साइनस के कारण और उपचार – Sinus In Hindi

रोग व इलाज

चेहरे के पीछे के स्थान में नाक, मष्तिष्क और आँखों के अंदरूनी भागों के पास जो खोखली जगह होती है इसे ही साइनस कहा जाता है | बलगम के निकलने में परेशानी होने पर जब साइनस का मार्ग रुक जाता है तो उस अवस्था को साइनोसाइटिस कहा जाता है | बदलते मौसम के कारण धुल और प्रदुषण इस बीमारी होने के प्रमुख कारण माने जाते हैं | साइनस की समस्या को इसके कारण, लक्षण को ध्यान में रखकर आसानी से दूर किया जा सकता है | तो आइये जानते है इस बीमारी के कारण, लक्षण, निदान और उपचार के तरीके…

साइनस में दिखाई देने बाले लक्षण –

इसके लक्षण इसके संक्रमण और समय पर निर्भर करते है | यदि आपको निम्न लक्षणों में से कोई दो या इससे अधिक दिखते हैं या पीला, हल्का हरे रंग का स्त्राव नाक से होता है तो फिर आपको तीव्र साइनस का उपचार दिया जाता है | चेहरे पर दर्द के साथ दबाब महसूस होना नाक बंद रहना नाक का बहना सूंघने की क्षमता कम हो जाना लगातार खांसी आना

 उन्नत मामलों में निम्न लक्षणों को देखा जाता है :

यदि ये लक्षण आपको 12 हफ्तों से लम्बे समय तक रहते है तो डॉक्टर से परामर्श करके क्रोनिक साइनसिसिस का समय रहते उपचार कराया जा सकता है |

इस बीमारी के होने के कारण –

साइनस होने के लिए वैसे तो बहुत से कारण जिम्मेदार होते है मगर यह समस्या आमतौर पर तरल पदार्थ के इस क्षेत्र में फस जाने के कारण उत्पन्न होती है | तरल पदार्थ के इस क्षेत्र में फस जाने से कीटाणुओं का विकास हो जाता है | इसके साथ ही निम्न कुछ कारण भी जिम्मेदार होते है… ·

वायरस : वयस्कों में साइनस की समस्या होने के पीछे 90 प्रतिशत मामलो में वायरस को जिम्मेदार पाया जाता है |

बैक्टीरिया : वयस्कों में इसकी समस्या होने पर दस में से एक मामला बैक्टीरिया के कारण उत्पन्न पाया जाता है |

प्रदुषण : हवा में प्रदुषण के कारण बलगम जमा हो जाता है जो इस रोग का कारण बनता है |

कवक : साइनस हवा में उपस्थित कवक के कारण उत्पन्न होता है |

इस बीमारी के प्रकार –

साइनस की समस्या होने पर नाक में सूजन और बलगम का बनना शुरू हो जाता है | साइनस कई प्रकार के होते हैं जिनका प्रभाव अलग अलग समय तक रहता है |

तीव्र साइनसाइटिस : तीव्र साइनसाइटिस साइनस का आम प्रकार होता है, इसका प्रभाव लगभग चार हफ्तों तक रहता है |

सबस्यूट साइनसाइटिस : सबस्यूट साइनसाइटिस का प्रभाव तीव्र साइनसाइटिस के प्रभाव से अधिक लगभग चार से बारह हफ्तों तक रहता है |

क्रोनिक साइनसिसिस : क्रोनिक साइनसिसिस साइनस का आखिरी प्रकार होता है इसके लक्षण या तो लगातार रहते है, नहीं तो हर बारह हफ्ते बाद बापस आते रहते है | साइनस के इस प्रकार में उपचार के लिए लम्बे उपचार या सर्जरी की जरुरत पड़ सकती है |

साइनस की समस्या होने पर रोगी को रिकवरी और उपचार का समय रोगी की समस्या और साइनस के प्रकार पर निर्भर करता है |

 इस बीमारी का निदान –

साइनस की समस्या होने पर डॉक्टर द्वारा आपसे साइनस से जुड़े कुछ लक्षणों के बारे में जानकारी लेता है, जो साइनस के निदान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है | डॉक्टर द्वारा नेत्र गुहा की रोशनी या फिर एक छोटे से उपकरण ओटोस्कोप नामक यंत्र से जांच की जाती है, इस यंत्र का उपयोग कान की जांच के लिए भी किया जाता है | इसके बाद साइनस को पहचान कर उपचार किया जाता है | इस उपचार के बाद भी अगर रोगी में साइनस के लक्षण बने रहते है तो साइनस के रोगी को डॉक्टर द्वारा कान, नाक और गले की विशेष जांच के लिए विशेषज्ञों के पास भेजा जाता है | विशेषज्ञ नाक में एण्डोस्कोप द्वारा जांच की जाती है इसमें एक पतले सलंग्न ट्यूब के द्वारा प्रकाश और कैमरे से साइनस की विस्त्रत जांच की जाती है | साइनस की समस्या गंभीर या लगातार बने रहने पर कुछ मामलों में जांच के लिए सीटी स्कैन की भी मदद ली जाती है |

इस रोग का उपचार –

साइनस के उपचार के तरीके इस बात पर निर्भर करते हैं कि साइनस स्थिति प्रकार और समस्या कितने समय से है….

