गर्भधारण कैसे करें ? जल्द गर्भवती बनने के उपाय- How A Women Get Pregnant

0
139

गर्भवती होना हर स्त्री का सपना होता है , पर कभी कभी कुछ ऐसे कारण होते हैं कि यह कह पाना थोडा मुश्किल होता है कि आप चिंता न करे| आज यहाँ हम आपको कुछ ऐसी टिप्स देने जा रहे हैं जिससे आपका गर्भवती होना आसन हो जायेगा | क्योंकि आपके द्वारा भूलवश या जाने अनजाने में की गयीं कुछ गलतियों एवं पोषणाहार की कमियों के कारण आपको गर्भवती होने मे परेशानी आ सकती है |

मै कैसे गर्भवती बन सकती हूँ ?

गर्भधारण के लिए सेक्स का समय सुबह का होना चाहिए क्योंकि सुबह के समय आप तरोताजा रहते हैं।

कुछ डॉक्टरों का मानना है कि जिन महिलाओं में रेगुलरली पीरियड की समस्या हो उन्हें प्रेगनेंट होने के लिए पीरियड खत्म होने के बाद दस दिन के अंतराल में सेक्स करना चाहिए , इससे प्रेगनेंट होने की संभावना ज्यादा होती है और जिनमें अनियमित पीरियड हो वे प्रेगनेंसी के लिए पीरियड के साइकिल में नियमित अंतराल (साइकिल के दौरान 20 दिन के बीच) पर सेक्स करें।

एक वर्ष तक कोशिश करते रहने के बाद भी अगर आपको गर्भधारण नहीं होता हैं तो उसे चिकित्सीय भाषा में बांझपन कहते हैं। यह रोग केवल स्त्री के कारण नहीं होता है । केवल एक तिहाई मामलों में Infertility स्त्री के कारण होती है। दूसरे एक तिहाई में पुरूष के कारण होती है। शेष एक तिहाई में स्त्री और पुरुष के मिले जुले कारणों से या अज्ञात कारणों से होती है।

महिला के गर्भधारण में समस्या :

बांझपन, प्रजनन प्रणाली की एक बीमारी है , जिसके कारण किसी महिला के गर्भधारण में समस्या / विकृतियां आ जाती है। गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है जो कई बातों पर निर्भर करती है | पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अंडों का उत्पादन, अबाधित गर्भ नलिकाएं ताकि शुक्राणु बिना किसी रुकावट के अंडों तक पहुंच सके, मिलने के बाद अंडों को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता , निषेचित अंडे की महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता तथा गर्भाशय की स्थिति।

अंत में गर्भ को पूरी अवधि तक जारी रखने के लिए गर्भाशय का स्वस्थ होना और भ्रूण के विकास के लिए महिला के हारमोन का अनुकूल होना जरूरी है। इनमें से किसी एक में विकृति आने का परिणाम बांझपन हो सकता है।

कैसे गर्भवती बन सकती हूँ

बांझपन क्यों होता है ?

पुरुषों में प्रजनन क्षमता में कमी का सबसे सामान्य कारण शुक्राणु का कम या नहीं होना माना गया है। कभी-कभी शुक्राणु का गड़बड़ होना या अंडों तक पहुंचने से पहले ही शुक्राणु का मर जाना भी एक कारण हो सकता है। महिलाओं में बांझपन का सबसे सामान्य कारण मासिक-चक्र में गड़बड़ी है। इसके अलावा गर्भ-नलिकाओं का बंद होना, गर्भाशय में विकृति या जननांग में गड़बड़ी के कारण भी अक्सर गर्भपात हो सकता है।

बाँझपन के मुख्य कारण ?

पुरूष के सम्पूर्ण स्वास्थ्य एवं जीवन शैली का प्रभाव शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर पड़ता है , जिन चीज़ों से शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता घटती है !

