खर्राटे का सही इलाज -TREATMENT SNORING IN HINDI

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खर्राटे का सही इलाज

खर्राट का सही इलाज सही समय पर करवा लेना चाहिए क्योकि दिन भर काम करने से हुई शरीर में थकान के बाद रात को चैन की नींद सोने का मजा ही कुछ अलग है है। और फिर आप जैसे ही सोने जायें तो उसी समय आपका साथी जोर-जोर से खर्राटे लेने लगे तो सारा मजा खराब हो जाता नींद भी उड़ जाती है। ऐसे समय में आप समझ नहीं पाते कि खुद सोएं या साथी को उठा दें।

खर्राटे लेना एक साधारण-सी समस्या है, लेकिन जब यह बीमारी के रूप में बदल जाती है तो बहुत बड़ी परेशानी बन जाती है। आइये अच्छी तरह जानते है खर्राटो के बारे में |

सोते समय जब कोई व्यक्ति को सांस के साथ तेज आवाज और वाइब्रेशन आने लगते है उसे हम खर्राटे कहते है। कई बार खर्राटे स्वास्थ से संबंधी परेशानियों की ओर इशारा करते हैं, जिसे बहुत से लोग समझते नही है ।

कुछ लोगो के खर्राटे धीमी आवाज में आते हैं परन्तु अक्सर ये आवाजें इतनी तेज हो जाती हैं कि साथ में सोने वाले वयक्ती की नींद खराब कर देती हैं। खर्राटों का सही समय पर इलाज न कराया जाए तो यह स्लीप एप्निया की वजह बन सकता है।

खर्राटे क्यों आते हैं

बहुत से लोगों को लगता है कि खर्राटे आने का कारण ज्यादा थकान है इसलिए वे इसे नजरंदाज कर देते हैं। इससे परेशानी बढ़ जाती है। फ़िलहाल , सोते समय सांस का धीरे धीरे चलना खर्राटे आने का मुख्य कारण है।

गले के पिछले हिस्से के छोटा हो जाने पर ऑक्सिजन छोटी जगह से होती हुई जाती है, जिससे आसपास के टिशू वाइब्रेट होने लगते है ,जिस कारण आपको खर्राटे आने लगते है ।

कुछ लोग पीठ के बल सोते हैं, जिससे जीभ पीछे की तरफ चली जाती है। जिससे सांस लेने और छोड़ने में काफी परेशानी आने लग जाती है। इससे सांस के साथ आवाज और वाइब्रेशन होने लगता है। और फिर खर्राटे आना चालू हो जाते है |

खर्राटे आने का एक कारण नीचे वाले जबड़े का छोटा होना भी है। जब व्यक्ति का जबड़ा अपने सही रुप से छोटा होता है तो जब वयक्ती लेटता है तो उसकी जीभ पीछे की तरफ हो जाती है जिसके करन वो सांस की नली को ब्लॉक कर देती है। ऐसे में सांस लेने और छोड़ने में काफी परेशानी होती है, जिस कारण वाइब्रेशन होता है। और फिर खर्राटे आना शुरू हो जाते है |

नाक की हड्डी टेढ़ी होना

खर्राटे आने की एक वजह ये भी है नाक की हड्डी टेढ़ी होना और नाक के अन्दर का मांस बढ़ा होना । इसमें भी सांस लेने के लिए जोर लगाना पड़ता है। इसी कारण सांस के साथ आवाज आती है।

अगर आपका ज्यादा वजन बढ़ गया है तो ये बढ़ा हुआ वजन भी खर्राटों को जन्म देता है। जब किसी वयक्ती का वजन बढ़ता है, तो वजन बढने के कारण उसकी गर्दन पर ज्यादा मांस लटकने लगता है। जिसके कारण जब वयक्ती लेटता है तो उस समय उसके बढ़े हुए मांस की वजह से सांस की नली दब जाती है और वयक्ती को सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगती है।

बहुत से लोगो की सांस लेने वाली नली छोटी और कमजोर होती है, जिस कारण वयक्ती को सांस लेते समय आसपास के टिश्यू वाइब्रेट होते हैं और सांस के साथ तेज़ आवाज़ आने लगती है।

अगर किसी व्यक्ति की गर्दन ज्यादा छोटी हो तो उसके भी सोते समय सांस के साथ आवाज आती है।

बच्चों को खर्राटे क्यों आते है

  • गले की दोनों गिल्टी का बढ़े होना
  • जीभ का मोटी होना |
  • नाक की हड्डी टेडी होना या जुखाम का होना जिससे साँस लेने में रुकावट आती है |

खर्राटे रोकने के उपाय

अगर आपके बच्चे को खर्राटे आते है तो उसका एक उपाय यह है अगर उसके गले की गिल्टी बढ़ गयी है , तो उसकी सर्जरी करवा कर बच्चे को खर्राटे होने से बचाया जा सकता है। कई बार इलाज के दौरान डॉक्टर यूवयल को भी काट देते है|

जिससे बच्चे को आगे भविष्य में एप्निया जैसी बीमारी न होने पायें । डॉक्टरो का मानना है की अगर बच्चे की उम्र 16-17 के बिच है और उसकी नाक की हड्डी बढ़ी हुई है तो उसकी सर्जरी नही की जाती |

जाँच कैसे कराये

1. डायनैमिक एमआरआई:

