Heart Bypass Surgery in Hindi

जानिए ऑपरेशन मे कैसे करते है बहोश और सुन्न

रोग व इलाज

एनेस्थीसिया जिसका अर्थ संवेदना में कमी हो जाना कहा जाता है और जिन दवाओ का प्रयोग संवेदना में कमी लाने के लिए कहा जाता है उन्हें एनेस्थेटिक कहा जाता है | एनेस्थेटिक दवाओ का प्रयोग ऑपरेशन के दौरान शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के लिए किया जाता है | किसी भी प्रकार की मेडिकल जांच के दौरान एनेस्थेटिक दवाओं का प्रयोग करने से मरीज को दर्द और किसी भी प्रकार की असुबिधा नहीं होती है |


बहोशी या सुन्न

साधारणतः दो प्रकार के एनेस्थीसिया या एनेस्थेटिक दवाओ का प्रयोग किया जाता है – लोकल एनेस्थेटिक और जनरल एनेस्थेटिक | लोकल एनेस्थेटिक का प्रयोग छोटे ऑपरेशन में किया जाता है और इस दवा के प्रयोग से उस हिस्से को सुन्न किया जाता है जिसका उपचार करना होता है | जनरल एनेस्थेटिक का प्रयोग बड़े ऑपरेशन में किया जाता है जिसमे मरीज को पूरी तरह से बेहोश करना होता है |

आइये विस्तार से जानते है की एनेस्थेसिया क्या है ?, एनेस्थेसिया कितने प्रकार का होता है ?, एनेस्थेसिया का प्रयोग किस प्रकार से किया जाता है ?, एनेस्थेसिया के प्रयोग से क्या कोई नुकसान हो सकते है ?

एनेस्थेसिया क्या होता है ?

जब आपका या किसी अपने का ऑपरेशन होता है तो वह समय काफी तनावपूर्ण होता है और कई सवाल मन में उठने लगते है जैसे की एनेस्थेसिया क्या होता है | हर ऑपरेशन के दौरान होने बाले दर्द पीड़ा को ख़त्म करने के लिए कुछ दवाओ का प्रयोग किया जाता है जिन्हें एनेस्थेसिया कहा जाता है | एनेस्थेसिया का प्रयोग इंजेक्शन के माध्यम से या फिर सीध मुंह में गैस या वाष्प के द्वारा किया जाता है | एनेस्थेसिया कई प्रकार से तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने के साथ साथ उस अंग को सुन्न करने का काम करता है जिसका उपचार किया जाना है |

आजकल हर अस्पताल में एनेस्थिसिओलोजिस्ट मौजूद रहते है | एनेस्थिसिओलोजिस्ट यानी की वो डॉक्टर जो एनेस्थेसिया का प्रयोग करने में स्पेशिलिस्ट होते है | एनेस्थिसिओलोजिस्ट आज के समय में अपनी निगरानी में सुरक्षित और आधुनिक तरीको से ही एनेस्थेसिया का प्रयोग करते है |

एनेस्थिसिओलोजिस्ट आपको ऑपरेशन के पहले एनेस्थेसिया देते समय निम्न बातो का ख्याल रखते है

  • ऑपरेशन के पहले आपके शरीर के अन्दर होने बाली हर गतिविधि को नोटिस किया जाता है जैसे सांस लेना, ह्रदय की गति, शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर का ध्यान रखा जाता है |
  • सर्जरी के बाद अगर आपको दर्द रहता है तो उसे कैसे दूर करगे इसका उपाय भी आपके शरीर के आधार पर पहले ही किया जाता है |
  • उपचार हो जाने के पहले, उपचार के दौरान और बाद में आपको आरामदायक स्थिति में रखने का प्रबंध करना |

यह कितने प्रकार का होता है ?

