एच.आई.वी. एड्स का सफल इलाज 2019 – HIV AIDS 2019 in Hindi

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एचआईवी
हिव  या HIV का इलाज २०१९ मे कुछ नया इलाज आया कि नहीं इसको हम जानेगे सबसे पहेले हम इसके बारे जानते है HIV का  पूरा नाम ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस एचआईवी है। यह एक लेंटिवायरस (रेट्रोवायरस परिवार का एक सदस्य) है, जो अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम एड्स AIDS का कारण बनता है जो कि मनुष्यों में एक अवस्था है, जिसमें प्रतिरक्षा तंत्र विफल होने लगता है और इसके परिणामस्वरूप ऐसे अवसरवादी संक्रमण हो जाते हैं, जिनसे मृत्यु तक का खतरा होता है। एचआईवी (HIV) का संक्रमण रक्त के अंतरण, वीर्य, योनिक-द्रव, स्खलन-पूर्व द्रव या मां के दूध से होता है। इन शारीरिक द्रवों में, एचआईवी (HIV) मुक्त जीवाणु कणों और प्रतिरक्षा कोशिकाओं के भीतर उपस्थित जीवाणु, दोनों के रूप में उपस्थित होता है

एच. आई. वी. के फैलने के चार मुख्य मार्ग

एच. आई. वी.  के संचरण के चार मुख्य मार्ग हैं

  1. असुरक्षित यौन संबंध
  2. संक्रमित सुई
  3. माँ का दूध, और
  4. किसी संक्रमित माँ से उसके बच्चे को जन्म के समय होने वाला संचरण (उध्र्व संचरण)

किसी मनुष्य में एच आई वी का पता लगाने के लिए रक्त उत्पादों की जांच करने के कारण  रक्ताधान अथवा संक्रमित रक्त उत्पादों के माध्यम से होने वाला संचरण विकसित बड़े पैमाने पर कम हो गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (world health organization) डब्ल्यू. एच. ओ.   के द्वारा मनुष्यों में होने वाले एच आई वी संक्रमण को महामारी मन गया है। इसके बावजूद, एचआईवी (HIV) के बारे में वयाप्त परितोष एचआईवी (HIV) के जोखिम में एक मुख्य भूमिका निभा सकता है।  एड्स की खोज 1981 में कई गई थी। 1981 से लेकर 2006 तक एड्स 25 मिलियन मनुष्यों की मौत का कारण बन गया है । विश्व की लगभग 0.6% जनसंख्या एच. आई. वी. (HIV) रोग से संक्रमित है।

एक अनुमान के मुताबिक, केवल 2005 में ही एड्स (AIDS) ने लगभग 2.4–3.3 मिलियन लोगों की मौत का कारण बनी है , जिनमें 570,000 से अधिक बच्चे थे। इनमें से एक-तिहाई मौतें उप-सहाराई अफ्रीका में हुईं, जिससे आर्थिक विकास की गति मंद हो गई और गरीबी में बढ़ोत्तरी हुई। वर्तमान आंकड़ो के अनुसार, एचआईवी (HIV) अफ्रीका में 90 मिलियन लोगों को संक्रमित करने को तैयार है,

जिसके चलते अनुमानित रूप से कम से कम 18 मिलियन लोग अनाथ हो जाएंगे। एंटीरेट्रोवायरल उपचार एचआईवी (HIV) की मृत्यु-दर और रुग्णता-दर दोनों को कम करता है, लेकिन सभी देशों में एंटिरेट्रोवायरल दवाओं तक नियमित पहुंच उपलब्ध नहीं है। सबसे पहले एच आई वी (HIV)  मनुष्य की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक प्रणाली की आवश्यक कोशिकाओं, जैसे सहायक टी – कोशिकाएं (helper T – cell) (विशिष्ट रूप से, सी डी 4+ कोशिकाएं ) मैक्रोफेज और डेंड्रॉएटिक कोशिका को संक्रमित करता है ।

एचआईवी (HIV) संक्रमण के फलस्वरूप सीडी4+ टी (CD4+ T) के स्तरों में कमी आने की तीन मुख्य कार्यविधियां हैं: सबसे पहले, संक्रमित कोशिकाओं की प्रत्यक्ष जीवाण्विक समाप्ति; दूसरी, संक्रमित कोशिका में एपोप्टॉसिस की बढ़ी हुई दर; और तीसरी संक्रमित कोशिका की पहचान करने वाले सीडी8 (CD8) साइटोटॉक्सिक लिम्फोसाइट द्वारा संक्रमित सीडी4+ टी कोशिकाओं (CD4+ T cells) कीखत्म हो जाना। जब सीडी4+ टी (CD4+ T) कोशिकाओं की संख्या एक आवश्यक स्तर से नीचे गिर जाती है, तो कोशिका की मध्यस्थता से होने वाली प्रतिरक्षा समाप्त हो जाती  है और शरीर के अवसरवादी संक्रमणों से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ने लगती है।

