अधिक खाने का विकार का इलाज – Eating Disorder in Hindi

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Eating Disorder in Hindi

अक्सर लोग स्वादिष्ट भोजन की चक्कर में ज्यादा खा लेते हैं। कभी कभी ऐसा करना तो जायज़ होता है पर सोचिए अगर रोज ही व्यक्ति ठूस ठूस कर के खाना खाता है तो क्या होगा, क्या तब भी स्वादिष्ट भोजन की वजह से ही ऐसा होता है? तो हम आपको बता दें की बिलकुल नहीं असल में अधिक खाना खाना भी एक विकार होता है। अधिक खाने के विकार को विंज ईटिंग डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। आज हम आप सबको इसी विकार के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।

क्या है अधिक खाने का विकार?

ये विकार ऐसा विकार है जिसमें व्यक्ति ठूस ठूस कर खाना खा लेता है। इस विकार में लोग ज्यादातर नियंत्रण से बाहर महसूस करते हैं और एक समय में क्षमता से ज्यादा बहुत अधिक खाना खा लेते हैं।

ये बहुत ही गम्भीर समस्या है और इसे विंज ईटिंग डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। विंज आमतौर पर उसे कहते हैं जब इक्कट्ठे बहुत से खाना खाया जाता है। कुछ लोग कभी कभी ऐसा करते हैं पर कुछ लोग नियमित रूप से ऐसा करने लगते हैं और अक्सर दूसरे लोगों से छुपकर के खाते हैं।

जिन बीमारियों को इसकी समस्या होती है उन्हें ज्यादातर सबके सामने शर्मिंदगी का सामना करना पड़ जाता है। लोग अपनी इस समस्या पर काबू तो पाना चाहते हैं पर वो ऐसा कर नहीं पाते हैं और ठूस ठूस कर खाने को मजबूर हो जाते हैं। जो लोग इस विकार की चपेट में आ चुके हैं ज़रूरी है कि वो इसका इलाज करवाएं और इससे छुटकारा पा लें।

जाने क्या होते है अधिक खाने के विकार के कारण

अधिक खाना खाने का सबसे सही कारण तो अब तक नहीं सामने आ पाया है पर कुछ कारण हैं जिनकी वजह से ये विकार हो जाता है। जो कारण हैं वो निम्न हैं-

  • आनुवंशिकता- अधिक खाने का विकार आनुवंशिकता की वज़ह से भी हो जाता है। अगर व्यक्ति के परिवार में उसके माता-पिता या घर में किसी भी सदस्य को इसकी शिकायत रहती है तो इस बीमारी को होने की संभावना अधिक रहती है। यह विकार मस्तिष्क में रसायनों के बदलाव की वजह से होता है।
  • डाइटिंग- जो लोग इस विकार की चपेट में आते हैं वो अक्सर डाइटिंग करने की वजह से ऐसा करते हैं। डाइटिंग की वज़ह से ही व्यक्तियोंको अधिक खाने की इच्छा होती है जिसकी वजह से खाना मिलते ही व्यक्ति खाने पर टूट पड़ते हैं। ऐसा अक्सर आत्मसम्मान में कमी की वजह से होता है।
  • उम्र- ये विकार किसी भी उम्र में व्यक्तियोंको अपनी चपेट में ले लेता है। पर अक्सर किशोरावस्था में इसकी समस्या ज्यादा देखी गई है।
  • मनोवैज्ञानिक समस्याएं- जिनमें ये समस्या जन्म लेती है उनमें अपने शरीर को लेकर सजग होते हैं जिससे वो लोग अक्सर असहज महसूस किया करते हैं। नशे वगैरह आदि के होने से भी इस विकार के होने की सम्भावनाएं होती हैं।

