एगोराफोबिया क्या है – Agoraphobia In Hindi

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एगोराफोबिया क्या है

इसका पता होना बहुत जरुरी है क्योंकि की सामान्य सी लगने वाली समस्याए बड़ा रूप ले लेती है | ऐसी ही एक समस्या एगोराफोबिया भी होती है तो आइये जानते है की आखिर एगोराफोबिया क्या है ? , एगोराफोबिया की पहचान कैसे की जाये ? एगोराफोबिया होने के क्या कारण होते है ? और क्या एगोराफोबिया का इलाज संभव है ?

हर इंसान को भीड़ भाड़ वाली जगह पर थोड़ी बहुत घबराहट तो महसूस होना स्वाभाविक होता है | मगर अगर कोई व्यक्ति सार्वजानिक स्थानों या फिर सामाजिक कार्यो के अवसरों पर जाने से घबराता या डर महसूस करता है तो यह एगोराफोबिया का लक्षण होता है |

वैसे तो डर एक बहुत ही छोटा सा शब्द होता है मगर यह छोटा सा शब्द अच्छे अच्छो के पसीने छुड़ाने और होश उड़ाने के लिए पर्याप्त होता है | डरावनी फिल्मो को देखकर डर जाना तो एक स्वभाविक लक्षण होता है मगर जब कोई व्यक्ति सार्वजानिक स्थानों या फिर सामाजिक कार्यो के अवसरों पर जाने से घबराता या डर महसूस करने लगे और उसे अकेलापन ( हमेशा अकेले रहना ) पसंद आने लगे तो यह एगोराफोबिया का लक्षण माना जाता है | एगोराफोबिया एक तरह का सोशल फोबिया होता है जो की मानसिक तनाव और चिंता से जुडा हुआ होता है |

एगोराफोबिया की पहचान कैसे की जाये ?

  • एगोराफोबिया की समस्या से पीड़ित रोगी को अपने आसपास के किसी भी सार्वजनिक स्थान या कार्यक्रमों जैसी स्थितियों का सामना करने में घबराहट और डर महसूस होता है | ऐसे लोगों को आमतौर पर हमेशा ही भीड़ भाड़ भरे सार्वजनिक स्थानों जैसे शॉपिंग मॉल , पार्टी , सिनेमा हॉल या रेलवे स्‍टेशन जैसी जगहों पर जाने में डर और घबराहट महसूस होती है |
  • लम्बे सफ़र को तय करने में वैसे तो आम इंसान को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है | मगर इस समस्या से पीड़ित लोगो को लम्बी दूरी का सफ़र तय करने में भी परेशानी होती है | उन्हें बहुत डर लगता है जिससे वो लम्बे सफ़र तय करने से बचते है | इस समस्या से पीड़ित लोगों को अक्सर छोटी दूरी की यात्रा को तय करने में भी बहुत डर महसूस होता है |
  • एगोराफोबिया के रोगी को भीड़ वाली जगहों पर गला सूखना , दिल की धड़कन और सांसों की गति का अचानक से तेज़ हो जाना , ज्‍यादा पसीना निकलना और हाथ-पैर ठंडे पड़ना आदि समस्या होना शुरू हो जाती है जो की इसके होने के प्रमुख लक्षण होते है |
  • कई बार तो इस समस्या से पीड़ित लोग घबराहट की वजह से भीड़ भाड़ वाली जगहों पर बेहोश भी हो जाते हैं |इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति अपने आस पास के परिवेश ( वातावरण ) और अपने करीबी लोगो को ही अपनी दुनिया बना लेते है और किसी भी हालत में बो इस सबसे बहार निकलने की कोशिश भी नहीं करता है | वैसे तो यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है मगर २० से ४० वर्ष के लोगो में इस समस्या के लक्षण ज्यादा नजर आते है |

एगोराफोबिया होने के क्या कारण होते है ?

साइकोलॉजिस्टो द्वारा की गई रिसर्च से यह कहा गया है की फ़िलहाल तो एगोराफोबिया की सम्स्य होने के पीछे के कारणों का स्पष्ट कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है | फिर इस समस्या के होने के लिए आत्‍मविश्वास की कीम , भीड़ से जुड़ा बचपन का कोई बुरा अनुभव और नकारात्‍मक विचार ही सबसे ज्यादा एगरोफोबिया जैसे मनोरोग के लिए जिम्‍मेदार होते हैं | कई बार किन्ही कारणों से मस्तिष्‍क के न्‍यूरोट्रांसमीटर में बदलाव आने की वजह से भी लोगों को छोटी-छोटी बातों से घबराहट होने लगना शुरू हो जाता है इसके साथ ही यह समस्या अनुवांशिक कारणों से भी हो सकती है |

क्या एगोराफोबिया का इलाज संभव है ?

एगोराफोबिया को सही समय पर पहचान कर अगर सही समय पर इसका इलाज करवा लिया जाये तो यह समस्या आसानी से समाप्त की जा सकती है | एगोराफोबिया की समस्या में दवाओ के साथ साथ काउंसलिंग की मदद से रोगी का उपचार किया जाता है | इस तरह की समस्या होने पर बिहेवियर थेरेपी का भी प्रयोग किया जाता है जिससे पीड़ित के आत्‍मविश्वास को मजबूत करने की कोशिश की जाती है |

आमतौर पर एगोराफोबिया के इलाज में रोगी की मानसिक स्थिति छह महीने से लेकर एक साल के भीतर पहले जैसी सामान्य हो जाती है | एगोराफोबिया से सम्बंधित एक्सपर्ट का कहना है की इस बीमारी के इलाज में परिवार के सदस्यों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है | अगर आपके परिवार में कोई ऐसा सदस्य दिखता है ,

जो सार्वजनिक स्‍थानों पर जाने से हमेशा बचता है या वहां जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक से बिगड़ जाती है | तो उसके लिए विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए | उपचार के दौरान परिवार के सदस्यों को रोगी का मनोबल बढ़ाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए |

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