फूड़ पाइॅजनिंग के कारण व उपचार – Food Poisoning In Hindi

फूड़ पाइॅजनिंग के कारण जानने से पहले यह जनना जरूरी है कि हमारे जीवन के लिए जल और भोजन दोनों अति आवश्यक है, परन्तु जब हम भोजन को लापवरवाही और गदें तरीके से ग्रहण करते है, तो यह हमारे लिए हानिकारक होता है । इससे हमें फूड़ पाइजनिंग जैसी समस्या हो सकती है, इसे ‘फूड़बोर्न इलनेस’ के नाम से भी जाना जाता है । जब हम किसी प्रकार का दुषित खाद्य पदार्थ जिसे किसी सक्रांमक जीव जैसे बैक्टीरीया, वायरस और परजीवी ने दूषित किया हो ग्रहण करते तो फूड़ पाइॅजनिंग होता है । इसके होते ही आपको कुछ घंटो बाद ही उल्टी, दस्त और मतली होना शुरू हो जाता है । यदि इसका उचित इलाज लिया जाए तो यह बिमारी एक-दो दिन में सही हो जाती है, परन्तु इलाज न लेने पर पेट से संबधित कई बिमारियाॅं हो सकती है या जान भी जा सकती है ।

हमारा भोजन किस प्रकार बनाया गया है, उसे किस प्रकार रखा गया है आदि कारणों से भोजन दूषित होता है । अधिकतर भोजन दूषित होने का प्रमुख कारण क्राॅस कोंटामिनेशन माना जाता है, इस प्रकिया में जीव एक सतह से किसी अन्य सतह पर फैलता रहता है । ज्यादातर यह बिना पकाए हुए खाद्य पदार्थाे में होेेता है । फूड़ पाइॅजनिंग निम्न जीवों द्वारा फैलता है :

  • बैक्टीरीया- इ. कोली, लिस्टेरिया, साल्मोनेला आदि।
  • परजीवी- पैरासाइट्स आदि।
  • वायरस- नोरोवायरस, सोपोवायरस, रोटोवायरस, एस्ट्रोवायरस आदि।

फूड़ पाइॅजनिंग के कारण :

  • किसी प्रकार का दुषित भोजन ग्रहण करने से।
  • बासा खाना खाने से |
  • खाना को बनाते समय दूषित और गंदे पानी को प्रयोग करने से |
  • सब्जियों और फलों को सेवन से पहले अच्छे से साफ़ न करने से |
  • गंदे हाथो से खाना खाने से |
  • जब हमारे द्वारा खाना बनाया या उसे साफ किया जाता है,तो दूषित जल का प्रयोग करने से।
  • खाने को ढक कर न रखने से  उसमे मक्खी के बैठने से हानिकारक जीव पहुचॅं जाते है, व खाना दूषित हो जाता है।
  • अधिकतर रास्ते मे स्थित कई ढाबे या होटलों में खाने के पदार्थ को अच्छे प्रकार से ढककर नहीं रखा जाता जिसके कारण सड़क के किनारे उड़ने वाले धुल के कण खाने में पहुॅंच जाते है, कई प्रकार के कीट भी उसमें बैठ जाते है व खाने को दूषित कर देते है।
  • कई बार हम अपने पानी रखने वाले बर्तन को कई दिनों तक साफ नहीं करते जिससे वह दूषित हो जाता है और हम उस पानी का प्रयोग कई प्रकार से करते है।
  • आज वातावरण इतना प्रदूषित है,और हम जब बिना हाथ को साफ किए खाद्य पदार्थो का सेवन करते है वह भी फूड पाइॅजनिंग को बढावा देता है।
  • कई दिनों से फ्रिज में रखा हुआ भोजन जो कि दूषित हो चुका है,उसके सेवन से।
  • खाने के पहले ब्रश न करना या मुहॅं को अच्छे तरीके से साफ न करने से।

यह सभी कारण फूड पाइॅजनिंग के कारण है, इन सभी कारणों से फूड पाइॅजनिंग होती है। अब हम आपको इसके लक्षणों के बारे में जानकारी देते है।

इस रोग के होने के लक्षण :

  • फूड पाइॅजनिंग होने के कुछ समय बाद ही आपको पेट में बहुत तेज दर्द व ऐंठन शुरू हो जाती है। ( और पढ़े – पेट दर्द का उपचार )
  • इसके बाद आपको हर 15 से 20 मिनट के अंतराल में बार बार उल्टी होना शुरू हो जाती है। ( और पढ़े – उल्टी का उपचार )
  • कुछ समय के बाद उल्टी के बाद लूज मोशन भी शुरू हो जाता है।
  • फूड पाइॅजनिंग होने के बाद आपके द्वारा कुछ भी खाया हुआ पचता नहीं है,और खाने के बाद तुरतं उल्टी के माध्यम द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।
  • शरीर में खाना न होने के कारण अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है,और बेचेनी शुरू हो जाती है।
  • आखों के सामने धीरे-धीरे थोड़ा सा धुंधलापन आने लगता है। ( और पढ़े – आँखों को स्वस्थ रखने के उपाय )
  • शरीर में  कमजोरी के कारण तेज सिरदर्द होना ,बिना काम किये थकावट, चक्कर आदि आने लगते है।

इन सभी प्रकार के लक्षणोें का पता चलते ही अपने नजदीकी चिकित्सालय में जाकर उपचार प्राप्त करें। फूड पाॅइजनिंग के उपचार निम्न है।

