कैंसर का होम्योपैथिक इलाज – Homeopathic Cure For Cancer In Hindi

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कैंसर का होम्योपैथिक इलाज - Homeopathic Cure For Cancer In Hindi

आज कई जानलेवा बिमारी हमारे जीवन में हो रही है, इसमें से कैंसर सबसे खतरनाक रोग है । हमारा शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है । यह कोशिकाएं हमारे शरीर की जरूरत के हिसाब से नियंत्रित रूप से विभाजित होकर बढ़ती रहती है । कई बार यह कोशिकायें आपके जरूरत न होने पर भी बढ़ने लगती है, इस प्रकार से कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना ही कैंसर कहलाता है ।

इस बिमारी में कोशिका अपना सामान्य निंयत्रण खो देती है और धीरे-धीरे इनका एक समूह बन जाता है | जो असामान्य रूप से बढ़ने लगता है और आस पास के अजेसन्ट उतकों पर आक्रमण कर देता है, इस प्रकार यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी पहुँच जाता है । कैंसर कोशिका शरीर के किसी भी उतक में विकसित हो सकती है । जब कोशिकाएं बढ़कर एक समूह बना लेती है, तो इस समूह को ट्यूमर कहा जाता है । कैंसर कोशिकाएं शरीर के किसी एक स्थान से शुरू होकर पूरे शरीर में फैलती जाती है । कैंसर कई प्रकार का हो सकता है, इनमें कुछ निम्न है….

इनके अलावा भी कई प्रकार के कैंसर है जो किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है । इसके पता लगाने के लिए बायोप्सी नामक परीक्षण किया जाता है । कैंसर तीन ग्रेड में होता है, इन ग्रेडों के द्वारा यह पता किया जाता है, कि ट्यूमर सेल्स नार्मल सेल्स से कितनी अलग है । कैंसर की ग्रेड निम्न प्रकार है…

  • पहली ग्रेड में कैंसर कोशिका आम कोशिकाओं के ही समान होती है, और यह बढ़ती रहती है ।
  • दूसरी ग्रेड में भी यह आम कोशिकाओं के समान होती है, परन्तु इनके बढ़ने की गति में अत्यधिक तेजी आ जाती है ।
  • तीसरी ग्रेड कैंसर कोशिका एब्नार्मल दिखाई देने लगती है और इस स्थिती में बचना असंम्भव होता है ।

इसके प्रकार –

  • कार्सिनोमा
  • सारकोमा
  • लिंफोमा और मायलोमा
  • ल्यूकेमिया

उपचार की विधियां –

  • सर्जरी
  • रेडिएशन थेरेपी
  • कीमोथेरेपी
  • इम्यूनोथेरेपी
  • हार्मोन थेरेपी
  • प्रेसिजन मेडिसन
  • होम्योपेथिक उपचार

कैंसर का होम्योपेथिक उपचार

रेडिएशन थैरेपी,कीमोथेरेपी और हर्मोंन थेरेपी जैसे पंरम्परागत कैंसर से कई प्रकार के दुष्प्रभाव पैदा होते है। होम्योपेथी उपचार से अन्य उपचारों से होने वाले दुष्प्रभावों पर नियंत्रण लाया जा सकता है । जिस प्रकार रेडिएशन थेरेपी में ‘टोपिकल केलेडुला’ का प्रयोग आरामदायक है, उसी प्रकार होम्योपेथी में ‘ट्राउमील एस माउथवाश’ का प्रयोग असरकारक है । आज कैंसर के होम्योपेथी उपचार के लिए वनस्पति, जानवर और धातुओं से प्राप्त 400 से भी अधिक दवाईयां उपयोग में ली जा रही है । होम्योपेथी उपचार अन्य उपचारो से सुरक्षित है और विश्वसनीय शोधों के अनुसार यह उपचार कैंसर के दुष्प्रभावों के लिए असरदायक है ।

यह आपकों उपचारों के समय होने वाली समस्या जैसे – बालो का झड़ना, कमजोरी, उल्टी आदि के प्रभावों को समाप्त कर देता हैं । इस उपचार में प्रयोग की जाने वाली औषधियाँ दर्द को तो कम करती है, उसके साथ आपके उत्साह व आपमें तंदुरस्ती को भी बढ़ाती है । यह औषधियाँ कैंसर के प्रसार को नियंत्रित कर हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है । यदि हम एलौपेथी उपचार का प्रयोग कर रहे है, फिर भी हम होम्योपेथी का एक पूरक के रूप में चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं । कैंसर के उपचार में होम्योपेथी में एंट्रसिनम, सिन्नामोनम, सिस्टक कैन, म्यूरेक्स आदि का प्रयोग आम है । कुछ प्रमुख दवाओं के बारे में जानकरी निम्न है…