तीव्र और सबस्यूट साइनस साइनस के ज्यादातर तीव्र मामले उपचार के बिना ही ठीक हो जाते है जिससे लोग ज्यादातर इस समस्या से राहत पाने के लिये घरेलु उपचार और ओवर द काउंटर दवाओं का उपयोग करते हैं |

पुरानी साइनसाइटिस साइनस की समस्या आमतौर पर प्रक्रति में उपस्थित बैक्टीरिया के कारण होती है इसलिए इसका इलाज एंटी – बायोटिक दवाओं द्वारा नहीं किया जा सकता है | यह एक कवक संक्रमण द्वारा होने बाली समस्या है जिसे एंटी – फंगल दवाओं द्वारा ही ठीक किया जा सकता है | एलर्जी के कारण होने बाली साइनस की समस्या में जानवरों की डैडर या मोल्ड, धूल से होने बाली एलर्जी से बचना चाहिए |

सर्जरी द्वारा उपचार  साइनस के कुछ जटिल मामलो जब साइनस को उपचार द्वारा ठीक नहीं किया जा पा रहा हो जैसे पोलिप्स होने की अवस्था में सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है |  FESS कार्यात्मक एंडोस्कोपिक में साइनस की समस्या होने पर सर्जरी की प्रक्रिया एक प्रमुख उपचार होता है | इसके साथ ही कुछ और समस्याएँ जैसे नाक के एनी हिस्से प्रभावित होने पर भी सर्जरी की जरुरत बनती है अगर सेप्टम आवर्तक साइनस की समस्या में संक्रमण उत्पन्न कर रहा है तो इस हड्डी या उपस्थि को सीधा करने के लिए सर्जरी का प्रयोग किया जाता है |  साइनस की समस्या को बार बार होने से रोकने के लिए सर्जरी के बाद उपचार कने की आवश्यकता होती है | बच्चों में सर्जरी उसी समय की जाती है जब यह अंतिम उपाय रह जाता है |

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए :

  • साइनस के निम्न मामलों में आपको डॉक्टर से परामर्श कर लेना चाहिए…
  • लक्षणों के सात से दस दिन से अधिक तक बने रहना |
  • 101.5 डिग्री फारेनहाइट यानि की 39.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार रहना |
  • सरदर्द जो दवाओं के द्वारा ठीक न होना |
  • आँखों के आसपास सूजन रहना जिससे देखने में दिक्कत होना | ( और पढ़े – कैसे करे आँखों की देखभाल )
  • एंटी – बायोटिक के सेवन के बाद भी लक्षण बने रहना

इन सभी लक्षणों के लगातार बने रहने पर डॉक्टर से परामर्श कर लेना बहुत ही जरुरी होता है |

इस बीमारी के निवारण :

निम्न उपायों को प्रयोग करने से साइनस के रोकथाम में लाभ मिलता है… ·

  • धूम्रपान,  पान खासकर झूटे धुम्रपान से बचना चाहिए | ( और पढ़े – धूम्रपान और पान मसाला छोड़ने के उपाय )
  • श्वशन संक्रमण और जुकाम के मरीजो से दूर रहे | ( और पढ़े – जुकाम का इलाज )
  • एलर्जी की समस्या से बचना चाहिये | ( और पढ़े – एलर्जी का उपचार )
  • हाथो को साफ़ सुथरा रखना चाहिए |
  • टीकाकरण समय पर करवायें |
  • घर की हवा को साफ़ और नम रखने के लिए ह्यूमिडीफायर का प्रयोग करें |
  • घर में धूल को इकठठा नहीं होने दें |

इस रोग को दूर करने के घरेलू उपचार –

साइनस की सामान्य समस्या होने पर आप आसानी से घर पर ही घरेलु इलाज द्वारा इलाज कर सकते है | ये घरेलु उपाय दर्द को कम करके जल की उचित निकासी करके साइनस को अनब्लॉक करने में फायदा मिलता है

निम्न घरेलु उपायों को शामिल किया जाता है…

नाक की सिंचाई : नाक की सिंकाई यानी की साइनस में सिंचाई जिसे साइनस कुल्ला और साइनस लावेज के नाम से भी जाना जाता है | नाक सिंचाई की प्रक्रिया में नमक के घोल द्वारा नाक के मार्ग को साफ़ किया जाता है |

वार्म कम्प्रेस: ​​साइनस से चेहरे के प्रभावित हिस्सों पर गर्म सेक को धीरे धीरे लगाने से सूजन और परेशानी की समस्या में कुछ हद तक राहत मिल जाती है |

दर्द निवारक : दर्द निवारक को प्रयोग करने से दर्द और बुखार के लक्षणों में आराम मिलता है |

स्टीम इनहेलेशन : गर्म हवाओं की सांस लेने से साइनस के वजह से होने बाले ब्लॉकेज में राहत मिलती है | घर पर एक कटोरी में गर्म पानी में अवश्यकतानुसार मेंथोनल या नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदे मिलाकर इसकी भाप लेने से साइनस में राहत मिलती है | इस समस्या में इन तेलों को सीधे प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए इनकी मात्रा के बारे में डॉक्टर से परामर्श कर लेना जरुरी होता है |

डेकोंगेस्टंट टैबलेट और स्प्रे : डेकोंगेस्टंट टैबलेट और स्प्रे को प्रयोग करने से इस बीमारी की समस्या में सूजन से आराम मिलता है, और रोग को खत्म करने में लाभ मिलता है | इस बीमारी की समस्या होने पर टैबलेट और स्प्रे को तीन दिन से अधिक समय तक प्रयोग नहीं करना चाहिए | डेकोंगेस्टंट टैबलेट और स्प्रे को ऑनलाइन आसानी से ख़रीदा जा सकता है |

जलयोजन और आराम : इस समस्या में नियम से तरल पदार्थो का सेवन करने से और पर्याप्त आराम करने से साइनस के लक्षणों को कम किया जा सकता है |

अपने डॉक्टर से परामर्श करके ही इन उपायों को प्रयोग करना चाहिये|

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