अनियमित दिल की धड़कन या हृदय अतालता

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हृदय अतालता
हृदय अतालता

अनियमित दिल की धड़कन या हृदय अतालता की बीमारी हम सभी जानते हैं कि व्यक्ति के शरीर में हृदय एक बहुत ही अहम हिस्सा होता है और ये नियमित अपनी सामान्य गति से चलता ही रहता है। कभीकभी ज्यादा काम करने से या घबराहट होने से या फिर ज्यादा तेज दौड़ने की वजह से दिल की जो धड़कन की गति होती है वो बढ़ जाती है पर कुछ समय बाद वो वापस अपनी सामान्य गति से चलने लगती है।

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि हमारा ह्रदय औसतन एक मिनट में ७२ बार धड़कता है और 1 मिनट मे 70 मिली लीटर रक्त पम्प करता है|चिकित्सीय रिकार्डों के अनुसार हमारे हार्ट का वजन महिलाओं में २५० से ३०० ग्राम और पुरुषों में ३०० से ३५० ग्राम पाया जाता है।

पर दोस्तों, अगर कुछ समय बाद भी आपकी धड़कन सामान्य नहीं होती है तो ये आपके लिए एक बहुत ही चिंता का विषय हो सकता है क्यूंकि दिल की धड़कन अगर सामान्य नहीं होती है तो ये जानलेवा भी हो सकती है| हार्ट की इसी अनियमित धड़कन को हम लोगहृदय अतालताया फिरएरिथमियाके नाम से भी जानते हैं।

क्या है हृदय अतालता?

अनियमित दिल की जो धड़कन होती है वही कहलाती हैहृदय अतालता हृदय अतालता की स्तिथि में आपके दिल की धड़कन की गति कभीकभी सामान्य से अधिक हो जाती है तो कभीकभी सामान्य से कम ये बीमारी बहुत ही शांत होती है इसीलिए लोगों का ध्यान इसकी तरफ नहीं जाता है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हृदय अतालता कई प्रकार की होती हैं जिसमें से कई तो बिलकुल हानिकारक नहीं होती हैं पर अगर धड़कन असामान्य ही रहती है तो ये एक गम्भीर स्तिथि पैदा कर सकती है।

हृदय अतालता  जो बीमारी है वो व्यक्तियों को तब होती है जब धड़कन को समन्वित करने वाले विद्युत संकेत ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। सबसे आम प्रकार की हृदय अतालता को एट्रियल फिब्रिलेशन  कहा जाता है |

 कुछ प्रमुख प्रकार

हृदय अतालता के निम्नलिखित प्रकार माने गये हैं

  • अपरिपक्व एट्रियल संकुचन- इससे किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है और ये हृदय के ऊपरी कक्षों से उतपन्न होती है।
  • अपरिपक्व वेंट्रिकुलर संकुचन- इसमें दिल की धड़कन रुकरुक कर चलती है ये आमतौर पर हम सभी महसूस कर लेते हैं। ये भी हानिरहित होती है।
  • एट्रियल फिब्रिलेशन ये बहुत ही आम हृदय अतालता होती है ये दिल के ऊपरी कक्षों को सिकोड़ देती है।
  • एट्रियल स्पंदन ये  एट्रियम में एक या एक से ज्यादा तीवर सर्किट की वजह से होता है।
  • हार्ट ब्लॉकइसमें वैद्युत आवेगों में विलंब पैदा हो जाता है या फिर यह पूरी तरह से ब्लॉक हो जाते हैं।

उपरोक्त प्रकारों के अलावा भी और कई प्रकार होते हैं पर ये प्रमुख होते हैं।

हृदय अतालता होने की प्रमुख वजह

हृदय अतालता के बहुत सारे कारण हो सकते हैं और उन कारणों में कुछ निम्नलिखित हैं

  • शुगर की बीमारी की वजह से।
  • उच्च रक्तचाप।
  • स्लीप एप्रिया।
  • थाइरॉइड ग्रन्थी का अति सक्रिय होना।
  • शराब और कैफिन के अधिक सेवन से।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट से।
  • हृदय की धमनियों के अवरुद्ध होने से।
  • तनाव और धूम्रपान की वजह से।
  • थाइरॉइड ग्रन्थी का असामान्य रूप से निष्क्रिय होना।
  • अचानक से पड़ने वाला दिल का दौरा।
  • आनुवांशिकता।
  • हृदय के ऊतक का क्षतिग्रस्त होना।