कोनिसम – मैक

यह औषधी ब्रेस्ट कैंसर व ब्रेस्ट ट्यूमर दोनों में उपयोगी है, यह दवा ट्यूमर को नष्ट करने में लाभदायक मानी जाती है । ट्यूमर एक पत्थर समान कठोर पदार्थ होता है, जिसमें असहनिय दर्द होता है।

आर्सेनिक – एल्बम

यह कैंसर के लिए बहुत असरकारक दवा होती है, यह सीधे कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती है और कैंसर के प्रसार को भी रोकने का कार्य करती है । कैंसर होने पर मनुष्य के अंदर मौत व परिवार की चिंता को लेकर एक डर पैदा हो जाता है । यह दवा आपके अंदर उत्साह पैदा कर इस डर को भी खत्म कर देती है । यह शराब व धुम्रपान से होने वाले नुकसान को भी ठीक करती हैं।

थूजा

यह कोनिसम मैक की तरह ट्यूमर के लिए उपयोगी है, परन्तु यह किसी भी प्रकार के ट्यूमर में असरदायक होती है । यह औषधी बेक्सिन के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को खत्म कर देता है । ट्यूमर में इस प्रकार का दर्द होता है, जैसे कोई आपको किसी नुकीली चीज से नोच रहा हो यह उसको कम करती है |

साइलीसिया

यह किसी भी प्रकार के फ्रिबोस्ड या स्कार को ठीक करनें में सक्षम है। यह धीरे-धीरे अपना कार्य करती है जिससे इसे लम्बे समय तक प्रयोग करना पड़ता है |

दवाओं के प्रयोग में सावधानियाँ

इनके अलावा भी और कई दवाएं है, जिनका प्रयोग कैंसर के होम्योपेथी उपचार में होता है । इस प्रकार की दवाओं के सेवन से पहले इनके प्रयोग की सावधानियों को देख लेना चाहिए ।

  • होम्योपेथी उपचार में प्रयोग होने वाली दवाओं को हमेशा ठडें स्थान पर ही रखें और इन दवाओं के डिब्बे के ढक्कन को अच्छी तरह बंद कर दें ।
  • कई लोग दवाओं को हाथ में ले कर न खाएं इस प्रकार से दवा खाने पर उनका असर खत्म हो जाता है । इसलिए उन्हें उस दवा के ढक्कन से ही खाएं ।
  • दवा को खाने के पहले आधा घटें पहले और बाद में किसी भी प्रकार का भोजन न करें ।
  • इन दवाओं के सेवन करते समय आप शराब धुम्रपान व अन्य विषैले पदार्थो के सेवन से दूर रहें ।
  • होम्योपेथी दवाओं में आपको प्याज, लहसून और वादी वाले खाद्य पदार्थो के सेवन से परहेज करना पड़ता है । यदि ऐसा न किया जाए तो दवा का असर कम हो जाता है ।

बचाब के लिए सावधानियाँ

हमारे देश में कैंसर होने का मुख्य कारण तंबाकू है, कई लोग इसे खाते है और कई धुम्रपान के जरिए लेते है । यह जरूरी नहीं कि आप धुम्रपान करते है तब ही आपको कैंसर होगा इसके धुयें को लेने से भी कैंसर हो सकता है । कैंसर का खतरा प्रदुषित हवा में अधिक बढ़ जाता है । तंबाकू में 45 तरह के कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाए जाते है । इसमें कार्सिनोजेन्स नामक तत्व पाया जाता है, जो कैंसर पैदा करता है, इसलिए इसके सेवन से दूर रहें।
( और पढ़े – कैंसर के भारत में कुछ विशेष अस्पताल )

  • यदि आप एक संतुलित आहार लेते है, तो शराब का उचित मात्रा में सेवन सही है । परन्तु आप यदि अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते है, तो यह कैंसर का कारण हो सकता है ।
  • अधिकतर महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम बात है । इस लिए स्तन में हो रही किसी भी समस्या की डॉक्टर से सलाह लेते रहे ।
  • यूआईसीसी के शोध के अनुसार मांसाहारी भोजन करने वालों में कैंसर की अधिकता पायी जाती है ।
  • कई बार वायरस और बैक्टीरिया के कारण कैंसर का खतरा रहता है । ह्युमन पैयिलोगा वायरस से सार्वइकल कैंसर होता है, इसलिए यौन संबंध बनाते समय सावधानी रखें ।
  • हमेशा संतुलित आहार का सेवन करें और नियमित रूप से योग करें ।

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