते है। यह भी एक प्रमुख कारण है।
  • यदि हम खान खाने के बाद कोई भी परिश्रम का कार्य नहीं करते है, और दिन में सोते है तो यह पेट में कीड़े होने का कारण बनता है।
  • बिना हाथ साफ किए और गन्दगी में खाना खाने से भी यह समस्या होती हैं।
  • कई बार हम अजीर्ण अर्थात ‘बिना भूख के भी खाना खा लेते है’ यह अगर हम आदत के रूप में अपना लेते है, तो आँतों में कीड़े उत्पन्न हो जाते है।

कुछ लक्षण

आँतों में कीड़े होने की समस्या होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते हैं…

  • यदि आपके आँतों में कीड़े है, तो आपके पेट में दर्द बना रहता है।
  • आँतों में कीड़े होने से हमारे द्वारा लिया गया आहार सही तरीके से नहीं पचता है।
  • संतुलित आहार होने के बाबजूद हमारे शरीर का वजन स्वतः ही कम होने लगता है।
  • इस समसया के कारण हमारी आँखे लाल हो जाती है।
  • आमतौर पर हमारी जीभ का रंग हल्का गुलाबी होता है,पर इस समस्या के कारण जीभ का रंग सफेद होने लगता है।
  • अगर कोई बच्चा रात को सोते समय दांतो को बजाता है, तो यह संकेत है कि उसके आँतों में कीड़े है।
  • इस समस्या के कारण मुहॅं से बदबू व गले में धब्बे आने लगते है।
  • आँतों में कीड़े होने के कारण आपके शरीर में सूजन होने लगती है।
  • आपको मल त्याग के दौरान खून आने लगता है, और आपके गुप्तांग में खुजली होने लगती है।
  • इस समस्या के कारण आपका जी मचलाता रहता है और लूज मोशन भी रूक-रूक के होते रहता है।

बीमारी का उपचार

इस समस्या का उपचार आप घर पर या डॉक्टर के पास जाकर भी करा सकते है । सर्वप्रथम हम आपको कुछ घरेलु नुस्खो के बारे में बताते है।

रोग का घरेलु उपचार

  • अनार : – 100 ग्राम अनार के पेड़ की जड़ की छाल,100 ग्राम पलास बीज का चुर्ण को पीस कर 2 लीटर पानी के साथ तब तक उबालें जब तक पानी की मात्रा आधी न हो। ठंडा होने के उसे छानकर एक साफ बर्तन में एकत्रित कर लें। इस प्रकार बने काढे को 7 दिनो तक 50 ग्राम की मात्रा में ग्रहण करें। अनार के छिलकों को सूखा कर उनका बारीक चूर्ण बना लें और प्रतिदिन एक-एक चम्मच सुबह-शाम ग्रहण करें।
  • पपीता : – पपीते के बीज को 1चम्मच नारियल के तेल,1 कप नारियल का दुध व कुछ पपीते के स्लाइस को काट कर मिलांए और मिक्सर में अच्छी से पीस लें। इस प्रकार निर्मित दवा को 7 दिन तक शहद के साथ सुबह शाम लें। यह आपके पेट में उपस्थित कीड़ो का खत्म कर देगा।
  • तेजपत्ते : – तेजपत्ते तथा जैतुन के तेल को अच्छे से मिलाकर गुदा में लगाने से भी इस समस्या से समाधान पाया जा सकता है।
  • अजवाइन : – 20 ग्राम गुड़ तथा 2 माशा खुरासानी अजवाइन को मिलाकर ठंड़े पानी के साथ सेवन करना चाहिए । अजवाइन का पीस कर चूर्ण बना लें और प्रतिदिन 7 दिन तक 1 गिलास छाछ के साथ सेवन करें।
  • सत्यानासी : – दो चुटकी सत्यानाशी की जड़ का चूर्ण ठंड़े पानी के साथ लेने से भी इस समस्या का निदान हो सकता है।

डॉक्टर के द्वारा दिया जाने वाला उपचार

डॉक्टर के द्वारा आपके कुछ टेस्ट किए जायेंगे उसके बाद आपको निम्न दवाइयाँ दी जा सकती है।

  • होललीवर एक्सट्रेक्ट इन्जेक्शन : 1 से 2 मिली के मात्रा में 1 दिन छोड़कर मांस में लगाया जाता है।
  • टेट्राकेप : इस कैप्सूल को खाली पेट हर 15-15 मिनट में खाना पड़ता है। कुल तीन कैप्सूल का सेवन करना पड़ता है।
  • जोनिक 50 : इस कैप्सूल को वयस्कों को 100 एम जी व बच्चों को 50 एम जी के 1-1 कैप्सूल 12 घण्टें के अंतराल में देना पड़ता है।
  • पानटेलामिन : 2 वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों को एक टैबलेट दो टाइम तीन दिन तक देना पड़ता है।
  • हूपार : यह दो वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चो एवं वयस्को को सुबह खाली पेट में चीनी के शर्बत के साथ घोलकर पिना चाहिए,यह आपके पेट के कीड़ो को नष्ट कर देता है।

इनके अलावा भी कई दवाइयाँ है जैसे – वर्मीसोल, सिपलाजन, वेनपार सस्पेंशन आदि। इस समस्या में आपको अपने खाने पर परहेज करना पड़ता है । भोजन में उसी प्रकार का खाना लें जिस से आपके द्वारा ले जाने वाली दवा का असर हों | अगर आप परहेज नहीं करेंगे तो दवा अपना असर नहीं दिखा पायेगी । इस दौरान आपको केला, सेब, जीरा, सरसों का साग, संतरा, हींग, धनिया, अदरक की चटनी, राई आदि चीजों का सेवन करना चाहिए।

सावधानियाँ

  • अपने आस-पास हमेशा साफ-सफाई का ध्यान रखें क्योंकि गंदगी में कई प्रकार के जीव उत्पन्न हो जाते है।
  • हमेशा खाने खाते या बनाते समय अपने हाथों और जिस जगह खाना बना रहे है, उसे अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए।
  • दूषित जल व भोजन के प्रयोग से दूर रहना चाहिए।
  • खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी आराम नहीं करना चाहिए बल्कि हमें खाना खाने के बाद थोड़ घूम लेना चाहिए।
  • ज्यादातर यह समस्या बच्चो में होती है, इसलिए उससे बचने के लिए उन्हें कभी भी चाय की आदत नहीं होनी चाहिए।
  • हमेशा संतुलित भोजन लेना चाहिए, जिससे शरीर में पोषक तत्वो की पूर्ति हो जाए और हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर न हो सके ।
  • जितना हो सके बाहर के खाने से बचे और हो सके तो कहीं जाते समय घर पर बना खाना ही ले जाएं ।
  • हमेशा उबले हुआ या आरओ के पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।

अगर आप इस जैसी समस्याओं से बचना चाहते है, तो नियमित योगा करें । हमारे द्वारा दी गई जानकरी से आप संतुष्ट होगें किसी भी बीमारी से जुडी जानकारी के लिए हमें कमेंट करके बताये |

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