दशमूलारिष्ट के लाभ व बनाने की विधि – Dashmularishta in hindi

जड़ी बूटी

दशमूलारिष्ट मुख्य रूप से महिलायों को पोषण देने वाली एक आयुर्वेदिक दवा है. जो शरीर को पोषण युक्त बनाने में मदद करती है | इस आयुर्वेदिक दवा को कई प्रकार की गुणकारी जडीबुटीयों से मिलाकर बनाया जाता है | जो महिलाओं को माहवारी वाले दिनों में ताकत व कई प्रकार के रोगों से बचाने का कार्य करती है |

इस दवा के सेवन से एंटी-ऑक्सीडेंट, एनाल्जेसिक, एंटीमिक्राबियल, कायाकल्प पुनर्निर्माणकर्ता, इम्यूनो-मॉड्यूलेटर, एंटी-तनाव और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व शरीर को प्राप्त होते है | इस आयुर्वेदिक दवा को दस प्रकार कि जडीबुटी को मिलाकर एक काड़ा तैयार किया जाता है | जो शरीर की कई बिमारियों को दूर करने में आपकी मदद करता है |

दशमूलारिष्ट क्या है ?

दशमूलारिष्ट एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा है | इस दवा को अधिकतर प्रसव के बाद जननी को ताकत व पोषण के लिए इस्तेमाल में लायी जाती है | यह दवा माँ के स्वस्थ के लिये बहुत ही लाभकारी मानी गयी है | दशमूलारिष्ट को…

  • चित्रक की छाल |
  • पुष्कर की जड़ |
  • लोध्र और गिलोय |
  • आंवला व तुलसी के बीज|
  • जवासा |
  • खैर की छाल यानि कत्था |
  • विजयसार |
  • गुठलीरहित बड़ी हरड़ |
  • जटामासी |
  • पिप्पली |
  • नागकेसर व नागरमोथा |

आदि गुणकारी जड़ी बूटी को मिलाकर बनाया जाता है | जो आपके शरीर में स्थित बिमारियों को दूर करके आपको स्वस्थ बनाने का कार्य करती है | प्रसव के बाद आपको इस दवा का सेवन जरुर करना चाहिये | इस दवा का प्रयोग जननी के साथ साथ एक अविवाहित लड़की भी कर सकती है | यदि आप आविवाहित है, और आपको अपने माहवारी के दिनों में कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो भी आप इस दवा के द्वारा अपनी सभी समस्या को आसानी से खत्म कर सकती है | आइये आपको बताते है, इस आयुर्वेदिक दवा को बनाने की विधि के बारे में –

इसको बनाने की विधि –

आप इस दवा को अपने घर पर भी बहुत आसानी से बना सकती है | इस दवा को बनाने के लिए सबसे पहले आपको उपर दी हुई जडीबुटी को लेकर कूट कर चूर्ण बना लेना है | फिर एक बर्तन में पानी को गर्म करे और उस पानी में सभी जडीबुटी के चूर्ण को मिलाये | इसको तब तक गर्म होने दे जब तक यह घोल पूरी तरह से काढ़े में परिवर्तित न हो जाये | काढ़ा बनने के बाद इसमें शहद को मिलाये | पांच दिन बाद इस काढ़े का सेवन आप नियमित रूप से कर सकती है, मगर ध्यान रहे आपको इस दवा का सेवन दिन में केवल दो बार ही करना चाहिये |

स्वास्थ से जुड़े इसके लाभ :

कुपोषण को दूर करती है –

कुपोषण की परेशानी शरीर को लम्बे समय तक संतुलित आहार से वंचित रखने की वजह से जन्म लेती है | कुपोषण की वजह से आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है | जिससे आप आये दिन किसी न किसी बीमारी का शिकार होती रहती है |

तो आप इस दवा के द्वारा माहवारी के समय होने बाली समस्यायों को जड़ से खत्म कर सकती है | इस दवा में पाई जाने वाली गिलोय नामक जडीबुटी आपके शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट व कई विटामिन्स को जाग्रत करने का कार्य करती है | जिससे आपका शरीर धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगता है |

पाचन तंत्र में सुधार लाती है –

पाचन तंत्र शरीर में मोजूद भोजन को पचाने का कार्य करता है, पाचन तंत्र हमारे भोजन को जरुरी पोषक तत्व में बदलकर उर्जा प्रदान करने का कार्य करते है | पाचन तंत्र ख़राब होने की वजह से आपको नियमित कब्ज एसिडिटी व लिवर रोग जैसी अन्य समस्या का सामना करना पड़ता है |