  • अंडे की गुणवत्ता
  • अवरुद्ध अण्डवाही ट्यूबें
  • असामान्य हार्मोन के स्तर
  • जीवन शैली
  • यौन संचारित रोग
  • मोटापा
  • शुक्राणु बनने की समस्या – बहुत कम शुक्राणू या बिलकुल नहीं।
  • मदिरा, ड्रग्स एवं सिगरेट पीना
  • वातावरण का विषैलापन एवं कीटनाशक दवाएं

गर्भवती कैसे हों ? गर्भधारण करने का तरीका :

जब स्त्री को महावारी शुरू हो तब  4 दिन सबसे अलग रह कर , कोई भी काम काज ना करें और पूरी तरीके से आराम करें। मन से खुश रहे। पति से सहवास न करे। विचार में शुद्धता रखें, महावारी खत्म होने पर अच्छे सुगंधित उबटन लगाकर स्नान करें। सबसे पहले अपने पति को देखे या शीशे में खुद को देखे। इन दिनों में स्त्री को खुश , सात्विक एवं अच्छे विचारों से युक्त रहना चाहिए।

गर्भाधान के समय स्त्री का मन जिस प्रकार के विचारों वाला होता है और जिस तरफ आकर्षित रहता है , उसी प्रकार की संतान को जन्म देती है। गर्भाधान और गर्भकाल के दौरान, स्त्री जैसी भावना और विचारधारा रखती है , उसी के अनुरूप संतान के मन स्वभाव और संस्कारों का निर्माण होता है। इसलिए पति पत्नी को गर्भाधान के समय अपनी मानसिक स्थिति अच्छे विचार युक्त और सात्विक रहना चाहिए।

गर्भाधान के लिए उत्तम समय कौन-सा ?

पुत्र प्राप्ति की इच्छा से किया जानेवाला गर्भाधान माहवारी की 8वीं 10वीं और 12वीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक धर्म शुरु हो उस दिन व रात को प्रथम मानकर गिनती करनी चाहिए। छठी और आठवीं सम तारीख शुभरात्रि पुत्र प्राप्ति के लिए और विषम तारीख पुत्री प्राप्ति के लिए उत्तम होती है। इसलिए आप जैसी संतान की इच्छा  हो उसी तारीख को गर्भाधान करें।

आइये आज हम आपको गर्भाधान के कुछ सरल उपाय भी बताते हैं जिनको करने से आप जल्द गर्भधारण कर सकती हैं ।

दालचीनी :

वह पुरुष जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होता है, वह रोजाना सोते समय दो बड़े चम्मच दालचीनी का चूर्ण ले , तो वीर्य में वृद्धि होती है और उसकी यह समस्या दूर हो जाएगी।

जिस महिला को गर्भाधान ही नहीं होता है , वह चुटकी भर दालचीनी पावडर  एक चम्मच शहद में मिलाकर अपने मसूढ़ों में दिन में कई बार लगायें। थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा और कारगर असर दिखायेगा |

एक दम्पत्ति को 14 वर्ष से संतान नहीं हुई थी|  महिला ने इस विधि से मसूढ़ों पर दालचीनी, शहद लगाया | वह कुछ ही महीनों में गर्भवती हो गई और उसने पूर्ण रूप से विकसित दो सुन्दर जुड़वा बच्चों का जन्म  दिया।

असगंध

असंगध , नागकेसर , और गोरोचन इन तीनों को समान मात्रा में बराबर मात्रा में लेकर पीस कर छान लें। इसे शीतल जल के साथ सेवन करें , तो स्त्री बहुत जल्दी गर्भवती हो जाती है।

असगंध का चूर्ण 50 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर , कपडे से छान कर रख लें। जब माहवारी बंद हो जाए तब स्त्री स्नान करके 10 ग्राम असगंध का चूर्ण सेवन घी के साथ करें। उसके बाद पुरुष के साथ रमण करें तो इससे बांझपन दूर होकर महिला गर्भवती हो जाएगी।

तुलसी:  माहवारी नियमित करने के उपाय

यदि किसी महिला को माहवारी नियमित रूप से सही मात्रा में हो रही  हो, परन्तु वह गर्भवती नहीं हो पा रही हो , तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 01 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।

तेजपात:  प्रेगनेंट होने के टिप्स

गर्भाशय की कमजोरी (ढीलापन) की वजह से यदि गर्भाधान न हो रहा तो तेजपत्ता का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की कमजोरी दूर हो जाती है  तथा स्त्री प्रेग्नेंट होने के योग्य बन जाती है।

गर्भपात से बचने के उपाय, घरेलू उपचार, गर्भ सम्बन्धी दोष :

कभी-कभी किसी स्त्री को प्रेग्नेंट न हो पाने और बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को गर्भ रुकने के बाद गर्भस्राव  हो जाता है। तेजपात दोनों ही समस्याओं को खत्म करता है।

