रेबीज के कारण, लक्षण व सरल इलाज – Rabies Treatment In Hindi

रोग व इलाज

रेबीज एक खतरनाक संक्रमण बीमारी है | यह समस्या किसी भी जानवर की लार के द्वारा फैलता है | रेबीज नामक समस्या न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स वायरस के कारण ही व्यक्ति के शरीर में जन्म लेती है | यह समस्या केवल इस वायरस से ग्रस्त जानवर के काटने व पंजे द्वारा खरोचने से भी व्यक्ति के शरीर के शरीर में जन्म ले लेता है | रेबीज व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है | इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा बच्चों को होता है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार यह बताया गया है | की हर साल पूरी दुनिया में 65000 लोग रेबीज के कारण अपन जान से हांथ धो बैठते है | अगर हम भारत की ही बात करे | तो हर साल भारत में ही 30000 लोग इस बीमारी के कारण मारे जाते है | अगर इस बीमारी का सही समय पर इलाज ना कराया जाये तो व्यक्ति को कई प्रकार की समाया का सामना भी करना पड़ता है | इसीलिए आज हम आपको रेबीज के बारे में पूर्ण जानकारी देने जा रहे है | तो आइये जानते है | रेबीज को विस्तार से

जाने रेबीज के प्रकार के बारे में

रेबीज मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है |

  1. उग्र रेबीज – उग्र रेबीज से ग्रस्त लोगो को अति सक्रिय और अनियमित व्यवहार जैसी समाया का सामना करना पड़ता है |
  2. पैरालिटिक रेबीज – पैरालिटिक रेबीज रेबीज का ही हिस्सा होता है | अगर सही समय पर उपचार ना कराया जाये | तो पैरालिटिक रेबीज की समस्या आने लगती है | इससे ग्रस्त लोग धीरे धीरे विकलांग होने लगते है | या फिर व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है |

जैसा कि आपको पता है | रेबीज न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स नामक वायरस से ग्रस्त जानवर के संपर्क में आने से जैसे काटने से लार के संपर्क में आने से खुराचने से व्यक्ति को इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है | यह वायरस बहुत तेजी से अपना असर दिखता है | अगर संक्रमित जानवर किसी अन्य जानवर को काट ले तो यह वायरस उस जानवर को भी अपनी गिरफ्त में ले लेता है | यदि इस वायरस से ग्रस्त जानवर की लार व्यक्ति के घाव पर, मुहं में या फिर आँखों में चली जाये | तो व्यक्ति रेबीज जैसी समस्या का शिकार हो जाता है | यह वायरस केवल शरर के अन्दर प्रवेश करने से ही रेबीज की समस्या का सामना करना पड़ता है | न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स नामक वायरस सबसे पहले जानवरों को ही अपनी गिरफ्त में लेता है | यह जानवर कोई भी हो सकते है | जैसे की

  • कुत्ते के अन्दर |
  • गायों के अन्दर |
  • बिल्ली के अन्दर |
  • बकरी के अन्दर |
  • चमगादड़ के अन्दर |
  • बंदर के अन्दर |
  • घोड़े के अन्दर |

भी न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स नामक वायरस फ़ैल सकता है | इसीलिए अगर आप किसी जानवर को पाल रहे है | तो उसका समय समय पर चेकअप जरुर करवाते रहे |

क्या लक्षण होते है ?

  • बुखार की समस्या का होना
  • तेज सरदर्द होना
  • मतली जैसा महसूस होना |
  • उल्टी की समस्या का होना |
  • व्याकुलता व अशांति महसूस करना
  • अधिक चिंता होने लगना |
  • समय समय पर उलझन की समस्या का होना |
  • अति सक्रियता वाला व्यवहार करना |
  • निगलने में कठिनाई का होना |
  • अत्यधिक लार आना
  • पानी से डर लगना |
  • आंशिक अपंग की समस्या का होना |

कैसे करे बचाव

  • आपके द्वारा पाले गए जानवर का समय समय पर चेकअप व टीका जरुर लगवाएं |
  • पालतू जानवर को घर से बहार ना घुमने दे |
  • जंगली जानवर से दुरी बनाकर रखे |
  • न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स से ग्रस्त जानवर से दुरी बनाकर रखे |
  • अधिक समय तक पालतू जानवर को अन्य जानवर के साथ ना खेलने दे |
  • समय रहते रेबीज का टीका जरुर लगवाये |

जानिये इसके इलाज के बारे में |

इसकी समस्या होने पर पोस्ट-एक्सपोज़र प्रॉफीलैक्सिस की समस्या का आप सरल उपचार कर सकते है | पोस्ट-एक्सपोज़र प्रॉफीलैक्सिस हमारे तांत्रिक तंत्र में वायरस को रोकता है | अगर न्यूरोट्रोपिक लाइसिसिवर्स वायरस व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र में चला जाता है | तो सके द्वारा व्यक्ति की असन्य मौत हो जाती है | अगर यह समस्या किसी गर्भवती महिला को है | तो उस महिला को अपने बच्चे के लिए रेबीज शॉट्स का इस्तमाल करना चाहिये | आइये जानते हैं रेबीज शॉट्स के प्रयोग के बारे में

  • सबसे पहले कटे हुये घाव को अच्छी तरह साफ कर ले |
  • फिर तुरंत डॉक्टर के पास जा कर प्रभावी रेबीज का टीका लगवाये |
  • रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन का इस्तमाल भी जरुर करे |
  • घाव पर हल्दी, नमक, घी, मिर्च, हाइड्रोजन- पेरोक्साइड और गाय के गोबर का उपयोग करे |
  • रेब्ज का फुल कोर्स करे व समय समय पर टीके जरुर लगवाये |

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