अमर बैल

अमरबेल कहा मिलती है इसके फायदे अवं कुछ सावधानियाँ

जड़ी बूटी

अमरबेल जिसे आकाशबेल के नाम से भी जाना जाता है | अमरबेल हरे पीले रंग की बिना पत्तो बाली एक बेल होती है यह दुसरे पेड़ो के सहारे बढती है | यह बेल एक ही पेड़ पर हर वर्ष बढती जाती है इसका भूमि से कोई सम्बन्ध नहीं होता है | इसकी पतली धागे जैसी कई शाखाएं उस पेड़ से लिपटी रहती है और उसी से पोषण प्राप्त करती है | इसमें क्लोरोफिल बिलकुल नहीं पाया जिसकी वजह से यह सूरज की रौशनी में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के द्वारा अपना भोजन नहीं बना पाता है | जिसकी वजह से उसी पेड़ से पोषण प्राप्त करती है जिससे ये लिपटी होती है | ये तो बढती रहती है मगर वह पेड़ सूख जाता है जिससे ये लिपटी होती है |


अमरबेल को प्रयोग करने के फायदे

आज हम आपको इस अमरबेल से जुडी कुछ महत्वपूर्ण  स्वास्थ से जुडी बातो के बारे में बताएँगे –

कैंसर से बचाती है अमरबेल

एक आयुर्वेदिक खोज मे इस बात का पता लगे गया की अमरबेल में कैंसर को फैलाने बाली कोशिकाओं को नेस्तनाबूद करने की क्षमता होती है जिससे नियमित रूप से अमरबेल का उपयोग करने से कैंसर होने की रिस्क कम हो जाती है और कैंसर होने पर भी अमर बेल का नियमित प्रयोग फायदेमंद साबित होता है |

बबासीर में लाभकारी उपयोग 

अमरबेल में पेट की गर्मी को शांत करने बाले गुण पाए जाते है जिससे बबासीर की समस्या होने पर अमरबेल के लगभग 10 मिलीलीटर जूस में 4 ग्राम गोल मिर्च का पाउडर मिलाकर सुबह खाली पेट प्रयोग करने से बबासीर पूरी तरह से ठीक हो जाता है |

बालो को गिरने से रोकती है

इसमे  विटामिन C पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जिसके कारण यह बालो को मजबूत बनाने और उन्हें काला रखने में बहुत फायदेमंद होता है | अमरबेल को बारीक पीसकर इसमें 4 से 5 बूँद तिल का तेल मिलाकर अच्छे से मिक्स कर ले और इस मिश्रण को बालो पर लगायें | इसके साथ ही 1 लीटर पानी में 50 ग्राम अमरबेल डाल कर अच्छे से उबाल कर उस पानी से बाल धोना भी फायदेमंद होता है |

लीवर के लिए फायदेमंद होता है 

एक रिसर्च में पाया गया की लीवर की बीमारी बाले चूहों को अमरबेल का काढ़ा पिलाने पर उनकी समस्या ख़त्म हो गयी | अमरबेल में एलानिन एमिनोट्रांस्फरेज और एस्पातेर्ट एमिनोट्रांस्फरेज को कम करने बाले और एसओडी को बढाने बाले गुण पाए जाते है जिससे यह इंसानों में भी लीवर की बीमारी को ख़त्म करने में फायदेमंद होता है |

आँखों की रोशनी को बढ़ाती है 

अगर आप चश्मा लगते है और आप अपने चश्मे का नंबर कम करना चाहते है तो अमरबेल एक अच्छा उपाय होता है | इसके सेवन से क्रिस्टेलिन लेंस की अपारदर्शिता को कम करने और मोतियाबिन्द को दूर करने में मदद मिलती है | यह आँखों की रोशनी को बढाने बाला सबसे अच्छा घरेलु उपाय होता है |

मधुमेह को नियंत्रित करती है 

मधुमेह की समस्या होने पर अमरबेल का नियमित सेवन रामबाण की तरह काम करता है | अमरबेल का नियमित सेवन करने से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित होने के साथ ही शरीर में वसा की मात्रा भी नियंत्रित होती है | जिससे यह शरीर में ग्लाइकोजन की मात्रा को बढ़ने में मदद करता है | जिससे शरीर में शर्करा का स्तर संतुलित रहता है और मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है |

अमरबेल रोग प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने पर शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कई बीमारियाँ हमे अपना शिकार बना लेती है | मगर अमरबेल का नियमित सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को आराम से बढाया जा सकता है और रोगों से शरीर को बचाया जा सकता है |

हड्डियों को मजबूत बनाता है 

एक शोध के अनुसार अमरबेल के बीज को नियमित रूप से रोजाना प्रयोग करने से अस्थि खनिज घनत्व को बढ़ाकर कार्टिलेज को मजबूत बनाया जा सकता है | इस सबके साथ ही इसमें कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से ये कैल्शियम के फैलाव और फास्फेट से जुडी सक्रियता को बढाने में मदद करता है | जिसकी वजह से यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है |

प्रजनन शक्ति को बढाता है 

एक शोध में पाया गया की अमरबेल में पाये जाने वाले फ्लैवोनॉयड में एस्ट्रोजन जैसा ही प्रभाव होता है | अमरबेल को नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में शुक्राणु को सुरक्षा करने की क्षमता होती है जिससे यह अंडकोष के विकास और टेस्टोंस्टेरोन को बनाने की क्रिया को तेज करने की क्षमता होती है जिससे यह प्रजनन की शक्ति को बढाने का काम करता है |

अमर बेल को प्रयोग करने में रखे ये सावधानियाँ 

अमरबेल का नियमित रूप से सेवन करना वैसे तो सामान्यतः सुरक्षित होता है | मगर यह जड़ी बूटी बहुत ही शक्ति शाली होती है | इसलिये जरूरी होता है की अमरबेल का उचित मात्रा और सही तरह से सेवन करना चाहिए | वैसे तो आज तक अमरबेल से होने बाले कोई भी नकारात्मक दुष्प्रभाव सामने नहीं आये है फिर भी इसका उपयोग  चिकित्सक से परामर्श करके ही करना चाहिये |

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