ह्रदय की संरचना, रोग, जाँच व दवा – Heart Structure And Disease In Hindi

रोग व इलाज

हृदय यानि दिल एक पेशीय अंग होता है | जो हमारे वक्ष के बाईं ओर दोनों फेफड़ों के बीच में स्थित होता है | ह्रदय का आकर हमारे हांथो की मुट्ठी के सामान होता है | जिसका वजन लगभग तीन सौ ग्राम होता है | व्यक्ति के ह्रदय के चारों ओर झिल्ली होती है | जिसको पेरीकार्डियम के नाम से जाना जाता है | इसी झिल्ली के कारण हमारा ह्रदय निरंतर सिकुड़ता और फैलता है |

इसी क्रिया के कारण हमारे सभी अंगों में रक्त का संचारण हो पाता है | एक सामान्य व्यक्ति का ह्रदय एक मिनट में 70 बार धड़कता है | प्रत्येक धड़कन में हृदय लगभग 70 मि.ली. रक्त पम्प करता है | यानि पूरे दिन भर में हमारा ह्रदय 8-10 हजार लीटर रक्त पम्प करता है | जिससे हमारे शरीर को ठीक रूप से काम करने व स्वस्थ रहने में मदद मिलती है | दोस्तो आइये जानते है ह्रदय की संरचना के बारे में |

हार्ट की संरचना –

व्यक्ति का हार्ट कई चीजों से मिलकर बना होता है | हमारे ह्रदय में एक होता है जो हमारे शरीर में रक्त भेजने का कार्य करता है | इस पम्प के दो भाग होते है, दायां व बायां | यह दोनों भाग मांस के एक पतले परदे के द्वारा अलग – अलग होते है | इस परदे को सेप्टम  कहा जाता है | इसी सेप्टम के कारण रक्त दोनों पम्पों में नही जा पाता है | सेप्टम के कारण ही दोनों पम्प अलग अलग रूप से काम कर पाते है |

हमारे पूरे शरीर का रक्त इस के दायें भाग वाले पम्प में आता है | फिर हमारे फेफड़ों में जाता है, फिर हमारे फेफडे इस रक्त को लेकर पूरे शरीर में भेजने का काम करते है | हमारे ह्रदय के ऊपरी भाग को एट्रियम कहा जाता है | क्योंकि शरीर रक्त को इसी भाग के द्वारा ह्रदय से ग्रहण करता है| वही ह्रदय का दूसरा भाग जहा से रक्त फेफड़ों में पहुचाया जाता है | उसको वेन्ट्रिकल  के नाम से जाना जाता है |

हमारे हार्ट के ऊपरी भाग यानि एट्रियम की मांसपेशियां बहुत ही पतली होती है | क्योंकि इसको रक्त सम्बन्धी बहुत कम कार्य करना पड़ता है | वही वेन्ट्रिकल भाग की मांसपेशियां मजबूत व मोटी होती है | क्योंकि यह मांसपेशियां हमारे शरीर में रक्त पहुचाने का कार्य करती है | ह्रदय से फेफड़ों तक रक्त पहुचाने का कार्य ह्रदय में लगे वाल्व करते है | वाल्व के भी दो भाग होते है, पहला भाग एट्रियम और वेन्ट्रिकल के मध्य स्थित होता है |

वही दूसरा वाल्व वेन्ट्रिकल और धमनियों के बीच में होता है | एक पल्मोनरी वाल्व दाईं ओर एवं दूसरा एओर्टिक वाल्व बाईं ओर स्थित होता है |

जो रक्तवाहिनियां शरीर का कार्बन-डाईऑक्साइड युक्त रक्त वापस हमारे ह्रदय में लाती है , उनको शिराएं  कहा जाता है| यह काम दो प्रकार की शिराएं करती है , जिन्हें उर्ध्व महाशिरा या सुपीरियर वेना कावा तथा निम्न महाशिरा या इन्फीरियर वेना कावा के नाम से जाना जाता है|

फेफड़ों के द्वारा आया हुआ शुद्ध रक्त चार फुफ्फुसीय शिराओं या पल्मोनरी वेन्स द्वारा हृदय के बाएं एट्रियम में जाता है | बाएं एट्रियम के सिकुड़ने पर सारा रक्त माइट्रल वाल्व द्वारा हृदय के बाएं वेन्ट्रिकल में चला जाता है | यह प्रक्रिया व्यक्ति के पूरे जीवन भर चलती रहती है | दोस्तो आइये जानते है अब ह्रदय के कार्य के बारे में |

