जाने बायोप्सी की जाँच या टेस्ट के बारे में – Biopsy Test In Hindi

बायोप्सी जाँच के द्वारा कुछ रोग की पहचान करने का एक आसान तरीका होता है | बायोप्सी के द्वारा मरीज के उत्तकों व कोशिकाओं का सैंपल लेकर बीमारी के बारे में पता लगाया जाता है | बायोप्सी की जाँच पैथोलॉजिस्ट के द्वारा की जाती है | बायोप्सी दो प्रकार से की जाती है |

  1. इनसीजनल बायोप्सी जाँच – इस बायोप्सी को कोर बायोप्सी भी कहा जाता है | इस जाँच के द्वारा मरीज के ऊतक से नमूना लिया जाता है |
  2. एक्सीजनल बायोप्सी जाँच – इस बायोप्सी के द्वारा मरीज के त्वचा पर स्तिथ गांठ को सर्जरी के द्वारा पूरी तरह निकाल दिया जाता है |

अब आइये जानते है बायोप्सी के प्रकार व किस तरह की जाती है | बायोप्सी

बायोप्सी जाँच कई प्रकार की होती है |

खुरचना के द्वारा – इस प्रक्रिया के द्वारा मरीज के उत्तकों की सहायता से कोशिकाओं को निकला जाता है | इस प्रक्रिया को अधिकतर मुंह के अंदर या फिर गर्भ की गर्दन से इस प्रक्रिया को अधिकतर उपयोग में लाया जाता है |

छेद करना – इस बायोप्सी में पंच का प्रयोग किया जाता है | यह एक चाकू की तरह गोल उपकरण होता है | जो मरीज के उत्तकों से डिस्क के आकर का एक सैंपल लेता है | इस बायोप्सी का प्रयोग त्वचा में सडन जैसी समस्या होने पर प्रयोग किया जाता है |

एंडोस्कोपिक बायोप्सीएंडोस्कोपिक बायोप्सी में एंडोस्कोप के द्वारा मरीज के शरीर से सैंपल व जाँच की जाती है | एंडोस्कोप एक लम्बा व ऑप्टिकल उपकरण होता है |

स्टीरियोटेक्टिक बायोप्सी – स्टीरियोटेक्टिक बायोप्सी के द्वारा डॉक्टर मरीज के मस्तिष्क की जाँच करता है | वो इसके द्वारा मरीज के मस्तिष्क से सैंपल भी लिया जाता है |

सुई बायोप्सी – सुई बायोप्सी का प्रयोग केवल मरीज के शरीर से तरल सैंपल निकालने में किया जाता है | कोर बायोप्सी में भी सुई का प्रयोग करते है | लेकिन कोर बायोप्सी में चौड़ी सुई का प्रयोग किया जाता है |

कैंसर की जाँच व पता लगाने में बायोप्सी की जरुरत पड़ती है

अगर किसी व्यक्ति के शरीर में कहीं गांठ की समस्या हो रही है | तो उस गांठ का पता लगाने के लिए बायोप्सी की मदद ली जाती है | इसी जाँच के द्वारा शरीर में कैंसर जैसी समस्या का भी पता लगाया जाता है |

अल्सर जैसी समस्या का पता लगाने में की जाती है बायोप्सी

बायोप्सी के द्वारा डॉक्टर एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं के कारण हुए अल्सर का पता लगाते है | अल्सर का पता लगाने के लिए डॉक्टर छोटी आंत में बायोप्सी की जाँच का प्रयोग करते है | इस जाँच के द्वारा डॉक्टर कुअवशोषण सीलिएक व एनीमिया का भी पता लगाया जा सकता है |

लिवर की समस्या का पता लगाने में भी की जाती है बायोप्सी जाँच

इस जाँच की मदद से डॉक्टर मरीज के शरीर में लिवर कैंसर व लिवर ट्यूमर का पता लगाया जाता है | डॉक्टर इस जाँच का प्रयोग तब करते है | जब मरीज के लीवर किसी बीमारी व चोट की वजह से हताहत हो गया हो | तब इस जाँच के द्वारा समस्या का पता लगाया जाता है |

