क्रोनिक किडनी डिजीज जाँच दवा व परहेज

क्रोनिक किडनी डिजीज जाँच व परहेज – Chronic Kidney Disease In Hindi

रोग व इलाज

क्रोनिक किडनी डिजीज की परेशानी जब कई वर्षों तक गुर्दे के कार्य करने की क्षमता में कमी आने लगती है, इसी समस्या को के कारण क्रोनिक किडनी डिजीज यानि किडनी फेल होने की परेशानी जन्म ले लेती है | इस बीमारी के अंत में व्यक्ति की किडनी पूर्णरूप से कार्य करना बंद कर देती है, इस समस्या को तीन नाम से जाना जाता है |


  • क्रोनिक रीनल विफलता |
  • क्रोनिक रीनल रोग |
  • क्रोनिक किडनी विफलता |

यदि व्यक्ति के गुर्दे के कार्य करने की क्षमता धीरे धीरे कम होने लगती है, तो व्यक्ति को कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है | क्युकी गुर्दे के कम न करने की वजह से शरीर में अपशिष्ट पदार्थों और तरल की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है | जो शरीर के लिए काफी नुकसानदायक साबित होता है | WHO के अनुशार हर साल लगभग बीस से तीस लाख लोग इस बीमारी के कारण अपन जान गवां देते है |

भारत में ही बात करे तो लगभग हर साल पांच से सात लाख लोग इस बीमारी के कारण अपनी जन से हांथ धो बैठते है | इस बीमारी का मुख्य कारण कारण धुम्रपान व फ़ास्ट फ़ूड होता है, जो व्यक्ति के गुर्दे को को अन्दर से बहुत ही कमजोर व कार्यहीन बना देते है | जसकी वजह से शरीर में इस प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है | शरुआत के दिनों में इस बीमार का पता लगाना बहुत ही मुश्किल होता है | दोस्तों आइये जानते है, क्रोनिक किडनी की जाँच के बारे में |

क्रोनिक किडनी डिजीज की जाँच

मूत्र की जाँच

मूत्र की चिकित्सीय परीक्षा के द्वारा व्यक्ति के मूत्र में मोजूद सभी तत्व की जाँच की जाती है | क्रोनिक किडनी डिजीज में मूत्र की जाँच इस लिए जरुरी है क्युकी किडनी, मूत्र के द्वारा रक्त में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों, खनिज, व अन्य पदार्थों को शरीर से बाहर ले जाने का कार्य करता है | इस जाँच में मूत्र का रंग, स्पष्टता, गंध, पोटेंशियल हाइड्रोजन, प्रोटीन, नाइट्राइट व सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है | जिससे किडनी में चल रही समस्या का पता चलता है |

रक्त की जाँच

रक्त परीक्षण के द्वारा भी किडनी में होने वाली समस्या का पता चलता है, यदि किसी कारणवश व्यक्ति की किडनी में किसी वजह से समस्या आने लगती है, तो शरीर में जमा तरल प्रदार्थ रक्त में घुलने लगता है | इसी वजह से डॉक्टर रक्त की जाँच करवाने की सलाह देते है | यदि रक्त जाँच में व्यक्ति के रक्त में यूरिया और क्रिएटिनिन की मात्रा अधिक पाई जाती है, तो व्यक्ति को उसी अनुशार इलाज की सलाह दी जाती है |

जीएफआर जाँच

जीएफआर जाँच के द्वारा व्यक्ति के ग्लोमेरुलर निस्पंदन की दर की माप की जाती है, इस जाँच के द्वारा मूत्र में अपशिष्ट उत्पादों के स्तर की माप की जाती है | जीएफआर व्यक्ति के शरीर में यह अनुमान लगाता की कितने मिलीलीटर अपशिष्ट प्रदार्थ किडनी द्वारा फिल्टर किया जा रहा है | यदि गुर्दे 90 मिलीलीटर से अधिक अपशिष्ट प्रति मिनट फ़िल्टर नही कर पा रहे होते है | तो व्यक्ति को उसी प्रकार का इलाज करवाया जाता है |