दिल का कार्य शरीर में :

मनुष्य का ह्रदय शरीर में रक्त को पम्प करने का कार्य करता है | यह हमारे फेफड़ों द्वारा आये शुद्ध रक्त को शरीर के प्रत्येक हिस्से में पहुचाने का कार्य करता है | इसके साथ साथ ह्रदय का कार्य रक्त पम्पिंग समय को नियंत्रित करना व गति को नियमित रखना और हृदय के विभिन्न भागों में संतुलन बनाये रखने का होता है|

इसी संतुलन के कारण ही हमारे शरीर की सभी मांसपेशियां सही रूप से फ़ैल व कार्य करने में सक्षम हो पाती है | हृदय की प्रत्येक धड़कन विद्युत स्पन्द द्वारा हृदय के दाएं एट्रियम में उर्ध्व महाशिरा या सुपीरियर वेना कावा के संगम के समीप हृदय पेशी में स्थित एक गोलाकार रचना साइनो एट्रिअल नोड द्वारा पैदा होती है |

जब हृदय की मांसपेशियां शिथिल होती हैं, तो एओर्टिक वाल्व और पल्मोनरी वाल्व बन्द हो जाते हैं | इस टाइम धमनियों का दाब सबसे कम हो जाता है,  जिसको डायस्टोलिक  कहा जाता है | डायस्टोलिक समय में माइट्रल वाल्व और ट्राइकसपिड बल्व खुले रहते है | जिससे हृदय के वेन्ट्रिकल कोष्ठ रक्त से भर जाते हैं | अनुशिथिलन के बाद एट्रियम सिकुड़ते हैं, ताकि वेन्ट्रिकल रक्त से भर जाएं |

दोस्तो आइये जानते है ह्रदय में होने वाले रोग के बारे में |

हार्ट रोग क्यों होता है ?

ह्रदय रोग व्यक्ति हृदय को बहुत बुरी तरह से प्रभावित करते है | यह रोग केवल हमारी गलत आदतों की वजह से हमारे शरीर को प्रभावित करते है | WHO की रिपोर्ट के अनुशार हर साल पूरी दुनिया में लगभग पचास लाख लोग इससे जुडी समस्या के कारण अपनी जान गवां देते है | अगर भारत की बात करे, तो भारत में ही हर साल दस लाख लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते रहते है | इसीलिए अगर आपको भी इस प्रकार की कोई समस्या है, तो अपने समस्या का पूर्ण उपचार जरुर करवाये |

आइये जानते है ह्रदय में होने वाले रोग के बारे में :

  • हार्ट अटैक
  • एनजाइना
  • कोरोनरी धमनी की बीमारी
  • अनियमित दिल की धड़कन की परेसानी
  • एथेरोस्क्लेरोसिस
  • हृदय वाल्व रोग
  • दिल में छेद की समस्या
  • रूमैटिक हार्ट डिजीज |
  • बाहरी धमनी की बीमारी |
  • कार्डियोमायोपैथी की परेसानी
  • रक्त धमनी का रोग

ह्रदय रोग को चिकित्सीय भाषा में कार्डियोवास्कुलर रोग  के नाम से भी जाना जाता है | कार्डियोवास्कुलर रोग के कारण कभी कभी व्यक्ति की जान भी चली जाती है |

दोस्तों आइये जानते है ह्रदय रोग होने पर शरीर में दिखाई देने वाले लक्षणों के बारे में |

 ह्रदय रोग के लक्षण

  • सीने में भारीपन महसूस होना |
  • सीने में दर्द की अप्रेसनी होना |
  • जल्दी थकान व कमजोरी महसूस करना |
  • साँस फूलने की समस्या |
  • धड़कन का तेजी से चलना |
  • सीने में सुजन आना |
  • अधिक चिंता होना |
  • सीने में दर्द के साथ साथ खांसी आना |

 ह्रदय रोग के मुख्य कारण

हार्ट के रोग के कारण केवल हार्ट के रोग के प्रकार व चरण पर ही निर्भर करता है | क्योंकि सभी ह्रदय रोग के अलग अलग कारण होते है |

दोस्तों आइये जानते है ह्रदय रोग के कारणों के बारे में :