उपरोक्त कारणों की वजह से हृदय अतालता की संभावना अधिक होती है।

हृदय अतालता होने पर शरीर में दिखाई देते है ये लक्षण

हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि हृदय अतालता बहुत ही शांत रूप से होती है| इसके लक्षणों का पता कर पाना बहुत ही मुश्किल होता है। फिर भी कुछ लक्षणों से हृदय अतालता का पता लगाया जा सकता है और वो लक्षण निम्न हैं

  • कमज़ोरी या थकान का महसूस करना।
  • सीने में बेचैनी सी होना।
  • सांस लेने में दिक्कत महसूस होना।
  • दिल की धड़कन का रुकरुक कर चलना।
  • छाती में तेज धमक को महसूस करना।
  • बेहोशी आना और साथ ही चक्कर का आना।
  • दिल की धड़कनों का अचानक से अधिक हो जाना और अचानक से ही बहुत कम हो जाना।

हृदय अतालता का इलाज;-

हृदय अतालता का इलाज तभी किया जाता है जब ये गम्भीर रूप ले चुका हो। उसके इलाज में जो शामिल है वो निम्नलिखित है

  • ब्रेडिकार्डिया का इलाजइसका इलाज सबसे पहले किया जाता है अगर ब्रेडिकार्डिया अंतर्निहित कारणों से होता है। पर अगर डॉक्टरों को कोई अंतर्निहित समस्या दिखाई नहीं पड़ती है तो वो पेसमेकर प्रत्यारोपण की सलाह देते हैं।
  • टेककार्डिया का इलाज- इसके अंदर कई अलगअलग तरह के उपचार आते हैं जो हैंवेगल मनेवेर, दवाएं, कार्डियोवर्शन, आईसीडी, मेज़ प्रक्रिया, बाईपास सर्जरी आदि।

घरेलू उपाय 

हृदय अतालता के जो घरेलू उपाय मददगार साबित होते हैं वो निम्नलिखित हैं

  • शहतूत का शर्बत बनाकर उसका सेवन करें इससे तेज़ दिल की धड़कन सामान्य होती है।
  • धनिये के तीन ग्राम चूर्ण में तीन ग्राम मिश्री के चूर्ण को मिला लें। इसके बाद ताज़े पानी के साथ इसका सेवन करें। इससे हृदय अतालता की समस्या में बहुत मदद मिलती है।
  • फालसे का शर्बत नियमित रूप से पीने पर हृदय अतालता में आराम मिलता है।
  • आंवले को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और फिर उसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें और फिर रोजाना खाली पेट इसका सेवन ताज़े पानी के साथ करे। इससे अनियमित दिल की धड़कन सामान्य होती है और इसके साथ ही ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है।
  • अगर तेज़ धड़कन की समस्या रहती है तो नियमित रूप से ताज़े अनार के जूस का सेवन करें। धड़कन नियंत्रण में रहेगी।
  • गाजर बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। प्रतिदिन गाजर के जूस के सेवन करने से कमज़ोरी की समस्या दूर होती है और साथ ही अनियमित दिल की धड़कन की समस्या में भी राहत मिलती है।
  • पपीता का नियमित सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। इससे पीलिया जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है और साथ ही अनियमित दिल की समस्या भी दूर होती है।

हृदय अतालता से इस प्रकार करे बचाव

हृदय अतालता को रोकने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली का होना बहुत ही ज़रूरी होता है। स्वस्थ जीवनशैली से ही हृदय एवं कई अन्य प्रकार के रोगों को खुद से दूर भगाया जा सकता है। दिल को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली में जो चीजें शामिल हैं वो निम्न हैं

  • तनाव को कम करें और खुश रहकर जीवन वयतीत करें।
  • धूम्रपान करने से बचे।
  • शराब और कैफीन युक्त पदार्थों से दूरियों बनाकर रखें।
  • अपने वजन को नियंत्रित रखें।
  • हृदय को स्वस्थ रखने के लिए फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें।
  • अपनी शारीरिक गतिविधियों को बढाएं।

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