तेजपात का पाउडर चौथाई चम्मच की मात्रा में तीन बार पानी से नियमित लेना चाहिए। कुछ महीने तेजपात की फंकी लेने से गर्भाशय की कमजोरी दूर होकर गर्भाधान संस्कार के योग्य हो जाता है |

जिन स्त्रियों को गर्भस्राव होता है, उन्हें प्रेग्नेंट होने के बाद कुछ महीने तेजपत्ते के पाउडर की फंकी लेनी चाहिए। इस तरह तेजपत्ते से गर्भ सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं और स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।

पीपल

पीपल वृक्ष की जटा का चूर्ण 5 ग्राम मासिक-धर्म के चौथे, पांचवे, छठे और सातवे दिन सुबह नहाकर बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्यापन मिटकर गर्भवती होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

पीपल की डोडी कच्ची 250 ग्राम, शक्कर 250 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें। पीरियड के बाद 10 ग्राम चूर्ण मिश्री और दूध के साथ सुबह-शाम लेना चाहिए। इसे 10 दिनों तक लगातार सेवन करने से लाभ मिलता है।

पीपल के सूखे फलों का चूर्ण कच्चे दूध के साथ आधा चम्मच की मात्रा में, मासिक-धर्म शुरू होने के 2 दिन से 5 हफ्ते तक , सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से बांझपन दूर होगा। यदि लाभ न हो तो आप अगले महीने भी यह प्रयोग जारी कर सकते हैं।

गर्भधारण के आसान उपाय, गर्भधारण कैसे करे :

  • लगभग 250 ग्राम पीपल के पेड़ की सूखी पिसी हुई जड़ों में 250 ग्राम बूरा मिलाकर पति व पत्त्नी दोनों ,  जिस दिन से पत्त्नी का पीरियड शुरू हो, 4 – 4 चम्मच गर्म दूध में रोजाना 11 दिन तक फंकी लें। जिस दिन यह मिश्रण समाप्त हो, उसी रात से 12 बजे के बाद रोजाना संभोग (सेक्स ) करने से बांझपन की स्थिति में भी गर्भधारण की संम्भावना बढ़ जाती है।
  • पीपल के सूखे फलों के 1-2 ग्राम चूर्ण की फंकी कच्चे दूध के साथ पीरियड के खत्म होने बाद 14 दिन तक लेने से औरत का बांझपन मिट जाता है।
  • गर्भाधान के दिन से ही चावल, खीर, दूध, भात खाने के साथ ही रात को सोते समय शतावरी का चूर्ण दूध के साथ लेना चाहिए।
  • सुबह मक्खन और मिश्री मिलाकर एक एक चम्मच पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटना चाहिए और ऊपर से कच्चा नारियल और सौंफ खाना चाहिए। यह प्रयोग पूरे प्रेगनेंसी में जरूर करना चाहिए।
  • जो गर्भवती स्त्री पूरे 9 महीने तक नियमपूर्व रोजाना सुबह और शाम मक्खन मिश्री कालीमिर्च कच्चा नारियल और सौंफ का सेवन करती है। वह निश्चित ही बहुत ही गोरे और स्वस्थ संतान को जन्म देती है। भले ही उसका खुद का रंग गोरा ना हो।
  • आयुर्वेद में पूरे 9 महीनों में करने योग्य विधि विधान बताया है उसका पालन करना चाहिए .

गर्भावस्था में सावधानियां :

  • उस प्रकार के वयायाम भी नहीं करने चाहिए जो शक्ति से बाहर हो।
  • मल-मूत्र, प्यास और भूख के इच्छाओं को नहीं रोकना चाहिए।
  • अधिक ठन्डे , गर्म, तीक्ष्ण, गरिष्ठ आहार के सेवन से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। गर्भधारण की इच्छुक नारियों को उसे अपथ्य समझना चाहिए।
  • अधिक भोजन तथा अल्प भोजन भी स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं होता है।
  • दाम्पत्य जीवन को प्रसन्नता से चलाना चाहिए। शोक, क्रोध चिंता आदि नहीं करनी चाहिए।
  • अधिक रोना, हंसना, कूढ़ना, ईर्ष्या, रखना भी स्वयं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है|
  • ऐसे कारण जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रतिकूल हो उन्हें त्याग देना ही बेहतर होता है।

गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान सावधानिया

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.