अधिक खाना खाने के विकार के लक्षण

अधिक खाना खाने के विकार के लक्षणों में निम्न चीज़ें शामिल हैं-

  • बिंज ईटिंग डिसऑर्डर वाले लोगों को मानसिक तनाव रहता है ।
  • निराशा, उदासी या फिर दोषी जैसा महसूस करना।
  • लोगों के बीच शर्मिंदा होने से बचने के लिए अकेले में छुप छुप कर खाना खाना।
  • भूख न लगने पर भी पर्याप्त मात्रा से ज्यादा खाना खा लेना।
  • पेट में दर्द जब तक शुरू न हो जाए तब तक बस खाते हज रहना।
  • सामान्य रूप से अधिक भोजन करना।
  • अकेला महसूस करना और अपनी भावनाओं के बारे में बात करने से हिचकिचाना।
  • अधिक खाना खाने की आदत पर नियंत्रण नहीं कर पाना और बार बार भूख लगना।
  • अक्सर डाइटिंग को अपनाना पर फिर भज वजन को घटाने में सफल नहीं हो पाना।
  • बहुत तेज़ी से खाना खाना।
  • अपनी खाने की आदत की वजह से सब के बीच शर्मिंदगी, घृणा या परेशानी को महसूस करना।

अधिक खाना खाने के विकार का इलाज

इसका इलाज करना बहुत ही आवश्यक होता है क्योंकि बाद में ये खतरनाक बीमारी साबित हो जाती है। इसकी वज़ह से व्यक्तियोंको बाद में घृणा, शर्म आदि समस्याओं से जूझना पड़ जाता है। इस विकार में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • मनोचिकित्सा- इसे टॉक थेरेपी के नाम से भी जाना जाता है। इसके तहत डॉक्टर मरीज़ से उसके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करते हैं। फिर डॉक्टर मरीज़ की दिमागी हालत की जांच करते हैं और इस समस्या से बाहर आने का तरीका बताते हैं। मनोचिकित्सा में निम्न चीज़ें शामिल हैं-

◆ कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी- इस थेरेपी की मदद से व्यक्ति उन समस्याओं का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है जिसकी वजह से उसको अधिक खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे व्यक्ति को अपनी भूख पर नियंत्रण करने में भी मदद मिल सकती है। यदि व्यक्ति मोटापे का शिकार होता है तो उसे वजन को कम करने के लिए कॉउंसलिंग का भी सहारा लेना पड़ता है।

◆ डालेक्टिकल बिहेवियरल थेरेपी- इसकी मदद से व्यक्ति तनाव से मुक्त और दूसरों के साथ सम्बन्धों को बेहतर बनाने में सक्षम हो पाता है। सबसे ज्यादा बड़ी बात ये है कि इसकी वजह से व्यक्तियोंको अधिक खाना खाने वाली अपनी आदत पर नियंत्रण करने में भी सहयोग मिलता है।

◆ पारस्परिक मनोचिकित्सा- इस चिकित्सा में मरीज़ के अन्य लोगों के साथ सम्बन्धों को परखा जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति के पारस्परिक सम्बन्धों में सुधार आता है। जिसकी वजह से व्यक्ति के अधिक खाना खाने के विकार पर लगाम लगाई जा सके।

  • दवाएं- इस विकार के लिए कोई निश्चित दवा नहीं है पर फिर भी इसके लक्षणों को कम करने के लिए अवसादरोधी दवाओँ को दिया जाता है।
  • स्व सहायता के उपाय- अधिक खाना खाने के विकार के मरीजों को स्व सहायता से सम्बंधित किताबों को पढ़ना चाहिए, वीडियोस को देखना चाहिए। इन सबके बाद भी व्यक्ति को एक बार जरूर मनोचिकित्सक को दिखा लेना चाहिए।

अधिक खाना खाने के विकार से बचने के उपाय

अगर व्यक्ति थोड़ी से सावधानी बरतें तो इस समस्या से बच सकता है। खुद पर नियंत्रण रखना आना चाहिए। अधिक खाना खाने के विकार से बचने के उपायों में निम्न शामिल हैं-

  • यदि आप किसी भी व्यक्ति के अंदर इस विकार के लक्षणों को देखते हैं तो उससे इस बारे में बाग करें और उसे ऐसा करने से रोकें।
  • बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें। बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें क्यूंकि वही इस विकार के लक्षणों को पहचान सकते हैं। लक्षणों का पता लगने के बाद तुरन्त इसका इलाज करा लें।
  • अपने बच्चों में शरीर को लेकर सकारात्मक सोच पैदा करें। उन्हें ये विश्वास दिलाएं की शरीर का आकर जैसा भी हो इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

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