एनेस्थेसिया मुख्यतः दो प्रकार का होता है लोकल और जनरल एनेस्थेसिया मगर इन दोनों के साथ साथ और भी कई एनेस्थेसिया को प्रयोग किया जाता है जो निम्न है –

  • सिडेशन – सिडेशन एक ऐसा एनेस्थेसिया है जिसका प्रयोग करने से आपको नींद आती है और मानसिक आराम मिलता है | इस एनेस्थेसिया का उपयोग छोटे ऑपरेशन और अरुचिकर सर्जरी के दौरान आपको आराम प्रदान करने के लिए किया जाता है |
  • रीजनल – रीजनल एनेस्थेटिक एक प्रकार का लोकल एनेस्थेटिक होता है | इस एनेस्थेटिक का प्रयोग शरीर के उस हिस्से को सुन्न करने के लिए किया जहां दर्द को रोकने के लिए बहुत अधिक मात्रा में सुन्नता की जरुरत होती है |
  • एपिड्युरल – एपिड्युरल भी एक प्रकार का रीजनल एनेस्थेटिक होता है जिसका प्रयोग शरीर के निचले हिस्से को सुन्न करने के लिए ही किया जाता है | इसका मुख्यतः प्रयोग प्रसव पीड़ा और बच्चे को जन्म देते समय किया जाता है |
  • स्पाइनल – यह एनेस्थेटिक भी एक प्रकार का रीजनल एनेस्थेटिक ही होता है | इसका प्रयोग पीठ के निचले हिस्से में सुन्नता के लिए किया जाता है | इस एनेस्थेटिक को रीढ़ की हड्डी के द्वारा किया जाता है और इसका असर 3 घंटो तक ही रहता है |

कभी कभी किसी बीमारी के उपचार के दौरान कई एनेस्थेटिक को एक साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है | सर्जरी के बाद होने बाले दर्द से राहत पाने के लिए जनरल एनेस्थेटिक को रीजनल एनेस्थेटिक के साथ मिलाकर दिया जाता है | सर्जरी के दौरान आपको दर्द से बचने के लिए भी कभी कभी सडेशन एनेस्थेटिक के साथ रीजनल एनेस्थेटिक को मिलाकर दिया जाता है |

 बहोश करने का तरीका

एनेस्थेसिया का प्रयोग करने से पहले एनेस्थेटिक आपसे आपकी हेल्थ से जुडी कुछ बातो की जानकारी लेते है जैसे की आपके डॉक्टर द्वारा आपको दी जाने बाली दवा, एलर्जी की समस्या और अगर आपने पहले एनेस्थेसिया का अनुभव किया है तो आपका अनुभव कैसा रहा | जिससे एनेस्थेओलोजिस्ट को आपके लिए एनेस्थेसिया की कौन सी डोज कितनी मात्रा में करनी है इसमें सहायता मिलती है |

एनेस्थेओलोजिस्ट वैसे तो एनेस्थेसिया का प्रयोग आपकी हाथ की नसों में इंजेक्शन को लगा कर करते है | कभी कभी किसी परिस्थतियो में इसे गैस या वाष्प के रूप में मुंह के द्वारा दिया जाता है | बच्चो को एनेस्थेसिया मास्क के जरिये दिया जाता है |

एनेस्थेसिया का प्रयोग करने के बाद एनेस्थेटिट टीम का एक सदस्य हमेशा आपके साथ ही रहता है और आपके शरीर की सारी गतिविधियों पर नजर रखता है और जरुरत पड़ने पर आपकी दवाई, शरीर का तापमान और ब्लड प्रेशर को ठीक करने का प्रबंध करता है |

जब सर्जरी पूरी हो जाती है तो एनेस्थेसिया के असर को कम कर देता है और और धीरे धीरे जब आप होश में आने लगते है तो आपको हल्का हल्का सा नशे में होने जैसा महसूस होने लगता है |

बहोशी के प्रयोग मे होने वाले साइड इफेक्ट्स

एनेस्थेटिक कई दवाओं को एक साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है जिसकी वजह से कुछ लोगो पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते है | जनरल और रीजनल एनेस्थ्तिक का प्रयोग करने के बाद होने बाले साइड इफेक्ट्स निम्न है –

  • घबराहट के साथ उलटी करने का मन होना
  • बेहोशी आना और चक्कर जैसा महसूस करना
  • अचानक से ठण्ड लगने जैसा महसूस होना
  • सिरदर्द होने लगना
  • खुजली और जलन होना
  • पेशाब करते समय परेशानी होना
  • दर्द और पीड़ा होना

एनेस्थेटिक को प्रयोग करने पर कुछ साइड इफेक्ट्स होते है परन्तु यह लम्बे समय तक नहीं रहते है और इनको इलाज करके आसानी से दूर किया जा सकता है |

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