ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद का सरल इलाज

काला मोतियाबिंद का सरल इलाज – Kala Motiyabind Treatment In Hindi

रोग व इलाज

काला मोतियाबिंद को ही ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है | ग्लूकोमा आँखों में होने वाली एक गंभीर बीमारी होती है | ग्लूकोमा हमारी ऑप्टिक नर्व पर दबाव डालती है | हमारी ऑप्टिक नर्व ही किसी भी वस्तु या चित्र को हमारे दिमाग तक पहुचाती है | ग्लूकोमा का अगर सही समय पर इलाज ना कराया जाये | तो हमारी आँखों पर पड़ने वाला इंट्रा-ऑक्युलर प्रेशर हमारे ऑप्टिक नर्व नष्ट कर सकता है | जिससे व्यक्ति हमेशा के लिये अँधा हो सकता है | यह समस्या अधिकतर अधिक उम्र के लोगो में पाई जाती है | शुरुआत में ग्लूकोमा का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है | भारत में ही लगभग दो करोड़ से अधिक लोग ग्लूकोमा यानि काला मोतियाबिंद के शिकार है | अगर व्यक्ति सही खानपान का सेवन ना करे | तो एक उम्र बाद वह इस बीमारी से जरुर ग्रस्त हो जाता है | ग्लूकोमा कई प्रकार का होता है | अब आइये जानते है इसके प्रकार के बारे में


जाने काला मोतियाबिंद के प्रकार के बारे में

क्रोनिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा – क्रोनिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा सबसे सामान्य रूप होता है | जिसमे व्यक्ति के आँख के अंदरूनी हिस्से पर दबाव बढ़ने लगता है |

एक्यूट ग्लूकोमा – एक्यूट ग्लूकोमा में व्यक्ति की आँखों पर तेजी से दवाव पड़ता है | एक्यूट ग्लूकोमा का पता बहुत आसानी से लगाया जा सकता है | क्यूकि एक्यूट ग्लूकोमा में आँखों के तरल को बाहर निकालने वाली नलियाँ पूर्णरूप से बंद हो जाती है |

तनाव ग्लूकोमा – तनाव ग्लूकोमा को निम्न तनाव या सामान्य प्रेशर ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है | इस समस्या में ऑप्टिक नर्व पर बिना दवाव के व्यक्ति की आँखों पर नुकसान पहुँचाता है |

जन्मजात ग्लूकोमा – जन्मजात ग्लूकोमा में आँख से असामान्य रूप से तरल पदार्थ निकलता रहता है | जिसके कारण ट्रबेक्युलर तंत्र ख़राब होने लगता है | जन्मजात ग्लूकोमा अनुवांशिक या फिर गर्भावस्था के दौरान जन्म ले सकता है |

सेकेंडरी ग्लूकोमा – सेकेंडरी ग्लूकोमा चार प्रकार के होते है |

पिगमेंटरी ग्लूकोमा – पिगमेंटरी ग्लूकोमा के द्वारा व्यक्ति की आँख पर तेज दवाव पड़ने लगता है |

सुडोएक्सफोलिएटिव ग्लूकोमा – सुडोएक्सफोलिएटिव ग्लूकोमा में व्यक्ति की आँख की तरल निकासी प्रणाली बंद हो जाती है |

ट्रॉमेटिक ग्लूकोमा – ट्रॉमेटिक ग्लूकोमा आँख की चोट की वजह से व्यक्ति के शरीर में जन्म लेता है |

नोवास्कुलर ग्लूकोमा – नोवास्कुलर ग्लूकोमा मधुमेह के द्वारा हमारे शरीर में जन्म लेता है |

जाने इसके चरणों के बारे में

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद के तीन चरण होते है |

प्रथम चरण – ग्लूकोमा के प्रतम चरण में व्यक्ति की दृष्टि पर कोई परिवर्तन नही आता है | क्यूकि इस चरण में व्यक्ति की आँख पर दवाव बहुत कम होता है |

दितीय चरण – ग्लूकोमा के दितीय चरण में व्यक्ति की नज़र बहुत कमजोर होने लगती है | पर दृष्टि का कमजोर बहुत धीमे चरण में होती है | इस वजह से व्यक्ति को इस समस्या का पता नही लग पाता है |

तीसरा या अंतिम चरण – ग्लूकोमा का अंतिम चरण बहुत जल्दी होता है | इस चरण में का व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो जाते है |

 इस कारणों के बारे में

ग्लूकोमा या काला मोतियाबिंद व्यक्ति के शरीर में कई कारणों की वजह से जन्म लेता है | जैसे