यदि आप भी पाचन से जुडी किसी भी प्रकार की समस्या का सामना कर रहे तो आप दशमूलारिष्ट के द्वारा अपनी इस परेशानी को बहुत ही आसानी से खत्म कर सकती है | दशमूलारिष्ट में आवंला, पिप्पली व जटामासी जैसी जडीबुटी आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाने का कार्य करती है |

महिला के शुक्राणु बेहतर बनाती है –

शुक्राणु की कमी से महिला व पुरुष में नपुसंकता व बाँझपन जैसी समस्या उत्पन्न होती है | विश्व स्वास्थ्य संगठनके अनुसार महिला व पुरुष में शुक्राणु की संख्या 15 से 20 मिलियन प्रति मिली लीटर वीर्य होती है | यदि किसी महिला व पुरुष में इस संख्या से कम शुक्राणु पाए जाते है, तो उनको नपुसंकता व बाँझपन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है |

यदि आपको लगता है की आप शुक्राणु की कमी के कारण गर्भधारण नही कर पा रही है, तो आप दशमूलारिष्ट के द्वारा अपनी इस परेशानी को आसानी से दूर कर सकती है | लोध्र, गिलोय, नागकेसर व नागरमोथा जैसी जडीबुटी आपके शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाकर आपके शुक्राणु की कमी को दूर करने का कार्य करती है |

यौन क्षमता को मजबूत बनती है –

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोगों के पास समय की कमी के कारण वह अपने खानपान से लेकर शरीर पर भी अधिक समय नही दे पाते है | जिसके कारण वह सेक्स ड्राइव से जुडी समस्या का सामना करने लगते है | यदि आप भी सेक्स से जुडी किसी समस्या का सामना कर रही है, तो आपको दशमूलारिष्ट का सेवन जरुर करना चाहिये |

क्योंकि इस दवा में मोजूद तुलसी के बीज व गिलोय आपके गुप्त अंग में रक्त संचार के बेहतर बनाकर आपके गुप्तांग को स्वस्थ बनाने का कार्य करने लगते है |

पीरियड्स के समय ताकत प्रदान करती है –

यदि आप पीरियड्स के समय अधिक रक्त स्त्राव के कारण कमजोरी व अधिक थकान महसूस करती है, और आप इस समस्या से छुटकारा पाना चाहती है | तो आप इस दवा के जरिये अपनी इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकती है |

यह दवा आपको पीरियड्स के समय ताकत के साथ साथ आपके हार्मोन्स में संतुलन बनाये रखने का भी कार्य करती है | जिससे आपको PCOD, PCOS व अनियमित पीरियड की समस्या से मुक्ति मिल जाती है | हमारे सुझाव से इस दवा का सेवन सभी महिलायों व लड़कियों को करना चाहिये | जिससे उनका शरीर स्वस्थ बना रह सके |

दशमूलारिष्ट के सेवन से अन्य लाभ :

इसका सेवन करने का तरीका –

इस दवा का सेवन आपको दिन में दो बार पहले सुबह नास्ते के बाद व शाम को भोजन के बाद गुनगुने पानी से करना चाहिये | जिससे आपको अपनी समस्या को ठीक करने में मदद मिल सके | आपको इस दवा का सेवन खाली पेट बिलकुल भी नही करना चाहिये | खाली पेट इस दवा के सेवन से शरीर को कई प्रकार के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है |  दशमूलारिष्ट जड़ी बूटी के द्वारा कई ब्रांड कई प्रकार की दवा निर्मित करते है, जैसे – डाबर दशमूलारिष्ट दिव्य दशमूलारिष्ट  व बैद्यनाथ दशमूलारिष्ट आदि|

इसके शरीर पर नकारत्मक प्रभाव –

दशमूलारिष्ट का सेवन अगर नियमित व सही मात्रा में किया जाये तो शरीर पर इस दवा का किसी प्रकार का कोई असर नही पड़ेगा | लेकिन यदि इस दवा का सेवन अधिक मात्रा में किया जाये तो आपको मुंह में छाले, पेट की जलन, एसिडिटी व उल्टी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है | प्रेगनेंसी के लास्ट समय में इस दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह से न करे |यदि आप इस लेख से संतुष्ट है और इस विषय से जुड़ा कोई सवाल पूछना चाहते है तो हमारे कमेन्ट बॉक्स में हमें जरुर बताये |

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