अस्थमा या दमा मे सावधानिया ?

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अस्थमा (Asthma) तो आप जानते ही है आजकल बदलते वातावरण प्रदुषण, खाने पीने की वस्तुओ में मिलावट व शुद्धता में कमी के चलते अस्थमा (Asthma) जिसे रोजमर्रा की भाषा में दमा भी कहा जाता है के मरीजो की संख्या में निरंतर बढोत्तरी होती जा रही है | जब किसी व्यक्ति में कई रोग उत्पन्न हो जाते है तो उस व्यक्ति को श्वांस लेने दिक्कत आने लगती है जिसके कारण (Asthma Causes) उसे खांसी की समस्या हो जाती है

अस्थमा या दमा क्या है ?

अस्थमा (Asthma) एक गंभीर समस्या है जो श्वास नलियो को प्रभावित करती है श्वांस नलिकाये फेफड़ो से हवा को अंदर बाहर करती है, अस्थमा (Asthma) होने पर इन नलिकाओ की भीतरी दीवारों में सूजन हो जाती है |यह सूजन नलिकाओ को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी बैचैन कर देने वाली चीजो के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है, जब नलिकाये प्रतिक्रिया करती है तो उनमे सकुंचन होता है और इस स्थिति में फेफड़ो के अंदर हवा की मात्रा में कमी आ जाती है इससे खासी आना, छाती कड़ा होना, नाक बहना व सुबह – शाम साँस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण (Asthma Symptoms) पैदा होते है

अस्थमा (Asthma) एक अथवा एक से अधिक पदार्थो के प्रति शरीर की प्रणाली अविशेष पदार्थो को सहन नही कर पाती है और जिस रूप में अपनी प्रतिक्रिया या विरोध प्रकट करती है उसे एलर्जी कहते है |

हमारी श्वसन प्रणाली जब किन्ही एलजेर्स के प्रति एलर्जी प्रकट करती है तो वह अस्थमा (Asthma Treatment) होता है

यह साँस संबंधी रोगों में सबसे अधिक पीड़ादायक असहनीय व कष्टदायी है |

अस्थमा के रोगी को साँस फूलने या साँस न आने के दौरे बार – बार पड़ते है

उन दोरो के बीच यह अक्सर पूरी तरह सामान्य (Asthma Treatment) भी हो जाता है |
इस रोग की शुरुआत किसी भी उम्र में हो सकती है,

लेकिन ज्यादातर यह बचपन (Asthma In Children) में ही शुरु हो जाता है ,

हर 10 में से एक बच्चा (Asthma In Children) और 20 में से एक वालिग दमा ( अस्थमा ) से पीड़ित होता है

एक अनुमान के मुताबिक करीब 8 करोड़ भारतीय और 2.5 करोड़ अमेरिकन अस्थमा (Asthma) से पीड़ित है |

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