  • बुढ़ापे की वजह से |
  • मधुमेह व हाइपोथायरायडिज्म बीमारी के कारण |
  • आँखों में लगने वाली चोट की वजह से |
  • आँख की सर्जरी के कारण |
  • निकट दृष्टि दोष की वजह से |
  • डाइलेटिंग आईड्रॉप्स के कारण |
  • आँखों का अवरुद्ध हो जाना |
  • कॉर्टिकॉस्टिरॉइड्स की वजह से |
  • हाई ब्लड प्रेशर के कारण |
  • ऑप्टिक तंत्रिका में रक्त की कमी की वजह से |

यह समस्या केवल हमारी आँखों से निकालने वाले तरल निर्माण के बंद होने के कारण ही जन्म लेता है | अब आइये जानते है ग्लूकोमा के लक्षण के बारे में |

कैसे दिखते इसके लक्षण ?

ग्लूकोमा के लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करते है | क्यूकि सभी ग्लूकोमा के लक्षण अलग अलग होते है | जैसे
एंगल क्लोज़र ग्लूकोमा की समस्या होने पर व्यक्ति के शरीर में कई लक्षण नज़र आते है जैसे

  • आँखों में दर्द की समस्या का होना |
  • सिर में या फिर माथे में तेज दर्द की समस्या का होना |
  • आँखें लाल होने लगती है |
  • देखने में धुंधलापन आने लगता है |
  • रोशनी के चारों ओर रंग के छल्ले बने दिखते है |
  • जी मिचलाना की समस्या आती है |
  • उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ता है |

क्रोनिक ग्लूकोमा के लक्षण – क्रोनिक ग्लूकोमा की समस्या के शुरुआत में किसी भी प्रकार का कोई लक्षण दिखाई नही देता है | लेकिन जैसे जैसे यह रोग बढ़ता जाता है | वैसे वैसे व्यक्ति को ब्लाइंड स्पॉट्स की समस्या होने लगती है |

तनाव ग्लूकोमा के लक्षण – तनाव ग्लूकोमा की समस्या होने पर व्यक्ति की ब्लाइंड स्पॉट्स की समस्या आने लगती है | यह समस्या व्यक्ति की ऑप्टिक तंत्रिका की क्षति के कारण आती है |

इसका सरल इलाज

काला मोतियाबिंद या ग्लूकोमा की समस्या में होने वाली क्षति को ठीक नही किया जा सकता है | अगर ग्लूकोमा की पहचान शुरुआत में कर ली जाये | तो कुछ उपचार के द्वारा दृष्टि को पहुचने वाली हानि से बचाया जा सकता है | तो आइये जानते है ग्लूकोमा से जुड़े कुछ आसान व सरल इलाज के बारे में

आईड्रॉप्स से बचा सकते है दृष्टि को

आईड्रॉप्स के द्वारा हम अपनी आँखों की तरल निकास प्रणाली को सुधार सकते है | क्यूकि आईड्रॉप्स हमारी आँखों द्वारा उत्पन्न किये जाने वाले तरल की मात्रा को कम करने में हमारी मदद करता है | जिससे हमारी आँखों पर दबाव कम होने लगता है |

प्रोस्टाग्लैंडिंस के द्वारा बचा सकते है अपनी आँखों की दृष्टि

प्रोस्टाग्लैंडिंस के द्वारा हम अपनी आँखों से निकालने वाला तरल बहाव अधिक कर देता है | इसकी वजह से हमारी आँखों पर दवाव कम हो जाता है | आपको इस समस्या को कम करने के लिए लतानोप्रोस्ट या फिर बीमाटोप्रोस्ट को प्रयोग कर सकते है |

अल्फा-एड्रेनेर्गिक अगोनिस्ट्स का प्रयोग भी फायदेमंद होता है

अल्फा-एड्रेनेर्गिक अगोनिस्ट्स हमारी आँख के लेन्स और कॉर्निया के बीच बनने वाले तरल पदार्थ को बहुत कम करते है | और हमारी आँख द्वारा तरल के बहाव अधिक कर देता है | जिससे हमारी आँख पर किसी भी प्रकार का कोई दवाव नही पड़ता है |

सर्जरी के द्वारा हम अपनी इस समस्या का उपचार कर सकते है

अगर किसी व्यक्ति की आँखों की जलनिकासी प्रणाली बंद हो जाये | तो डॉक्टर तरल पदार्थ की निकासी के लिए जल निकासी पथ बनाने वाले ऊतकों को नष्ट करने के लिए सर्जरी और अन्य उपचारों की सलाह दे सकते हैं | जैसे की

  • लेज़र थेरेपी की सलाह |
  • ड्रेनेज ट्यूब की सलाह |
  • इलेक्ट्रोकॉटरी करने की सलाह |
  • लेज़र पेरिफेरल इरिडोटमी कराने की सलाह |

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