किडनी बायोप्सी जाँच

किडनी बायोप्सी के द्वारा गुर्दों के ऊतकों का नमूना लेकर इसकी जाँच की जाती है, इस जाँच के द्वारा गुर्दों में स्तिथ सेल की क्षति का भी पता लगया जाता है | साथ ही साथ यह किडनी का आकार व कार्य का भी पता लगाती है | यदि किडनी का आकार सामान्य से अधिक है, तो व्यक्ति को उसी प्रकार का इलाज दिया जाता है |

एंजियोग्राफी जाँच

एंजियोग्राफी जाँच के द्वारा भी किडनी में होने वाले संक्रमण व होने वाली समस्या की जाँच की जाती है | एंजियोग्राफी पांच प्रकार की होती है, जिसमे अन्य अन्य जाँच के द्वारा बिमारियों का पता लगया जाता है | एंजियोग्राफी के द्वारा व्यक्ति की किडनी में स्तिथ समस्या का सही प्रकार से पता लगया जा सकता है |

किडनी स्कैन की जाँच

किडनी स्कैन के द्वारा मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानि MRI, कम्प्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन व अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है | इस जाँच के द्वारा किडनी व मूत्र प्रवाह की जाँच करके आने वाली परेशानी का पता लगया जाता है | अगर मूत्र प्रवाह में किसी भी प्रकार की कोई समस्या आ रही है तो व्यक्ति को जल्द ही उस समस्या से जुड़े इलाज को दिया जाता है |

क्रोनिक किडनी डिजीज क दवा

नाम                     पॉवर                       मूल्य
AcutrolC           400Mg                    266
Adp H             5 Mg/12.5 Mg          37.0
Aldo H               40 Mg                    72.0
Bpace H        2.5 Mg/12.5mg         51.27
Cadpril            5 Mg                           8.0
Cardika            2.5 Mg                      14.0
Cinod T           15MG                        85.0
Dytor                10 Mg                      140.0
E Tel                 40 Mg                       32.0
Henletor          10 Mg                        26.0

इस रोग का परहेज

  • धुम्रपान को पूरी तरह छोड़ दे |
  • मधुमेह का पूर्ण इलाज करवाये |
  • अधिक दवा का सेवन न करे |
  • ड्रग्स व शराब का सेवन बिलकुल भी न करे |
  • मोटापे को नियंत्रित करे |
  • अधिक चर्बी वाले आहार का सेवन न करे |
  • इलाज को बीच में न छोड़े |
  • अधिक फस्ट फ़ूड का सेवन न करे |

बीमारी से जुड़े कुछ सवाल

क्रोनिक किडनी डिजीज में होर्लिक्स या प्रोटीन पाउडर ले सकते है क्या ?
किडनी डिजीज में प्रोटीन पाउडर ले सकते है | लेकिन आपको अगर मधुमेह की समस्या है तो प्रोटीन पाउडर न ले |

बोम्बो राइस, इलायची, मखाने व नारियल फायदेमंद है क्रोनिक किडनी डिजीज में ?
बोम्बो राइस, इलायची, मखाने व नारियल किडनी डिजीज में बहुत ही फायदेमंद साबित होता है | लेकिन किडनी डिजीज में चावल का सेवन बिलकुल भी नही करना चहिये |

गुर्दे की बीमारी में नींद की गोली व अस्व्गंधा खा सकते हैं क्या ?
गुर्दे की बीमारी की समस्या होने पर नींद की गोली व अस्व्गंधा का सेवन डॉक्टर क सलाह लेकर ही करे | क्युकी अधिक नींद की गोली व अस्व्गंधा व्यक्ति के लिए काफी हानिकारक साबित होता है |

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