सूरजमुखी की बीमारी क्या होती है – Albinism Disease In Hindi

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सूरजमुखी की बीमारी क्या होती है

एल्बीनिज़्म (सूरजमुखी)की बीमारी के साथ जीना

सूरजमुखी की बीमारी साँवले रंग के व्यक्तियोंमें बड़ी आसानी से देखने को मिल जाती है |इस बीमारी में चेहरे के साथ पूरा शरीर भी सफेद पढ़ जाता है ,तथा बाल भी सफेद हो पढ़ जाते है |

इस बीमारी का शिकार अपने देश में ही नही बल्कि सभी देश के लोग हो जाते है ,और हर जाति और हर रंग के वयक्ती भी इसका शिकार हो जाते है |कई शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि ये बीमारी २०००० व्यक्तियोंमें से एक में पाई जाती है |

सूरजमुखी की बीमारी जीन के कारण होती है |ये बीमारी माँ -बाप से बच्चो में पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचती रहती है | और हा कई बार ऐसा भी होता है कि यह बीमारी बहुत पीढ़ियों तक अपना असर ना दिखाए परन्तु बाद में जाकर यह परिवार के किसी वयक्ती को अपना शिकार बना लेती है |

बहुत से लोगो का मानना है की ये जो शब्द है “एल्बीनिज़्म” इसकी शुरुआत 17 वीं में पुर्तागाली खोजकर्ताओं के द्वारा की गयी थी |

जब पुर्तागाली खोजकर्ता अपने जहाज पे सवार होकर पश्‍चिम अफ्रीका के तटवर्ती इलाकों के पास से गुज़र रहे थे तो उन्हें वहा कुछ लोग दिखाई दिए जिसमे से कुछ गोर तथा कुछ साँवले थे |

उन्होंने उन्हें देखकर सोचा की ये लोग अलग -अलग जाति के होंगे |इसलिए उन्होंने साँवले लोगों का नाम पुर्तागाली में ‘नीग्रो’ रखा और गोरे लोगों का ‘एल्बीनो’ रख दिया |

सूरजमुखी की बीमारी का त्वचा और आँखों पर असर

इस बीमारी का असर केवल त्वचा पर ही नहीं होता अपितु इसका असर वयक्ती की आँखों पर भी कई प्रकार से होता है । सूरजमुखी की बीमारी में सूरज की किरणें आँखों की पुतली (प्यूपिल) से गुज़रती हैं, आइरिस (परितारिका) से नहीं गुजरती | क्योंकि आइरिस में मौजूद पिगमेंट, किरणों को अंदर जाने से रोकता है।

जबकि एक सूरजमुखी की बीमारी से ग्रस्त वयक्‍ति की आइरिस पारदर्शी होती है, जिससे नुकसान दायक रोशनी सरल तरीके से गुज़रती है। जिसके कारण वयक्ती की आँखे गड़ने लगती है |

और फिर इस परेशानी से बचने के लिए कई लोग टोपी पहनते है जिससे धूप ना लगे तथा अल्ट्रा वायलेट किरणों से रक्षा करनेवाले चश्‍में वगैरह पहनते हैं। बहुत से लोग ऐसे भी है , जो रंगीन कॉन्टेक्ट लैंस लगाते हैं।

बहुत से व्यक्तियोंका मानना है कि सूरजमुखी वाले वयक्ती की आँखे गुलाबी होती है | लेकिन यह बात बिलकुल गलत है | क्योकि सूरजमुखी वाले वयक्ती की आँखों की पुतली हल्की स्लेटी, भूरी या नीली होती है।

जिसे सूरजमुखी की बीमारी होती है उस वयक्‍ति को आँखों की कई समस्या हो सकती हैं। जिसमे से मुख्य है, भेंगापन | आपको बता दे कि जो वयक्ती भेंगा होता है , उसकी रेटिना की नसे उसके दिमाग से अच्छी तरह जुडी नही होती है |

जिसके कारण वयक्ती की दोनों आँखों का अच्छे प्रकार से तालमेल नही बैठ पाता है | जिसके कारण आँखे यह नही टी कर पाती कि कोई वस्तु उससे कितनी दूरी पर है |

इसका फिर इलाज चश्मा लगाकर किया जा सकता है , तथा सर्जरी से भी किया जा सकता है | इसका इलाज चश्‍मा लगाकर या सर्जरी से किया जा सकता है।

लोगों का सामना भी करना पढ़ता है

सूरजमुखी से बीमार लोगो को अपनी बीमारी के साथ जीना आ जाता है |लेकिन इस बीमारी से ग्रषित कुछ लोग को इस बीमारी का सामना करना बहुत कठिन हो जाता है | दुसरे लोग उन्हें अपने से अलग समझते है इसी कारण उन्हें बहुत बुरा लगता है| बच्चो के लिए ये बढ़ी चुनौती है

पश्‍चिमी अफ्रीका के कई इलाको में सूरजमुखी से ग्रषित बच्चों का मज़ाक उड़ाया जाता है। वहा के लोग बच्चो से डरावना कहते है |और ज्यादातर इस बीमारी में बच्चो का ही ज्यादा मजाक बनाया जाता है , बड़ो के साथ ज्यादा मजाक नही किया जाता |

पश्‍चिमी अफ्रीका के लोग अपना ज्यादा समय घर के बाहर ही बिताते हैं। लेकिन जो सूरजमुखी से ग्रषित वयक्‍ति होते वो अपने घर के अंदर ही रहना पसंद करते है |उन्हें ये अहसास होने लगता है की कोई उन्हें प्यार नही करता है ,और ना ही वो किसी काम के है |

सूरजमुखी की बीमारी बीती बात बनकर रह जाएगी

अभी कुछ सालो में सूरजमुखी के इलाज में बहुत सुधार आया है |चिकित्सा विज्ञान आज के समय में सूरजमुखी के व्यक्तियोंको अच्छी मदद दे पा रहे है |

सूरजमुखी वाले लोग अक्सर एक समूह में मिलते हैं|और आपस में अपनी आपबीती सुनाते हैं । जिसके कारण वो अपनी हालत को अच्छी तरह समझ पाते है |और इन सब ले बाद भी सूरजमुखी की बीमारी दूर नही हो पाती है |इस बीमारी को सिर्फ भगवान ही दूर कर सकते है |

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