जाने वैकल्पिक चिकित्सा या अल्टरनेटिव थैरेपी के बारे में – Alternative Treatment In Hindi

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Alternative Treatment In Hindi

वैकल्पिक चिकित्सा के द्वारा उपचार करने से हमारे शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही होता है | वैकल्पिक चिकित्सा को हम बहुत आसानी से प्रयोग में ला सकते है | क्यूकि चिकित्सा क्षेत्र में भी अलग-अलग पद्धतियां होती है कुछ मुख्यधारा में शामिल हैं तो कुछ वैकल्पिक पद्धतियां में आती है | लेकिन सभी के द्वारा हम अपनी समस्या का उपचार करा सकते है | अगर आपको अपने इलाज से पूर्णरूप से बीमारी से छुटकारा नही मिल पा रहा है | तो आप इस प्रकार उपचार अपना सकते है | वैकल्पिक चिकित्सा में कई प्रकार की चिकित्सा सामिल होती है | जैसे

  • प्राकृतिक चिकित्सा
  • पाद-चिकित्सा
  • आयुर्वेद चिकित्सा
  • जैवप्रतिपुष्टि चिकित्सा
  • होम्योपैथी चिकित्सा
  • एक्युपंक्चर चिकित्सा
  • पोषण-आधारित उपचार

आदि के द्वारा हम अपनी सभी समस्या का उपचार कर सकते है | इसीलिए आज आपको इसी विषय पर आपको हम जानकारी देने जा रहे है | की किस प्रकार आप अगर किसी बीमारी से ग्रस्त है | तो इस प्रकार का इलाज अपनाकर अपनी समस्या को जल्दी व जड़ से खत्म कर सकते है | तो आइये जानते है वैकल्पिक चिकित्सा को विस्तार से |

होमियोपैथी के द्वारा करे अपनी सभी समस्या का इलाज

होम्योपैथी भजी एक चिकित्सा पद्धति है | इसकी खोज डॉ सेम्युल हेहनीमेन ने की थी | इस चिकित्सा पद्धति के द्वारा हम अपनी सभी समस्या का उपचार बहुत आसानी से कर सकते है | इसके द्वारा इलाज बहुत आसान व सरल होता है | क्यूकि इसके अंतर्गत समान रोग में अलग लोगों की दवा अलग हो सकती है |

लेकिन अधिक गंभीर बीमारी का इलाज हमें इसके द्वारा नही करना चाहिये | क्यूकि इस पद्धति में इलाज सम्भव है लेकिन इसकी दवा का असर थोडा देर से होता है | इसीलिए हमें गंभीर समस्या का इलाज इसके द्वारा नही करवाना चाहिये | होम्योपैथी से हम टॉन्सिल्स, साइनस, यूरिनरी इन्फेक्शन, डायरिया, डिसेंट्री, टीबी, ब्रोंकाइटिस व निमोनिया जैसे संक्रमणों का इलाज बहुत आसानी से कर सकते है |

आयुर्वेद के द्वारा बनाये शरीर को स्वस्थ

आयुर्वेद भारत की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है | इसके द्वारा हम अपनी किसी भी समस्या का इलाज आसानी से कर सकते है | आयुर्वेद में किसी भी बीमारी का इलाज केवल जडीबुटी के द्वारा किया जाता है | आयुर्वेद के द्वारा हम शरीर का उपचार के साथ साथ जीवन जीने का तरीका भी जान सकते है | इस चिकित्सा को अपनाने से हमारी कई समस्या को खत्म करके अपने जीवन को लम्बा व सुखमय बना सकते है |

आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर बल दिया जाता है | जिससे किसी भी मनुष्य का शरीर जल्दी किसी भी बीमारी का शिकार ना हो सके | इस चिकित्सा को किसी भी वर्ग का व्यक्ति अपना सकता है | आयुर्वेद के द्वारा हर इलाज के लिए अलग अलग तरीका अपनाया जाता है | जैसे हर्बल उपचार, घरेलू उपचार, आयुर्वेदिक दवाओं के द्वारा उपचार, मालिश और ध्‍यान का उपयोग आदि

एक्यूप्रेशर व एक्यूपंक्चर का प्रयोग भी कारगर साबित होता है

वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में एक्यूप्रेशर व एक्यूपंक्चर से उपचार बहुत आसनी से कर सकते है | इसके द्वारा हम दर्द व तनाव जैसी समस्या को अपने शरीर से कोशो दूर कर सकते है | इस पद्धति के द्वारा हम अपने रक्त प्रवाह को भी ठीक कर सकते है | इस चिकित्सा को इस प्रकार दी जाती है |

इसमें शरीर के कुछ खास पॉइंट्स पर उंगलियों के दबाव डालने से हमारे शरीर का रक्त प्रवाह बिलकुल ठीक हो जाता है | जिससे हमारे शरीर के सभी अंगो में ठीक तरह से आक्सीज़न की मात्रा पहुच पाती है | जिससे हमारे शरीर में मौजूदबीमारी का इलाज बहुत आसानी से होने लगता है | लेकिन इस चिकित्सा पद्धति को हमें नियमित रूप से अपनानी चाहिये |

ऑस्टियोपैथी का चुनाव भी फायदेमंद होता शरीर के लिए

ऑस्टियोपैथी यानि अस्थिचिकित्सा एक मैनुअल पद्धति होती है | जिससे शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है | इसी के आधार पर होलिस्टिक जाँच होती है | जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक आदि समस्याओं को शामिल किया जाता है |

ऑस्टियोपैथ के द्वारा मरीज के मसल्स, जोड़ों, कनेक्टिव टिश्यू और लिगामंट्स के द्वारा उनके शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को सामान्य करने का प्रयास किया जाता है | ऑस्टियोपैथी से हमारी कई समस्या जैसे आर्थराइटिस के दर्द, कंधों में जकड़न, सिर दर्द, कूल्हे, गर्दन, और जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, तनाव, सांस की समस्याओं, प्रेग्नंसी से जुड़ी परेशानियां तथा पाचन संबंधी समस्याओं का बहुत आसानी से इलाज किया जाता है |

अगर आप भी अपनी किसी बीमारी से परेशान है | तो आपको भी उपर दी हुई वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए | इन चिकित्सा के प्रयोग से हमारे शरीर को जल्दी आराम मिलने लगता है | ओर इनकी खास बात ये है की अगर इस पद्धति को किसी जानकार वयक्ती के साथ अपनाया जाये | तो इसके हमारे शरीर पर किसी भी प्रकार का कोई हानिकारक प्रभाव भी नही पड़ेगा |

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