इन्फ्लमेशन के कारण की जाती है बायोप्सी

इन्फ्लमेशन यानि त्वचा पर सुजन जलन व लालिमा जैसी समस्या का आना जिससे हमारे कोशिकाओं के अन्दर जाँच की जाती है | इस जाँच को सुई के द्वारा की जाती है | इसी जाँच के द्वारा डॉक्टर मरीर के शरीर में इन्फ्लमेशन की समस्या का पता लगाते है |

संक्रमण की समस्या का पता लगाया जाता है बायोप्सी के द्वारा

संक्रमण का पता डॉक्टर सुई बायोप्सी के द्वारा पता लगाते है | सुई बायोप्सी के द्वारा डॉक्टर मरीज में संक्रमण की चीजं के द्वारा हुआ है | यह पता लगाते है |

कई बारे बीमारी के पता होते हुये भी इस जाँच की जरूरत पड़ती है | क्यूकि इस जाँच के द्वारा डॉक्टर बीमारी की स्टेज का पता लगाते है | उसके बाद डॉक्टर उस उपचार को करने की सलाह मरीज को देते है | अब आइये जानते है कैसे शुरू की जाती है बायोप्सी जाँच

इस जाँच से पहले करते है ये तैयारी

बायोप्सी की शुरुआत के पहले डॉक्टर कुछ जरुरी बातों को ध्यान रखते है | वो मरीज से भी कुछ परहेज क्जरने को बोलते है | तो आइये जानते है उन जरुरी बातों के बारे में |

  • बायोप्सी की जाँच से पहले कुछ खाने व पीने से पहले डॉक्टर से जरुर सलाह ले |
  • अगर कोई मरीज नियमित रूप से किसी दवा का सेवन कर रहा है | तो बायोप्सी जाँच से पहले उस दवा के बारे में डॉक्टर को जरुर बताये |
  • अगर मरीज को किसी दवा से एलर्जी की समस्या होती है | तो इस बात को भी डॉक्टर से जरुर शेयर करे | जिससे मरीज को उस दवा का सेवन ना कर पाये |
  • अगर मरीज को इस जाँच से पहले मरीज को किसी प्रकार का कोई तनाव व डर लग रहा है | तो अपनी इस समस्या के बारे में जरुर डॉक्टर से बताये | क्यूकि सर्जरी के समय मरीज के साथ साथ डॉक्टर को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो |

बायोप्सी जाँच करवाते समय क्या होता है ?

बायोप्सी करवाते समय मरीज को किसी प्रकार की कोई परेशानी नही होती है | सर्जरी होते समय मरीज को पेट के बल या पीठ के बल लेटना पड़ता है | यह इस बात पर निर्भर करता है | के मरीज के किस अंग से सैंपल लिया जाना है | सर्जरी के समय मरीज को अनेस्थेसिया दिया जाता है | जिससे मरीज को किसी भी प्रकार का कोई दर्द महसूस ना हो सके | अनेस्थेसिया देने के बाद मरीज की सर्जरी का कार्य पूरा किया जाता है |

बायोप्सी जाँच होने के बाद क्या होता है ?

बायोप्सी जाँच होने के बाद मरीज को किसी भी प्रकार की कोई समस्या का सामना नही करना पड़ता है | सर्जरी के आठ या 12 घंटे बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी कर दी जाती है | इतना समय इस लिए दिया जाता है | क्योंकी सर्जरी के समय लगे चीरे से कभी कभी दर्द व सूजन महसूस जैसी समस्या अगर होती है | तो डॉक्टर उस समस्या का उपचार कर सके | सर्जरी में सैंपल लेने के बाद सैंपल को लेबोरेटरी भेज दिया जाता है | जिससे बीमारी का पता लगाया जा सके |

कौन कौन सी समस्या आती है बायोप्सी की वजह

  • बायोप्सी के दौरान कभी कभी आतें क्षतिग्रस्त हो सकती है |
  • खून बहने की समस्या का आना |
  • सही ऊतक का ना मिल पाना |
  • संक्रमण का खतरा होना |

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