 इस रोग के उपचार :

  • सर्वप्रथम अगर चिकित्सालय दूर है,तो जितना हो सके तरल पदार्थो जैसे-पानी,डिकैपफनेटेड चाय,जूस आदि को ग्रहण करते रहे जिससे निर्जलीकरण को रोकने में मदद मिलती है।
  • तुलसी, सौंफ, जीरा, धनिया जैसे कई प्रकार के हर्बल का सेवन करें।
  • जितना संभव हो उतना आराम करें और एक जगह लेटे रहे।
  • चिकित्सक के पास पहुॅंचते ही वह आपके नैदानिक टेस्ट एंव मल की जाॅंच कर यह देखता है, कि आपको फूड पाॅइजनिंग है या नहीं । अगर है तो इसका उपचार लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।
  • इसमें दस्त-उल्टी के कारण शरीर से कई मिनरल्स जैसे सोडियम,पोटेशियम व कैल्शियम बाहर निकल जाते है। इनकी पूर्ती के लिए वह नसों के द्वारा शरीर में प्रवेश कराया जाता है, जो डिहाइड्रेशन को रोका जाता है।
  • यदि मरीज को फूड पाॅइजनिंग किसी बैक्टिेरिया के कारण हुआ है, और वह गंभीर है तो उसे एंटीबायोटिक्स लेने को कहा जाता है।
  • यदि आपको नाॅर्मल फूड पाॅइजनिंग है, और उल्टी-दस्त में खुन नहीं आ रहा है तो लेपेरामाइड या विसमथ सबसेनीसिलेट नामक एंटिबायोटिक दिया जाता है।
  • यदि व्यक्ति गंभीर हालत में है,तो उसे अस्पताल में भर्ती करके इंद्रावेनस एंटीबायोटिक के द्वारा इलाज दिया जाता है।

इन सभी उपचार के बाद आप एकदम स्वस्थ्य हो जाएगें। इन सबसे बचने के लिए निम्न सावधानियाॅं अपनानी चाहिए।

इससे बचने के घरेलु उपाय –

फ़ूड पॉईजनिंग की समस्या को आसान से घरेलु उपायों को प्रयोग करके दूर किया जा सकता है | तो आइये जानते है फूड पॉइजनिंग को दूर करने के कुछ आसान से घरेलू उपाय…

ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन –

फूड पॉइजनिंग  को समस्या होने पर शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए इसके लिए तरल पदार्थो जैसे सूप, चावल का पानी, नारियल पानी, खिचड़ी, ग्लूकोज, एलेक्ट्रोल और पानी को बार बार पीते रहे |

अदरक का रस –

अदरक खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के काम करता है | अदरक के एक चमच्च रस में शहद की कुछ बूंदे मिलाकर सेवन करने से फूड पॉइजनिंग के समय होने वाले पेट दर्द में आराम मिलता है |

जीरा का प्रयोग –

फूड पॉइजनिंग में जीरे का प्रयोग लाभकारी होता है, एक चमच्च जीरे को अच्छे से भूनकर पीस ले अब इस पाउडर को सूप में मिलाकर पीने से पेट की सूजन और दर्द कम हो जाता है |

तुलसी के पत्तो का रस –

तुलसी में संक्रमण को दूर अकरने वाले गुण बहुत ही अच्छी मात्रा में पाए जाते है | फूड पॉइजनिंग के संक्रमण को खत्म करने के लिए तुलसी के पत्तो के रस में शहद मिलाकर पीने से जल्द फायदा मिलता है |

केला का मैश –

केले में पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे फूड पॉइजनिंग के समय लगने वाले दस्त को रोकने के लिए केले के मैश को दही में मिलाकर खाने से फायदा मिलता है |

नींबू पानी का प्रयोग –

नींबू का सेवन फूड पॉइजनिंग में बहुत ही लाभकारी होता है, फूड पॉइजनिंग की समस्या में एक गिलास पानी में नींबू के रस में नमक और चीनी को मिलाकर पीले इस घोल को हर एक घंटे के अंतराल में लेते रहे बहुत फायदा मिलता है |

दही का प्रयोग –

दही में पाए जाने वाले एंटी – बैक्टीरिया गुणों की कारण यह लीवर में होने वाले संक्रमण को दूर करने में मदद करता है | फूड पॉइजनिंग से ग्रसित मरीज को खाली पेट दही का सेवन लाभदायक होता है |

खिचड़ी का सेवन –

फूड पॉइजनिंग से ग्रसित मरीज को ठोस आहार के स्थान पर तरल आहार जैसे खिचड़ी देना चाहिए | यह बहुत हल्का आहार होता है जिससे आसानी से पाच जाता है |

फूड़ पाइॅजनिंग के समय बरतें सावधानियाॅं :

  • खाना बनाने के पहले और बाद में भी अपनें हाथो को अच्छी तरीके से साफ करें।
  • जब भी आप हरी सब्जियाॅं बनाए तो उसे अच्छे पानी से धो लें।
  • खाने को हमेशा अच्छे से पकाॅंए क्योंकि इससे उसके विषैले तत्व नष्ट हो जाते है।
  • कई दिनों से रखा हुआ भोजन न खाॅंए और न ही बिना ढका खाॅंए।
  • ट्रेवल के द्वोरान हमेशा अगर हो सके तो घर का ही खाना ले के जाए।