यह जाँच तब की जाती है जब खर्राटो का लेवल बढ़ जाता है इसकी मदद से खर्राटों के लेवल की जांच के लिए की जाती है। इस जाँच में कम से कम 1-2 मिनट लगते हैं , क्योकि इसमें व्यक्ति को सोने के लिए कहा जाता है और जब वयक्ती सो जाता है तो उसके खर्राटे, थूक निगलना, सोने का तरीका आदि को देखा जाता है। इस जाँच में 8 से 10 हजार का खर्चा आता है |

2. स्लीप स्टडी:

यह एक ऐसी प्रकार की जाँच है जिसमे व्यक्ति के सोने के बाद उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। यह जाँच तब होती है जब परेशानी ज्यादा हो जायें । इस जाँच में वयक्ती के सोने के बाद उसकी देखरेख मशीनों द्वारा की जाती है । इस जाँच मे वयक्ती को नार्मल तरीके से रोज जैसे सोता है वैसे सोना होता है।

वयक्ती के सोने के दौरान मशीनें शरीर की प्रतिक्रिया को नोट करती हैं। स्लीप स्टडी की जाँच करवाने से पहले व्यक्ति को ऐसी कोई दवा नहीं खाना चाहिए जिससे उसे नींद आए। और इस जाँच के बाद जो परिणाम आता है उसे पॉलीसोम्नॉग्रफी कहा जाता है।

इस जाँच का तरीका

इस जाँच में व्यक्ति के सोने के बाद मशीन उसके खर्राटे लेने का तरीका, सोते समय वह कितनी बार उठता है, दिमाग और आंख की गतिविधियां, ब्लड में ऑक्सिजन और कार्बन-डाई-ऑक्साइड का लेवल, दिल की गतिविधि आदि पर नजर रखती है।

साथ ही, में मशीन वयक्ती के सोते समय उसकी हरकतों पर भी नजर रखती है , जैसे कि सोते समय दांत पीसना, सांस कितनी देर में और कितनी देर के लिए रुकती है जैसी बातें भी नोटिस की जाती हैं। ये सब जाँच हो जाने के बाद ही वयक्ती का इलाज शुरु किया जाता है।

अगर इस जाँच में वयक्ती की साँस घंटे भर में 25 बार से अधिक रुक रही है तो इसे बहुत ही खतरनाक माना जाता है। इस जाँच का खर्च 6-7 हजार रुपये तक आता है |

विशेष ध्यान देना चाहिए

  • अगर किसी वयक्ती को खर्राटे आते हो और उसके खर्राटों का सही समय के चलते इलाज न कराया जायें तो यह खर्राटे एक खतरनाक बीमारी बन सकती है। खर्राटो में सोते समय वयक्ती की सांस कुछ पल के लिए रुक सी जाती है।
  • ऐसे में रुकावट के बाद तेज़ आवाज के साथ सांस अंदर बहार निकलती है, जिससे उसके पास सो रहे वयक्ती को डर लग जाता है | बहुत से लोग इसको भी खर्राटा ही मानते है , जबकि सच में कुछ पल के लिए सांस रुक जाती है। सांस का इस तरीके से रुकना एप्निया कहलाता है।
  • अगर आपका इस बीमारी पर सही समय पर ध्यान न गया तो आपको बाद में सांस लेने में दिक्कत आना चालू हो जायगी तथा सांस रुकने का समय बढ़ने लगता है
  •  इसमें वयक्ती की मौत भी हो सकती है अगर यह खतरनाक स्टेज तक पहुँच जायें इसलिए इसका सही समय पर ध्यान देना ही उचित है |

खर्राटे कितने प्रकार के होते है

सेंट्रल स्लीप एप्निया:

  • इस एप्निया में वयक्ती की सांस लेने की क्षमता 5 से 10 सेकेंड तक की रुक जाती और फिर चलने लगती है | इस एप्निया में वयक्ती की छाती और पेट चलता रहता है
  • सांस के साथ खराब खर्राटे भी आने लगते हैं। इस स्थिति को उसके पास सो रहा वयक्ती भी आसानी से नहीं समझ पाता।

ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया:

इस एप्निया में वयक्ती की सांस कुछ पल के लिए बंद हो जाती है तथा इसके साथ छाती और पेट का हिलना भी बंद हो जाता है। वयक्ती को सही ऑक्सिजन न मिलने पर उसे बेचैनी होने लगती है तथा उसे घुटन भी होने लगती है जिसके कारण वयक्ती एकदम से हड़बड़ा कर उठ जाता है।

क्या हैं खर्राटो के लक्षण

  • इसका मुख्य लक्षण है तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना |
  • यदि कोई वयक्ती की साँस थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ सेकेंड के लिए रुक जाती है तो इसका एक लक्षण यह भी है |
  • धीरे-धीरे सांस अंदर बहार करने की गति भी इसका एक कारण है |
  • सोते समय वयक्ती को सांस न आने पर हड़बड़ा कर उठ जाना भी एक कारण है |
  • पूरा दिन सुस्त और आलस से भरे रहने से भी |
  • जब किसी वयक्ती की नींद पूरी हो जायें फिर भी उसे दिनभर नींद आती है तो समझ जाओ यह खर्राटो का लक्षण है |
  •  थकान महसूस होना भी इसका मुख्य लक्षण है |

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