  • अस्वस्थ आहार का सेवन करने से |
  • मोटापे की समस्या के कारण |
  • अधिक धूम्रपान करने के कारण |
  • जन्मजात समस्या की वजह से |
  • उच्च रक्तचाप के कारण |
  • शुगर यानि मधुमेह की वजह से |
  • दवा का अधिक सेवन करने के कारण |
  • तनाव ग्रस्त रहने से |

इन सभी के कारणों के कारण मनुष्य हार्ट के रोग की समस्या से ग्रस्त हो जाता है | दोस्तो अगर सही समय पर ह्रदय रोग का इलाज ना कराया जाये | तो इन रोगों को गंभीर होते समय नही लगता है | जिससे मरीज की जान जाने का भी खतरा रहता है | जैसे ही आपको अपने शरीर में ह्रदय रोग के लक्षण नज़र आये तो डॉक्टर से जरुर संपर्क करे |

दोस्तों आइये जानते है ह्रदय रोग की जांचों के बारे में |

जाँच

हार्ट रोग की जाँच उसके प्रकार को देख कर ही की जाती है | जिससे मरीज को पूर्ण उपचार दिया जा सके , क्योंकि जाँच के बाद ही डॉक्टर सही रूप से इलाज कर पाते है |

दोस्तों आइये जानते है ह्रदय से जुडी कुछ जाँच के बारे में :

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम यानि ईसीजी जाँच

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम व्यक्ति के शरीर में विद्युत संकेतों को रिकॉर्ड करता है | तथा यह मरीज के दिल की लय और संरचना में अनियमितता का पता लगाने में भी मदद करता है | यह टेस्ट आराम व कसरत करते समय भी किया जा सकता है |

हॉलटर मॉनिटरिंग जाँच

हॉलटर मॉनिटरिंग एक ऐसा उपकरण होता है, जिसके द्वारा ईसीजी जाँच संभव हो पाती है | हॉलटर मॉनिटरिंग का प्रयोग हृदय की लय की अनियमितताओं का पता लगाने में किया जाता है|

इकोकार्डियोग्राम जाँच

इकोकार्डियोग्राम जाँच के द्वारा व्यक्ति के सीने  द्वारा ह्रदय का अल्ट्रासाउंड किया जाता है | इकोकार्डियोग्राम व्यक्ति के हार्ट के संरचना और कार्य के विस्तृत चित्र को दिखाता है |

कार्डिएक कैथेराइज़ेशन जाँच

कार्डिएक कैथेराइज़ेशन परीक्षण को करते समय डॉक्टर मरीज के पैर व हांथ के द्वारा एक लम्बी लचीली ट्यूब धमनी डाली जाती है | जिसको एक्स-रे के द्वारा ह्रदय तक पहुचाते है |

कार्डिएक सीटी स्कैन जाँच

यह जाँच अक्सर दिल में होने वाली परेसानी की जाँच के लिए किया जाता है | कार्डिएक सीटी स्कैन के द्वारा मरीज के पूरे शरीर की जाँच की जाती है | कार्डिएक सीटी स्कैन के द्वारा मरीज के ह्रदय को देखा जाता है, जिससे उसके इलाज के बारे में पता चल सके |

कार्डिएक एमआरआई जाँच

कार्डिएक एमआरआई के द्वारा मरीज को एक मेज पर एक लंबी ट्यूब की तरह मशीन पर लेटाते है | यह मेज चुंबकीय क्षेत्र बनाती है, जिससे ह्रदय का मूल्यांकन किया जाता है |

इस रोग की दवा :

हार्ट रोग होने पर अक्सर डॉक्टर कुछ दवा लेने की सलाह देते है | दोस्तों आइये जानते है, उन दवाओं के बारे में लेकिन आपको इस दवा का सेवन करने से पहले एक बारे अपने डॉक्टर से भी सलाह जरुर ले लेनी चाहिये |

नाम                        पॉवर                        मूल्य
Aova                   10MG                     38.00
Arbitel Av         10MG                   127.00
Avas Ez              10MG                   148.00
Avastin              10MG                     55.00
Zantor               10MG                     75.00
Xirtam               20MG                     76.00
Triolsertain     20MG                     52.00
Vagator             10MG                      63.00
Storfib              145MG                   173.00
Stamcor           10MG                       69.00

ह्रदय रोग की आयुर्वेदिक दवा :

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