अधिकांश अनुपचारित लोगों में, जो एच आई वी – 1  (HIV -1) जे द्वारा संक्रमित हैं, अंततः उनमें एड्स विकसित हो जाता है। इनमें से बहुतायत से बहुतायत लोगों की मृत्यु  अवसरवादी संक्रमणों से या शरीर की प्रतिरोधक क्षमता केई बढ़ती विफलताओ से जुड़ी असाध्यताओ के कारण होती है। एच आई वी (HIV ) का  एड्स (AIDS) में विकसित होने की दर अलग – अलग होती है और इस पर जीवाण्विक, मेज़बान और वातावरणीय कारकों का प्रभाव पड़ता है; अधिकतर लोगों में एचआईवी (HIV) संक्रमण के 10 वर्षों के भीतर एड्स (AIDS) विकसित हो जाएगा

कुछ लोगों में यह बहुत ही शीघ्र होगा और कुछ लोग बहुत अधिक लंबा समय लेंगे। एंटी-रेट्रोवायरल के द्वारा उपचार किये जाने पर एचआईवी (HIV) संक्रमित लोगों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। 2005 तक के मुले आंकड़ों के अनुसार, निदान किये जा सकने योग्य एड्स (AIDS) के रूप में एचआईवी (HIV) का विकास हो जाने के बाद भी एंटीरेट्रोवायरल उपचार के बाद व्यक्ति का औसत उत्तरजीविता-काल 5 सालों से अधिक होता है। एंटीरेट्रोवायरल उपचार के बिना, एड्स (AIDS) से ग्रस्त किसी व्यक्ति की मृत्यु विशिष्ट रूप से एक साल  के अंदर ही हो जाती है।

एच आई वी (HIV) एड्स  (AIDS) के संकेत व लक्षण

मूल प्रकार से एच आई वी  (HIV) के चार चरण होते हैं — उष्मायन काल, तीवर संक्रमण, विलंब चरण और एड्स (AIDS)।

पहला चरण

संक्रमण के बाद के प्रारंभिक उष्मायन काल लक्षणविहीन होता है और इसकी अवधि सामान्यतः दो से चार सप्ताह तक होती है।

दूसरा चरण

दूसरा चरण , तीवर संक्रमण है , जो औसतन 28 दिनों तक चलता है और इसमें बुखार, लिंफैडेनोपैथी (lymphadenopathy) (लसिका ग्रंथि में सूजन), फैरिंजाइटिस (pharyngitis) (गले में खराश), फुंसी, पेशीशूल (मांसपेशियों में दर्द), बेचैनी और मुंह तथा भोजन-नली में घाव जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।

तीसरा चरण

विलंबता चरण, जो कि तीसरा चरण है। इसमें या तो बहुत कम लक्षण प्रदर्शित होते हैं या कोई लक्षण दिखाई नहीं देता इसके साथ ही यह चरण दो सप्ताह से लेकर बीस साल या उससे भी अधिक समय तक चल सकता है।

चौथा चरण

एचआईवी (HIV) संक्रमण का चौथा एवम अंतिम चरण एड्स (AIDS) विभिन्न अवसरवादी संक्रमणों के लक्षणों जैसे ही लक्षण प्रदर्शित करता है।

फ्रांसीसी अस्पताल के मरीज़ों के केस स्टडी में यह पाया गया कि एचआईवी-1 (HIV-1) से संक्रमित व्यक्तियोंमें से लगभग 0.5% व्यक्ति किसी एंटी-रेट्रोवायरल उपचार के बिना भी सीडीआर4 टी-कोशिकाओं (CD4 T-cells) के उच्च स्तर और एक निम्न अथवा चिकित्सीय रूप से न पहचाना जा सकने वाला जीवाण्विक भार बनाए रखते हैं। इन व्यक्तियोंको एचआईवी (HIV) नियंत्रकों या लंबी-अवधि के गैरविकासकों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

HIV AIDS से बचने के उपाय

वर्तमान समय में HIV को रोकने के लिए बहुत से उपचार उपलब्ध हैं। परहेज के अलावा, कम लोगों के साथ यौन सम्बन्ध बनाना, उपयोग में लाई सुइयों को कभी भी दोबारा उपयोग नहीं करना और हर बार जब आप यौन संबंध बनाते हैं, तो कंडोम का सही तरीके से उपयोग करते हुए, आप नई दवाओं जैसे पूर्व-एक्सपोज़र प्रॉफीलैक्सिस (पीआरईपी) pre-exposure prophylaxis (PrEP) और पोस्ट- एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) post-exposure prophylaxis (PEP) का फायदा ले सकते हैं, सुरक्षित यौन समबंन्ध ही सबसे कारगर HIV AIDS से बचने का तरीका है।

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